हाथियों के उत्पात से दहशत में हैं ग्रामीण

Published at :16 Dec 2016 8:13 AM (IST)
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हाथियों के उत्पात से दहशत में हैं ग्रामीण

मेराल व डंडई के ग्रामीण कर रहे हैं रतजगा 200 बोझा धान नष्ट कर चुके हैं गढ़वा : डंडई व मेराल प्रखंड के विभिन्न गांवों में इन दिनों जंगली हाथियों का झुंड विचरण कर रहा है़ हाथियों के उत्पात की वजह से किसानों को काफी क्षति पहुंच रही है़ डंडई प्रखंड के लोरा, सिकरिया, नावाडीहा, […]

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मेराल व डंडई के ग्रामीण कर रहे हैं रतजगा

200 बोझा धान नष्ट कर चुके हैं

गढ़वा : डंडई व मेराल प्रखंड के विभिन्न गांवों में इन दिनों जंगली हाथियों का झुंड विचरण कर रहा है़ हाथियों के उत्पात की वजह से किसानों को काफी क्षति पहुंच रही है़ डंडई प्रखंड के लोरा, सिकरिया, नावाडीहा, मेराल प्रखंड के बानाजांघ आदि गांवों में 15 दिनों से हाथियों का उत्पात मचा हुआ है़

बानाजांघ के गजाधर सिंह के घर के बाहर खलिहान में रखे हुये 200 बोझा धान को हाथियों ने बर्बाद कर दिया है़ इसके पूर्व इसी गांव में एक अन्य किसान का सिंचाई पंप पलट कर हाथियों ने बर्बाद कर दिया है़ इससे 10 हजार रुपये की क्षति हुई है़ बानाजांघ गांव के रामसुनेर सिंह के घर के बाहर गुड़ बनाने के बर्तन को तोड़ दिया गया है़ जबकि बनारसी सिंह की चहारदीवारी तोड़ दी है़

डंडई प्रखंड के सिकरिया निवासी प्यारी सिंह का 20 बोझा धान, राजेंद्र कोरवा का मड़ई, नावाडीह गांव के अशर्फी पासवान के दर्जनों बोझा धान को भी हाथियों ने बर्बाद कर दिया है़ अशर्फी पासवान के खलिहान में हाथी पहुंचकर जब उत्पात मचाना शुरू किया तो पुआल के कुढ़ा में सो रहे अशर्फी पासवान को जान बचाने के लिए छुपना पड़ा. हाथियों ने उनकी चारपाई को तोड़ दिया है़

इसी गांव के पारा शिक्षक बनवारी पासवान के बाहर रखे ड्रम, कुर्सी, मोटरसाइकिल को हाथियों ने तोड़ दिया़ जबकि बुद्धि नारायण पासवान के खलिहान में रखे 50 किलो धान हाथी चट कर गये़ इसके अलावे खुनुरूआ कुंवर आदि ग्रामीणों के फसलों व सामानों को भी हाथियों ने नुकसान पहुंचा है़ ग्रामीणों ने बताया कि हाथी प्रतिदिन इन गांवों में पहुंच रहे हैं और ग्रामीणों का नुकसान कर रहे हैं.

हाथियों के झुंड में बच्चों सहित करीब छह की संख्या है़ रात मे उत्पात मचाने के बाद सुबह में हाथी जंगलों की ओर चले जा रहे हैं. हाथियों की दहशत की वजह से ग्रामीण न तो जंगल में अपने दिनचर्या के लिए कार्यों के लिए जा रहे हैं और न ही रात में घर से बाहर निकल रहे हैं. शाम सात बजते ही लोग घरों में दुबक जा रहे हैं. ग्रामीणों ने अपने फसलों व सामान की क्षतिपूर्ति की मांग वन विभाग से की है़

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