मलेरिया से आदिम जनजाति के तीन बच्चों की मौत

Published at :17 Nov 2016 8:38 AM (IST)
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मलेरिया से आदिम जनजाति के तीन बच्चों की मौत

धुरकी (गढ़वा) : जिले के धुरकी प्रखंड के करवा पहाड़ गांव में मंगलवार की शाम आदिम जनजाति के दो बच्चों सहित तीन बच्चों की मौत बुखार से हो गयी. मृतकों में कृष्णा कोरवा की पुत्री अनिता कुमारी (12 साल), बाबूलाल परहिया की पुत्री रूपा कुमारी (डेढ़ साल) व शिव कुमार भुइंया की पुत्री सरिता कुमारी […]

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धुरकी (गढ़वा) : जिले के धुरकी प्रखंड के करवा पहाड़ गांव में मंगलवार की शाम आदिम जनजाति के दो बच्चों सहित तीन बच्चों की मौत बुखार से हो गयी. मृतकों में कृष्णा कोरवा की पुत्री अनिता कुमारी (12 साल), बाबूलाल परहिया की पुत्री रूपा कुमारी (डेढ़ साल) व शिव कुमार भुइंया की पुत्री सरिता कुमारी (छह साल) शामिल है.

मृतकों के परिजनों के अनुसार तीनों बच्चियां बुखार से पीड़ित थी. जांच में इनका मलेरिया पॉजिटिव निकला था़ अस्पताल में समुचित इलाज नहीं होने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ने लगी. चिकित्सकों ने उन्हें इलाज के लिए बाहर ले जाने की सलाह दी. परिजन पैसे के अभाव में बच्चों को इलाज के लिए बाहर नहीं ले पाये और गांव लौटने लगे. इसी क्रम में रास्ते में ही उनकी मौत हो गयी.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठने लगे सवाल : एक ही दिन गांव में तीन बच्चियों की बुखार से मौत होने पर स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर लोग सवाल उठा रहे हैं. आदिम जनजाति बहुल करवा पहाड़ मलेरिया जोन में चयनित है़ इसके पूर्व भी इस गांव में चार महीने में छह आदिम जनजातियों की मौत बीमारी से हुई थी़ उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा ने हर माह करवा पहाड़ गांव में नियिमित रूप से चिकित्सा शिविर लगाने का निर्देश दिया था़

हर माह लगता है स्वास्थ्य शिविर : प्रभारी

धुरकी के चिकित्सा प्रभारी डॉ दिनेश कुमार ने कहा कि करवा पहाड़ गांव में प्रत्येक माह मलेरिया कैंप लगाया जाता है़ गंभीर मरीजों को देखने के बाद उसे गढ़वा के लिए रेफर कर दिया जाता है़ बुधवार से वह करवा पहाड़ में कैंप कर रहे हैं.

डॉक्टर ने कहा कि जहां जाना है जाओ

कृष्णा कोरवा ने कहा कि बेटी अनिता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धुरकी में भरती कराया गया. जांच में मलेरिया निकला तो उसे गढ़वा रेफर कर दिया गया़ शुक्रवार को उसे गढ़वा सदर अस्पताल में भरती कराया गया. मंगलवार सुबह बेहोश हो गयी़ इसकी जानकारी चिकित्सक को दी. चिकित्सक ने कहा कि जहां जाना है, ले जाओ. बाहर इलाज कराने के पैसे नहीं थे़ वह अनिता को घर ला रहा था़ रास्ते में उसकी मौत हो गयी़

एंबुलेंस नहीं िमली, मरीज ने दम तोड़ा

शिवकुमार भुइंया ने कहा कि उसने बुखार होने पर बेटी सरिता को नगरउंटारी रेफरल अस्पताल में भरती कराया. स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सक ने बाहर ले जाने के लिए कहा. पैसे के अभाव में उसने डॉक्टरों से एंबुलेंस उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जब एंबुलेंस नहीं मिली तो वह मजबूरीवश सरिता को लेकर घर लौट रहा था़ रास्ते में ही सरिता ने दम तोड़ दिया़ ऐसा ही वाकया बाबूलाल परहिया की पुत्री रूपा के साथ भी हुआ़

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