पथरगामा प्रखंड क्षेत्र में आदिवासियों का छह दिवसीय सोहराय महापर्व बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया. महापर्व के दौरान ढोल-नगाड़े और मांदर की थाप पर आदिवासी महिला-पुरुष की टोली पारंपरिक लिवास में नाच-गान करती रही. सोहराय पर्व के छठे और अंतिम दिन बेंझातुंज मनाया गया, जिसमें गांव के युवकों ने शिकार खेला. शिकार समाप्त होने के बाद तीरंदाजी प्रतियोगिता आयोजित की गयी. प्रतियोगिता में गांव के बीच एक खूंटे में रोटी का टुकड़ा बांधकर निशाना लगाया गया. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीरंदाज को गांव की ओर से पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. पिछले पांच दिनों तक पूरे प्रखंड के गांवों में पूजन कार्यक्रम के साथ नाच-गान का दौर चलता रहा. समुदाय के महिला-पुरुष और बच्चे इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेते रहे. इस पर्व की धूम भांजपुर, खैरबन्नी, जगरनाथपुर, कुमर्सी, केरवार, सरैया, तरडीहा, महुआसोल, तेलनी, मांछीटाड़, ढीबाबांध, डुमरिया, कमलडीहा, धोपडीहा समेत अन्य आदिवासी बहुल गांवों में देखने को मिली. भांजपुर व कुमर्सी आदिवासी टोला में सोहराय पर्व के अवसर पर आदिवासी समाज के महिला-पुरुष और छोटे बच्चे सुबह और शाम के समय संथाली नृत्य करते हैं. भांजपुर निवासी ज्ञानदेव टुडू और कुमर्सी निवासी गोपाल टुडू ने बताया कि सोहराय आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण पर्व है, जो भाईचारा, एकता और संस्कृति के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है.
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