बिना डिग्री वाले डॉक्टर कर रहे प्रसव और सर्जरी? धनवार के श्रीराम हॉस्पिटल में महिला की मौत के बाद ग्रामीणों का हंगामा

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मृतक के परिजनों का नर्सिंग होम के सामने हंगामा। | Prabhat Khabar Network

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धनवार प्रखंड के निजी अस्पतालों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. बिना मान्य डिग्री वाले लोग मरीजों का इलाज और सर्जरी कर रहे हैं. हाल ही में श्रीराम हॉस्पिटल में एक प्रसूता की मौत के बाद ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया.

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गिरिडीह. धनवार प्रखंड के गंगापुर, कोड़ाडीह, मंसाडीह समेत कई इलाकों में संचालित कुछ निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ संस्थानों में बिना मान्य चिकित्सकीय डिग्री वाले लोग मरीजों का इलाज, प्रसव और सर्जरी कर रहे हैं. गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किये जाने और कुछ मामलों में मरीजों की मौत होने के आरोप भी लगाये गये हैं.

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स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में इस तरह के निजी अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित होने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं. आरोप है कि इलाज अथवा ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति बिगड़ने या मौत होने पर कुछ मामलों में परिजनों को आर्थिक सहायता देकर मामला शांत कराने का प्रयास किया जाता है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

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प्रसूता की मौत के बाद श्रीराम हॉस्पिटल में हंगामा

हाल की एक घटना के बाद निजी अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर मामला फिर चर्चा में आया है. गंगापुर स्थित श्रीराम हॉस्पिटल में प्रसव के लिए भर्ती बिसनीटिकर निवासी चंदन तुरी की पत्नी गुड़िया देवी की मौत के बाद शुक्रवार को परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया.

परिजनों के मुताबिक, गुड़िया देवी को बुधवार को प्रसव के लिए श्रीराम हॉस्पिटल लाया गया था. आरोप है कि दिनेश यादव ने सामान्य प्रसव कराने की बात कहकर महिला को भर्ती किया. बाद में अचानक सर्जरी की बात कही गयी. सर्जरी के बाद अस्पताल की ओर से बच्चे के सुरक्षित होने की जानकारी दी गयी. कुछ समय बाद महिला की हालत गंभीर बताते हुए परिजनों को उसे हजारीबाग ले जाने की सलाह दी गयी.

परिजन महिला को एंबुलेंस से हजारीबाग ले गये, जहां से चिकित्सकों ने उसे रांची रेफर कर दिया. परिजनों के अनुसार, रिम्स पहुंचने पर चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया. मौत की सूचना मिलने के बाद मायके और ससुराल पक्ष के लोग गंगापुर पहुंचे और अस्पताल में काफी देर तक हंगामा किया.

3.50 लाख रुपये सहायता देने का परिजनों का दावा

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से 3.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिये जाने के बाद मामला शांत हुआ. हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आ सका है. महिला की मौत के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है. मौत की परिस्थितियों और इलाज की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की स्पष्ट जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी.

दवा और इलाज की प्रक्रिया पर भी सवाल

स्थानीय लोगों ने धनवार क्षेत्र के कुछ निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में मरीजों को दी जाने वाली दवाओं तथा इलाज की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाये हैं. उनका आरोप है कि मरीजों को महंगी दवाओं के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है. ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के पास सीमित विकल्प होने के कारण उन्हें निजी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है.

लोगों का कहना है कि कई अस्पतालों के बोर्ड पर चिकित्सकों के नाम प्रदर्शित किये जाते हैं, लेकिन मरीजों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती कि संबंधित चिकित्सक की शैक्षणिक और चिकित्सकीय योग्यता क्या है तथा कौन व्यक्ति किस प्रकार का इलाज या सर्जरी कर रहा है.

स्थानीय लोगों ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, इलाज की प्रक्रिया तथा सर्जरी से संबंधित व्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की है. साथ ही नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की गयी है. संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है.

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