पुल का इंतजार छोड़ ग्रामीणों ने खुद बना लिया रास्ता, ड्रम-बांस से तैयार किया अस्थायी पुल
नीले ड्रम से बना पुल लोगो का आवागमन चालू | Prabhat Khabar Network
जब पुल निर्माण में देरी हुई, तो बसंतराय के ग्रामीणों ने हार नहीं मानी. उन्होंने आपसी सहयोग से ड्रम, बांस और लकड़ी का इस्तेमाल कर नदी पर एक अस्थायी पुल बना लिया. यह पहल न केवल आवागमन को सुगम बना रही है, बल्कि उनकी एकता और दृढ़ संकल्प का भी प्रतीक है.
संवाददाता, गोड्डा. पुल नहीं मिला तो बसंतराय के ग्रामीणों ने इंतजार करने के बजाय खुद रास्ता निकाल लिया. सांचपुर-सांखी और मोकलचक के बीच बहने वाली नदी पर ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और श्रमदान से नीले लोहे के ड्रम, बांस और लकड़ी के पटरे की मदद से अस्थायी पुल तैयार कर दिया. अब लोगों को नदी पार करने में राहत मिली है.

आवागमन में होती थी परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार नदी पर स्थायी पुल नहीं होने से किसान, मजदूर, स्कूली बच्चे और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी होती थी. बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और विकट हो जाती थी. कई बार आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता था.
ड्रम, बांस और लकड़ी से बना रास्ता
लंबे समय से पुल की मांग के बावजूद सुविधा नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने खुद पहल करने का निर्णय लिया. ग्रामीणों ने लोहे के ड्रम, बांस और लकड़ी के पटरे का इस्तेमाल कर नदी के दोनों किनारों को जोड़ते हुए अस्थायी पुल बनाया है.
आसपास के गांवों को भी राहत
यह स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन फिलहाल ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे केवल सांचपुर-सांखी और मोकलचक ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी.
स्थायी पुल की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी पर स्थायी पुल का निर्माण कराने की मांग की है. जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की ओर से अपेक्षित सुविधा नहीं मिलने के बाद ग्रामीणों की इस पहल की इलाके में चर्चा हो रही है. लोग उनकी एकजुटता और श्रमदान की सराहना कर रहे हैं.
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