Giridih News :मंझलाडीह में 55 वर्षों से हो रही वासंतिक दुर्गा पूजा

Edited by PRADEEP KUMAR
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Giridih News :बगोदर प्रखंड के मंझलाडीह में वासंतिक दुर्गोत्सव का इतिहास 55 वर्ष पुराना है. यहां पर वर्ष 1970 में पूजा शुरू हुई थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले बगोदर में चैती दुर्गापूजा नहीं होती थी. गांव के लोग पूजा के लिए डुमरी और हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ जाते थे. इससे लोगों को परेशानी होती थी और समय भी काफी बर्बाद होता था.

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बगोदर प्रखंड के मंझलाडीह में वासंतिक दुर्गोत्सव का इतिहास 55 वर्ष पुराना है. यहां पर वर्ष 1970 में पूजा शुरू हुई थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले बगोदर में चैती दुर्गापूजा नहीं होती थी. गांव के लोग पूजा के लिए डुमरी और हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ जाते थे. इससे लोगों को परेशानी होती थी और समय भी काफी बर्बाद होता था. इसे देखते हुए गांव के लोगों ने पूजा शुरू करने का निर्णय लिया. तिरपाल से घेर कर प्रतिमा स्थापित कर पूजा की शुरुआथ हुई. बाद में धीरे-धीरे गांव के लोगों के सहयोग से इसका विस्तार किया गया. पूजा को शुरू करने में प्रमुख रूप से स्व ज्ञानी मिस्त्री, स्व रेशो मिस्त्री, स्व रीतलाल नायक, स्व त्रिभुवन मिस्त्री, स्व चिंतामन मिस्त्री, स्व शिवलाल मिस्त्री, स्व माधो साव, स्व परमेश्वर राय, तोखो साव, साधु साव समेत अन्य लोगों के अथक प्रयास से श्री-श्री चैती दुर्गापूजा शुरू की गयी. वहीं, वर्तमान में मंझलाडीह में भव्य दुर्गा मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. इसका कार्य भी अंतिम चरण में है. मंदिर परिसर में भगवान विश्वकर्मा, महावीरजी, शंकर भगवान व शीतला माता का मंदिर है. वहीं, चैती दुर्गापूजा को लेकर कलश स्थापना के साथ ही नवरात्र से शुरू होती है. बुधवार के चौथे रूप कुष्माण्डा की पूजा मुरलीधर शर्मा ने की. यहां पूजा के दौरान प्रतिनित दिन पाठ होता है. शाम में कुंआरी कन्या और महिला आरतीं करतीं हैं. षष्ठी को बेलभरण की पूजा की जाती है. साथ ही मां का शृंगार भी होता है. वहीं, सप्तमी तिथि को मां दुर्गा का पट खुलता है.

वैष्णव रीति से होती है पूजा

बता दें कि यहां वैष्णव तरीके से मां दुर्गा की पूजा शुरू की गयी थी, जो आज भी जारी है. पूजा के दौरान गांव में मांस, मदिरा की बिक्री और सेवन नहीं किया जाता है. यहां चार दिनों तक यहां मेला भी लगता है. इस दौरान लोगों की भीड़ उमड़ती है. एकादशी के दिन भव्य शोभा यात्रा निकालकर मां दुर्गा की प्रतिमा को स्थानीय तालाब पिपरा बांध में विसर्जित किया जाता है. इस वर्ष भी पूजा कमेटी अध्यक्ष दुर्गेश कुमार के नेतृत्व में पूजा का सफल आयोजन किया जा रहा है. इसमें लोग बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं. इसके अलावे दुर्गा मंदिर परिसर में रामनवमी झंडा भी खड़ा किया जाता है. महावीरी झंडा के साथ रामनवमी जुलूस निकाला जाता है. अखाड़ा में युवक लाठी व पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र से हैरतअंगेज प्रदर्शन करते हैं. युवाओं को कमेटी पुरस्कृत भी करती है.

कोयलांचल क्षेत्र के बनियाडीह में दस वर्षों से हो रहा है चैती दुर्गापूजा

पूजन व आरती में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

गिरिडीह कोयलांचल क्षेत्र अंतर्गत बनियाडीह स्थित शंकर सिंह के आवास पर धूमधाम के साथ चैती दुर्गापूजा को लेकर तैयारी की जा रही है. पंडाल का निर्माण किया जा रहा है. मां दुर्गे की पूजन व आरती के समय यहां पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. कोयलांचल क्षेत्र के बनियाडीह सहित गांधीनगर, प्रेमनगर, कोपा, अकदोनी, चिलगा, मटरूखा, पपरवाटांड़ से श्रद्धालु पहुंचकर मां दुर्गे की पूजा अर्चना करते हैं. इस संबंध में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मनोज सिंह ने बताया कि उनके पिताजी शंकर सिंह ने प्रतिमा स्थापित कर चैती दुर्गापूजा की शुरूआत की थी. पिछले दस वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर भक्तिभाव के साथ पूजा की जा रही है. इस वर्ष पूजन के सफल आयोजन को लेकर ललन सिंह, मनोज सिंह, राजीव सिंह पिंटू, आदि जुटे हुए हैं. बताया गया कि नवरात्र में दोपहर और शाम में भोग का वितरण किया जाता है. भोग ग्रहण करने के लिए काफी संख्या में भक्त पहुंचते हैं. विसर्जन के दिन विभिन्न अखाड़ा समितियों द्वारा यहां पर करतब का प्रदर्शन किया जाता है.

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