Giridih: सदर अस्पताल की बिजली गुल, मोबाइल की फ्लैश लाइट में हुआ घायलों का इलाज

Updated at : 15 Mar 2026 9:37 PM (IST)
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Sadar Hospital Giridih

मोबाइल की फ्लैश लाइट की रोशनी में घायल बच्चे का इलाज करते स्वास्थ्यकर्मी.

Giridih: रविवार को सड़क दुर्घटना में घायल कई मरीज जब सदर अस्पताल पहुंचे तो वहां की बिजली अचानक गुल हो गई. स्वास्थ्यकर्मियों ने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट में घायलों का इलाज किया. घायलों के परिजन अस्पताल की व्यवस्था से काफी नाराज दिखे.

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विष्णु स्वर्णकार
Giridih: लाख दावों और सुधार की कोशिशों के बावजूद गिरिडीह सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गयी है. शनिवार देर रात बिजली गुल होने से जहां अस्पताल में अफरा-तफरी मच गयी, वहीं रविवार शाम भी बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गयी. हालात ऐसे बन गये कि गंभीर रूप से घायल मरीजों का इलाज मोबाइल की फ्लैश लाइट की रोशनी में करना पड़ा. बताया जाता है कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के तिगोंजोरी निवासी नीलमुनि देवी, अजय हेंब्रम, अनुष्का हेंब्रम, विजय किस्कू और पवन किस्कू बाइक व ऑटो की टक्कर में घायल हो गये थे. सभी घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां पहुंचते ही उन्हें बदहाल व्यवस्था का सामना करना पड़ा.

इमरजेंसी वार्ड तक में नहीं थी बिजली

बिजली गुल होने के कारण अस्पताल परिसर पूरी तरह अंधेरे में डूबा रहा. यहां तक कि ड्रेसिंग रूम में भी रोशनी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी. एक घायल का सिर फटा हुआ था. ऐसे में डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को मजबूरी में मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर उसको टांका लगाना पड़ा. यह दृश्य देखकर परिजनों में आक्रोश और चिंता दोनों दिखी. घायल के परिजन काली सोरेन ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड तक में बिजली नहीं थी, जिससे इलाज में काफी परेशानी हुई. जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 12 बजे अस्पताल के इलेक्ट्रिक विभाग के कर्मी मौके पर पहुंचे और जनरेटर स्टार्ट किया, तब जाकर स्थिति कुछ हद तक सामान्य हुई.

दोषियों पर होगी कार्रवाई

सदर अस्पताल के डीएस डॉ प्रदीप बैठा रात में बिजली गुल होने की कोई सूचना नहीं है. अस्पताल में बिजली व्यवस्था सामान्य है. पूरे मामले की जांच करायी जायेगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पायी जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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