हिंदी के महत्व और न्यायिक सेवा पर मंथन, गढ़वा में दो अधिवक्ताओं का सम्मान

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गढ़वा में अधिवक्ता परिषद के स्थापना दिवस और हिंदी दिवस पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज सेवा के लिए अधिवक्ताओं को सम्मानित भी किया गया।

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गढ़वा. अधिवक्ता परिषद जिला इकाई गढ़वा के तत्वावधान में सोमवार को अधिवक्ता परिषद का स्थापना दिवस सह हिंदी दिवस समारोह आयोजित किया गया. इस अवसर पर विचार गोष्ठी हुई. कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता परिषद के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार त्रिपाठी ने की.

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गरीबों को न्याय दिलाने में भूमिका पर चर्चा

वरीय अधिवक्ता सतीश कुमार मिश्रा ने कहा कि सात सितंबर 1992 को स्थापना के बाद से अधिवक्ता परिषद समाज के गरीब, मजदूर और विभिन्न वर्गों को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभा रही है. उन्होंने हिंदी दिवस के महत्व पर भी जानकारी दी.

अधिवक्ता परिषद के महामंत्री राकेश कुमार शुक्ला ने कहा कि परिषद समाज में व्याप्त असमानता के मुद्दों को लेकर हमेशा मुखर रही है. वरीय अधिवक्ता सच्चिदानंद शुक्ला, मनोज कुमार चतुर्वेदी, अजय शंकर तिवारी, अरविंद कुमार पांडे और राहुल ऋषि ने भी अपने विचार रखे. उन्होंने परिषद की ओर से किये जा रहे कार्यों और देश की आजादी से लेकर वर्तमान समय तक हिंदी की प्रासंगिकता पर चर्चा की.

दो अधिवक्ताओं को किया सम्मानित

वक्ताओं ने हिंदी को व्यापक रूप से बोली और समझी जाने वाली भाषा बताते हुए इसके प्रयोग और महत्व पर जोर दिया. कार्यक्रम में सत्यनारायण सिन्हा, मुकेश चौबे, सुजीत कुमार तिवारी, शुभम तिवारी, सतीश कुमार पांडे, बसंत राम, दिग्विजय कुमार, करुणानिधि तिवारी, संजय कुमार चौबे, पंचम कुमार सिंह, धर्मेंद्र तिवारी, किसलय तिवारी आदि ने भी विचार रखे.

इस अवसर पर सेवानिवृत्त फौजी के बाद अधिवक्ता के रूप में समाज सेवा कर रहे बलबीर चौधरी और राम लखन पांडे को अंगवस्त्र व माला पहनाकर सम्मानित किया गया.

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