चाईबासा व जमशेदपुर के ''''''''सफल मॉडल'''''''' से संवरेगा गढ़वा

प्रशासनिक अनुभव का मिलेगा लाभ
प्रशासनिक अनुभव का मिलेगा लाभ गढ़वा अनन्या मित्तल के लिए नयी चुनौती अनिवाश, गढ़वा झारखंड के तेजतर्रार आइएएस अधिकारी अनन्या मित्तल जब गढ़वा के उपायुक्त के रूप में पदभार संभालेंगे, तो उनके पास चाईबासा और जमशेदपुर जैसे बड़े जिलों का अनुभव होगा, जो गढ़वा की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है. वर्तमान में जेएसएलपीएस के सीइओ के रूप में राज्यभर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था देख रहे अनन्या मित्तल के लिए गढ़वा एक ऐसा जिला होगा, जहां उनके पूर्व के प्रयोगों की सफलता की परीक्षा होगी. अनन्या मित्तल ने चाईबासा के उपायुक्त रहते हुए भूमि राजस्व के क्षेत्र में अहम काम किये, जिससे उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली. उनके कार्यकाल में चाईबासा ने भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और विवादों के निपटारे में देशभर में नाम कमाया, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति ने भूमि सम्मान से भी नवाजा. गढ़वा में वर्तमान में म्यूटेशन और जनसुनवाई में भूमि विवाद के मामले अधिक हैं. चाईबासा की तरह अगर गढ़वा में विशेष कैंप और डिजिटल ट्रैकिंग शुरू की गयी, तो विकास योजनाओं की गति दोगुनी हो सकती है. जमशेदपुर जैसे औद्योगिक और घनी आबादी वाले जिले का नेतृत्व करते हुए अनन्या मित्तल ने बुनियादी ढांचे के प्रबंधन में महारत हासिल की. वहां सड़कों के जाल को व्यवस्थित करना और फ्लािइओवर्स/बायपास की बाधाओं को दूर करना उनके अनुभव का हिस्सा रहा है, जो गढ़वा के लिए मददगार साबित हो सकता है. गढ़वा शहर में जाम की समस्या और निर्माणाधीन नेशनल हाईवे के प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करना भी चुनौती है. जमशेदपुर में उन्होंने जनता की समस्याओं के लिए त्वरित समाधान पोर्टल और जनसुनवाई को मजबूत किया था, जिसका लाभ अब गढ़वा के सुदूरवर्ती प्रखंडों जैसे चिनिया, रंका, बड़गड़ व भंडरिया के ग्रामीणों को मिलेगा. शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारी अधिकारी के रूप में पहचान शिक्षा के क्षेत्र में अनन्या मित्तल की पहचान नवाचारी अधिकारी के रूप में है. उन्होंने प्रोजेक्ट अन्वेषण के जरिए सरकारी स्कूलों के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का खाका तैयार किया था. गढ़वा जैसे जिले में, जहां ड्रॉप-आउट दर एक चुनौती है. प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि अनन्या मित्तल फाइलों के बजाय फील्ड पर भरोसा करने वाले अधिकारी हैं. चाईबासा में आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा और जमशेदपुर में शहरी विकास का संतुलन उन्होंने जो बनाया, वही संतुलन अब गढ़वा के विकास और उसकी भौगोलिक जटिलताओं में देखा जा सकता है.
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