40 वर्ष पूर्व भी आदिवासियों ने डैम बनाने का किया था विरोध

Updated at : 02 Mar 2017 5:29 AM (IST)
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40 वर्ष पूर्व भी आदिवासियों ने डैम बनाने का किया था विरोध

शिबू सोरेन ने किया था आदिवासियों का नेतृत्व गुरुजी गोड्डा आने पर सुगाबथान में ही गुजारते थे रात 1977-78 के वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सुगाबथान में डैम की हुई थी स्वीकृति पोड़ैयाहाट : सुगाबथान में बुधवार को डैम व पुलिस लाइन का आदिवासियों द्वारा किया गया विरोध 40 साल के पुरानी याद को एक […]

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शिबू सोरेन ने किया था आदिवासियों का नेतृत्व

गुरुजी गोड्डा आने पर सुगाबथान में ही गुजारते थे रात
1977-78 के वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सुगाबथान में डैम की हुई थी स्वीकृति
पोड़ैयाहाट : सुगाबथान में बुधवार को डैम व पुलिस लाइन का आदिवासियों द्वारा किया गया विरोध 40 साल के पुरानी याद को एक बार फिर याद कर दिया. इस दौरान ग्रामीण डैम व पुलिस लाइन बनने के विरोध में आवाज बुलंद किये हुए थे. यहां के आदिवासी जमीन को देकर विस्थापित होने के लिए तैयार नहीं है. सात गांव के 22 मौजा के आदिवासियों ने पारंपरिक हथियार लेकर प्रदर्शन किया. इसमें तीन पंचायत के मुखिया, मांझी हड़ाम व गुरुजी शिबू सोरेन के मित्र रघुनाथपुर गांव
के जोन मरांडी भी शामिल हुए. जोन मरांडी ने बताया कि 40 वर्षों से सुगाबथान में डैम बनने का विरोध किया जा रहा है. 40 वर्ष पूर्व में 1977-78 के वर्तमान सरकार ने सुगाबथान में डैम बनाने की स्वीकृति दी थी. गुरुजी शिबू सोरेन के नेतृत्व में आदिवासियों ने डैम बनने का विरोध किया था. अब फिर से एक बार भाजपा की सरकार बनने पर सांसद ने जान बूझ कर सुगाबथान में डैम बना कर आदिवासियों को विस्थापित करने की साजिश रच रहे हैं. जो किसी भी सूरत में चलने नहीं दिया जायेगा.
आंदोलन के लिए जाना जाता है सुगाबथान
आदिवासियों ने कहा कि 1970 से लगातार आंदोलन करते रहे हैं. सुगाबथान आंदोलन करने का गांव जाना जाता है. डैम बनने के विरोध में अगर जिंदगी भर आंदोलन करना पड़े तो सुगाबथान के आदिवासी ग्रामीण पीछे नहीं हटेंगे. इस दौरान झामुमो नेता श्यामलाल मुर्मू, छोटे सरकार, कामरेड टुडू, सुशील टुडू, मुन्ना कुमार, तालामय हांसदा, बिटिया मरांडी, मरांगमय हांसदा, सूर्यमणि किस्कू, तालाबिटी हेंब्रम आदि थे.
जान देंगे मगर डैम नहीं बनने देंगे
जोन मरांडी के साथ आदिवासियेां ने एक स्वर में कहा कि सरकार व जिला प्रशासन के मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया जायेगा. 15-20 दिन पहले भी एसपी ने स्थानीय आदिवासियों के साथ पुलिस लाइन बनाने की सहमति को लेकर वार्ता की थी. लेकिन आदिवासियों ने एक सिरे से पुलिस लाइन का विरोध किया था. आदिवासियों ने कहा कि जान देंगे मगर डैम नहीं बनने देंगे.
सिंचाई के लिए सरकार से डीप बोरिंग कराने की मांग
बरगच्छा हरियारी पंचायत की मुखिया मेरी हांसदा, अमवार संथाली पंचायत की मुखिया मेरी बेसरा व पोड़ैयाहाट पंचायत के मुखिया अनुपम भगत ने कहा कि सरकार व सांसद को इस क्षेत्र का विकास कर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराना है. इसके लिये डीप बोरिंग कराने का काम करे. किसी भी परिस्थिति में यहां के आदिवासी डैम नहीं बनने देंगे.
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