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Giridih News :सदर अस्पताल में दवा की कमी से मरीज परेशान

Updated at : 11 Oct 2025 11:31 PM (IST)
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Giridih News :सदर अस्पताल में दवा की कमी से मरीज परेशान

Giridih News :जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में मरीजों के लिए दवा संकट गहराता जा रहा है. एक ओर लोग अस्पताल कर्मियों के बिगड़े हुए कार्यशैली से परेशान हैं तो वहीं अस्पताल में चिकित्सा संसाधनों के रहते हुए भी कर्मियों की लापरवाही से मरीजों को लाभ नहीं मिल पाता है. अस्पताल परिसर में स्थित दवा खाना में इन दिनों कई आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं.

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चिकित्सकों द्वारा मरीजों को लिखी जा रही पर्चियों में दर्ज अधिकतर दवाइयां नदारद हैं. ऐसे में मरीजों को सिर्फ गिनी-चुनी दवाइयां ही मिल पा रही है. अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि इलाज कराने के बाद जब वे दवा काउंटर पर पहुंचते हैं तो वहां उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि यह दवा फिलहाल स्टॉक में नहीं है. कई मरीजों को बाजार से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं, जो अस्पताल में मुफ्त मिलने वाली होती है. सदर अस्पताल में ना केवल शहर, बल्कि जिले के दूर-दराज़ गांवों से भी रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं. इन्हें उम्मीद होती है कि यहां इलाज के साथ-साथ दवाइयां भी निःशुल्क मिलेंगी. लेकिन जब पर्ची में लिखी गई अधिकतर दवाइयां उपलब्ध नहीं होती है तो वे मजबूरन जितनी मिलती हैं, उतनी लेकर लौट जाते हैं. जबकि प्रत्येक वर्ष दवा की खरीदी में मोटी रकम खर्च होती है. ये दवाईयां कहां जाती है, यह कह पाना मुश्किल है. जमुआ प्रखंड के एक मरीज रामेश्वर यादव ने बताया कि डॉक्टर ने उन्हें पांच तरह की दवाइयां लिखीं, लेकिन दवा दुकान से सिर्फ दो ही दवाइयां मिली. बाकी के लिए उन्हें बाजार का रुख करना पड़ा. उन्होंने कहा की अगर सरकारी अस्पताल में दवा नहीं मिलेगी तो गरीब कहां जाएगा. इसी तरह बेंगाबाद से आई एक महिला मरीज ने बताया कि वह अपने पति का इलाज कराने आई थीं, लेकिन जरूरी दवा न मिलने से उन्हें काफी परेशानी हुई. अस्पताल सूत्रों कहा कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों से कई जरूरी दवाओं की आपूर्ति समय पर नहीं हो पा रही है जिसके कारण स्टॉक खत्म हो गया है. विभाग को इसकी जानकारी दे दी गई है. जैसे ही नई खेप आएगी, दवाएं फिर से उपलब्ध करा दी जाएंगी.

दवा के लिए बाहर की दुकानों पर निर्भर हैं मरीज

सदर अस्पताल में दवाइयों की किल्लत अब मरीजों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है. अस्पताल के दवा खाना में अधिकांश आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर की दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं. डॉक्टरों द्वारा दी गई पर्ची में पांच से छह दवाइयां लिखी रहती हैं, लेकिन अस्पताल के दवा काउंटर पर दो या कभी-कभी सिर्फ एक ही दवा मिल पाती है. बाकी की दवाओं के लिए मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ता है. गांवों और दूर-दराज़ इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए यह स्थिति और भी परेशानी भरी है. गिरिडीह सदर अस्पताल पूरे जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं. इनमें अधिकांश ऐसे गरीब और असहाय लोग होते हैं जो निजी अस्पताल या क्लिनिक में इलाज कराने का खर्च नहीं उठा सकते. उन्हें उम्मीद होती है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के साथ-साथ निःशुल्क दवाएं भी मिलेंगी, लेकिन जब पर्ची की अधिकतर दवाइयां स्टॉक में नहीं बताई जाती हैं, तो उनकी सारी उम्मीदें टूट जाती हैं. मरीजों को मजबूरी में शहर की दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं. अस्पताल परिसर में अक्सर मरीजों और उनके परिजनों को दवा काउंटर के बाहर खड़ा देखा जा सकता है. जब उनकी बारी आती है, तो उन्हें कुछ गिनी-चुनी दवाइयां देकर बाकी के लिए बाहर से ले लीजिए कह दिया जाता है. यह स्थिति लंबे समय से चल रही है.

प्रतिदिन 200-250 मरीज पहुंचते हैं अस्पताल

सदर अस्पताल के दवा दुकान पर हर दिन भारी संख्या में मरीज दवा लेने पहुंचते हैं. औसतन दो सौ से ढाई सौ मरीज रोजाना पर्ची लेकर दवा काउंटर तक पहुंचते हैं. सुबह से लेकर देर दोपहर तक काउंटर पर भीड़ लगी रहती है. मरीजों की लंबी कतारें दवा काउंटर के बाहर आम नज़ारा बन चुकी हैं. हालांकि, बड़ी संख्या में आने वाले इन मरीजों को सभी दवाइयां नहीं मिल पातीं. कई मरीजों को सिर्फ कुछ ही दवाइयां देकर लौटा दिया जाता है. अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार ज्यादातर मरीज सामान्य बुखार, दर्द, संक्रमण, खांसी-जुकाम, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों की दवाओं के लिए आते हैं. लेकिन, इन सामान्य बीमारियों में भी कई दवाइयां अक्सर आउट ऑफ स्टॉक बतायी जाती हैं. स्थिति यह है कि अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिन्हें दवा की पूरी खेप नहीं मिलती. दवा काउंटर पर भीड़ और दवा की कमी, दोनों मिलकर मरीजों के लिए नई परेशानी खड़ी कर रहे हैं. इधर सदर अस्पताल के डीएस डॉ प्रदीप बैठा ने बताया कि जो दवाईयों की भी कमी है, उनकी खरीदी के लिए ऑर्डर दे दिया गया है. जल्द ही सभी दवाईयां उपलब्ध हो जायेगी.

इधर, करहरबारी आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कम संसाधनों के बाद भी बेहतर सुविधाएं

वैसे तो ग्रामीण इलाकों में स्थित कई आयुष्मान आरोग्य मंदिर के बंद रहने की सूचनाएं मिलती रहती है. लेकिन इस बीच एक सुखद खबर यह है कि करहरबारी में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर बेहतर सुविधाओं के लिए आसपास के इलाके में मशहूर है. पिछले दिनों गिरिडीह के उपायुक्त रामनिवास यादव ने भी इस आरोग्य मंदिर का निरीक्षण करने के बाद वहां की व्यवस्था देख खुश हुए थे. इस दौरान डीसी ने कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर स्नेहा कुमारी से आरोग्य मंदिर में इलाज की सुविधाएं और आने वाले मरीजों के बारे में पूछताछ की थी. गौरतलब बात तो यह है कि जिला मुख्यालय में स्थित गिरिडीह सदर अस्पताल समेत मातृ शिशु सेवा सदन जैसे अस्पतालों में कर्मियों की लंबी फौज के साथ-साथ कई संसाधन मौजूद हें. लेकिन कर्मियों की बिगड़ी हुई कार्यशैली का असर इन अस्पतालों में रोज देखने को मिलता है. कर्मियों की मनमानी के कारण इन अस्पतालों में रोज झंझट होता रहता है. जबकि करहरबारी गांव में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में इलाज कराने के बाद लोग संतुष्ट दिखे. इस आरोग्य मंदिर में मात्र तीन कर्मी ही तैनात हैं. कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, एमपीडब्ल्यू और एएनएम ही यहां पदस्थापित हैं. बावजूद इसके करहरबारी के आसपास के इलाकों के लोगों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिल रही है.

केंद्र में होता है 30-40 मरीजों का रजिस्ट्रेशन

करहरबारी, नरेंद्रपुर, खरियोडीह, मुस्लिम टोला, महेशलुंडी, पपरवाटांड़, नावाटांड़, बदगुंदा समेत कई गांव के लोग इस आरोग्य मंदिर में बुखार, पेट खराब, मौसमी बीमारी समेत छोटी-छोटी बीमारियों पर इलाज कराने पहुंचते हैं. इस आरोग्य मंदिर में औसतन 30 से 40 मरीजों का प्रति दिन रजिस्ट्रेशन किया जाता है. छोटी-छोटी बीमारियों का प्राथमिक उपचार करने के साथ ही मुफ्त में दवाइयां भी लोगों को दी जाती है. करहरबारी की मुखिया सहारा खातून कहती है कि यहां निर्धारित समय पर स्वास्थ्य केंद्र खुलता है और बंद होता है. कोशिश होती है कि छोटी-छोटी बीमारी के इलाज के लिए लोगों को इधर-उधर भटकना न पड़े. उन्होंने कहा कि करहरबारी समेत आसपास के इलाके के लोगों को छोटी बीमारियों के लिए बड़े अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़ता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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