बंधुआ की तरह पढ़ाई करती कस्तूरबा की 232 छात्राएं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jun 2016 6:35 AM (IST)
विज्ञापन

मझिआंव(गढ़वा) : बच्चियों को बेहतर सुविधाओं के साथ शिक्षा देने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की देश भर में शुरुआत हुई थी. वर्ष 2005 में मझिआंव में खुले कस्तूरबा विद्यालय में 232 बच्चियां पढ़ रही हैं. तीन कमरे के पुराने और जर्जर भवन में ये बच्चियां बंधुआ मजदूर की तरह रहती और पढ़ती […]
विज्ञापन
मझिआंव(गढ़वा) : बच्चियों को बेहतर सुविधाओं के साथ शिक्षा देने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की देश भर में शुरुआत हुई थी. वर्ष 2005 में मझिआंव में खुले कस्तूरबा विद्यालय में 232 बच्चियां पढ़ रही हैं. तीन कमरे के पुराने और जर्जर भवन में ये बच्चियां बंधुआ मजदूर की तरह रहती और पढ़ती हैं. जी हां, पुराने बीआरसी कार्यालय में चल रहे कस्तूरबा विद्यालय का एक कमरा दिन में इन छात्राओं के लिए क्लास और रात में आवास है.
एक कमरे में करीब 80 बच्चियां रहती हैं. कमरों में भी दरारें आ गयी हैं. ऐसा भी नहीं है कि कमरा बहुत बड़ा हो. 20X20 के एक कमरे में एक कमरे में 30 छात्राएं रह सकती हैं, लेकिन यहां 80 छात्राएं रहती हैं. गर्मी में छात्राएं विद्यालय की छत पर सो लेती हैं, लेकिन बरसात में सबसे ज्यादा समस्या होती है, क्योंिक यहां सरेआम सांप घूमते रहते हैं.
232 छात्राओं की सुरक्षआ भी एकमात्र चौकीदार के भरोसे है. इस भवन में दो शौचालय हैं, लेकिन दोनों में से किसी का इस्तेमाल नहीं होता. मजबूरन सभी छात्राओं को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है. चापानल भी एक ही है. छात्राओं को जमीन पर ही सोना पड़ता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




