बिना लाइसेंस पत्थर का व्यापार जोरों पर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Dec 2016 7:39 AM (IST)
विज्ञापन

ग्रामीणों ने पकड़ा, लेकिन माफिया गाड़ी छुड़ाने में सफल रहा भवनाथपुर : भवनाथपुर वन क्षेत्र के कैलान जंगल से बड़े पैमाने पर पत्थर माफियाओं द्वारा अवैध पत्थर के धंधा का सिलसिला जारी है. बीते शनिवार की रात्रि को दो ट्रैक्टर द्वारा अवैध पत्थर ले जा रहे गाड़ी को ग्रामीणों ने रोका. लेकिन पत्थर माफिया गाड़ी […]
विज्ञापन
ग्रामीणों ने पकड़ा, लेकिन माफिया गाड़ी छुड़ाने में सफल रहा
भवनाथपुर : भवनाथपुर वन क्षेत्र के कैलान जंगल से बड़े पैमाने पर पत्थर माफियाओं द्वारा अवैध पत्थर के धंधा का सिलसिला जारी है. बीते शनिवार की रात्रि को दो ट्रैक्टर द्वारा अवैध पत्थर ले जा रहे गाड़ी को ग्रामीणों ने रोका.
लेकिन पत्थर माफिया गाड़ी छुड़ाकर भागने में सफल रहे. घटना के बाद कैलान के ग्रामीण दो गुटों में बंट गये. एक पत्थर माफिया के विरुद्ध, तो दूसरा पत्थर माफिया के पक्ष में. एक पक्ष थाने में पहुंच कर पत्थर माफिया के विरुद्ध कार्रवाई कि मांग कर रहा है. वहीं थाना प्रभारी गुप्तेश्वर तिवारी ने पत्थर माफिया के विरुद्ध आवेदन मिलने से इनकार किया है. समाचार के अनुसार भवनाथपुर वन क्षेत्र के कैलान जंगल से अवैध पत्थरों के धंधा तेजी से बढ़ता जा रहा है. शनिवार को रात्रि मे पत्थर माफिया दो ट्रैक्टर से पत्थर लेकर जा रहे थे की जंगल बचाओ समिति के सदस्यों ने झोक नाला के ऊपर पत्थर लदे ट्रैक्टर को रोक दिया. बताया गया दोनों ट्रैक्टर बरडीहा के कमलेश पाल तथा मोती पासवान का था. पत्थर माफियाओं की गाड़ी को रोकने के बाद थाना को फोन किया. इसी बीच कैलान गांव के ही दबंग लोग जो माफियाओं को सहयोगी है.
वे घटना स्थल पर पहुंच कर गाड़ी को समिति के सदस्यों से मुक्त करा दिया. इसके बाद दोनों तरफ से मारपीट की नौबत आ गयी. तब तक दलबल के साथ एएसआइ प्रकाश सिंह कैलान पहुंच गये. तब तक माफियाओं के सहयोगी भागने में सफल रहे. रविवार सुबह समिति के सदस्य थाने पहुंच कर लिखित आवेदन देकर माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की. लेकिन थाना प्रभारी ने किसी भी तरह का आवेदन मिलने से इनकार कर दिया.
क्या मामला है : ग्रामीण सूत्रों के अनुसार कैलान वन क्षेत्र से पिछले दो वर्ष से अवैध पत्थरों के धंधे का सिलसिला जारी है. कुछ माह पूर्व ग्रामीणों ने बैठक कर अवैध पत्थरों का तथा हरा लकड़ी काटने पर प्रतिबंध लगाया. इसी बीच सदस्यों की मिलीभगत से अवैध पत्थरों का धंधा गुप्त तरीका से चलता रहा और उससे मिली राशि आपस में लोग बांटते रहे.
सूत्रों के अनुसार आपसी लेन देन को लेकर विवाद हो गया और जंगल बचाने वाले दो ग्रुप में बंट गये और अपने अपने दम पर माफियाओं को सहयोग करने लगे. बताया जाता है प्रति ट्रैक्टर 400 रुपया लिया जाता है. बताते चलें कि जंगल काटने और लकड़ी की तस्करी करने वाले बरडीहा के कमलेश पाल को पिछले वर्ष टीपीसी के दस्ता ने लाठी डंडे से जम कर पिटाई कर दी थी. एक तरफ ग्रामीण जंगल बचाने कि कोशिश करते हैं, तो दूसरी तरफ वन विभाग के कर्मचारी माफियाओं से मिल कर जंगल की संपत्ति को अपने स्वार्थ के लिए बेचने में लगे हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




