महिलाएं अपनी शक्ति खुद पहचानें
Updated at : 20 Jun 2018 4:51 AM (IST)
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रूसा के तत्वावधान में एसएसजेएस नामधारी कॉलेज में हुआ कार्यक्रम गढ़वा : राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तत्वावधान में मंगलवार को स्थानीय एसएसजेएस नामधारी महाविद्यालय में महाविद्यालय स्तरीय एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. इसमें नारी सशक्तीकरण विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में गढ़वा उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा ने व्याखान दिया. व्याख्यानमाला का उद्घाटन […]
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रूसा के तत्वावधान में एसएसजेएस नामधारी कॉलेज में हुआ कार्यक्रम
गढ़वा : राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तत्वावधान में मंगलवार को स्थानीय एसएसजेएस नामधारी महाविद्यालय में महाविद्यालय स्तरीय एक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. इसमें नारी सशक्तीकरण विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में गढ़वा उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा ने व्याखान दिया. व्याख्यानमाला का उद्घाटन उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा व नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएन सिंह ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर व दीप प्रज्वलित कर किया. व्याख्यानमाला में बोलते हुए मुख्य वक्ता उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा ने कहा कि महिला जहां शक्ति के स्वरूप में जानी जाती है,
उसे सशक्त करने की क्या जरूरत है. यह नारी की सोच पर निर्भर करता है कि वे अपने आप को सशक्त मानती हैं या दुर्बल. श्रीमती अरोड़ा ने कहा कि महिला आज सशक्त हैं. नारी पूरे परिवार व घर को संभालती है. साथ ही उतने ही ऊर्जा से बाहर भी कार्य करती है. यह पुरुष नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि नारी को भगवान ने अंदर से मजबूत बनाया है. उसको अपनी शक्ति को खुद पहचाननी होगी. महिला भी अपना अधिकार के लिए लड़ती है. उपायुक्त ने कहा कि सामाजिक व मानसिक रूप से स्वतंत्रता जरूरी है. जबकि मनोवैज्ञानिक व आर्थिक स्वतंत्रता नारी जब चाहेंगी, तब हासिल कर लेंगी. उन्होंने कहा कि आज महिलाओं में आर्थिक रूप से स्वतंत्रता जरूरी है.
महिलाओं को सशक्त करने में पुरुषों की ज्यादा भूमिका है. व्याख्यान में श्रीमती अरोड़ा ने बाल विवाह को रोकने हेतु लोगों से सहयोग की अपील की. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएन सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि वह देश तब तक विकास नहीं कर सकता, जब तक उस देश की महिलाओं की भागीदारी नहीं होगी.
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण भारतीय परिपेक्ष्य में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है. खासकर भारत के लिए स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले भारत राजनीतिक रूप से विखंडित रहा. इस पूरे काल में हमारा समाज महिलाओं के प्रति दूसरा दृष्टि रखता था. वर्तमान परिपेक्ष्य में हमारा समाज पुरुष और महिलाओं के संतुलन के बिना नहीं चल सकता. अब जरूरत है कि एक संतुलन बनाये और साथ चलें. कुलपति ने कहा कि पुरुष महिलाओं को सहयोग करें,
तभी वह सही रूप में सशक्त होंगी. समाज की बाल विवाह, डायन प्रथा जैसी जो भी कुरीतियां हैं, इससे महिलाएं ज्यादा आक्रांत हैं. इसे दूर करना होगा. उन्होंने कहा कि समाज की कुरीतियों को मिल कर ठीक करना होगा. इसपर चिंतन करने की जरूरत है. महिलाओं को सबसे पहले शिक्षित करना होगा और इसमें प्रत्येक अभिभावक अपनी भूमिका सुनिश्चित करेंगे. कार्यक्रम का विषय प्रवेश प्रभारी प्राचार्य डॉ अखिलानंद पांडेय ने कराया, जबकि संचालन डॉ नथुनी पांडेय आजाद व प्रो आशीष कुमार वैद्य ने संयुक्त रूप से किया. धन्यवाद ज्ञापन प्रो नीता वर्मा ने किया.
प्राचार्य के पुस्तक का विमोचन
इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य श्री पांडेय द्वारा लिखित पुस्तक का उपायुक्त ने विमोचन किया. साथ ही कार्यक्रम में विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता में सफल प्रतिभागियों के बीच प्रशस्ति पत्र का वितरण किया गया. इस मौके पर पूर्व प्राचार्य प्रो भगवत राम यादव, गोपीनाथ सिंह कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ संयुक्ता सिंह, रूसा के संयोजक डॉ संत किशोर प्रसाद, डॉ रामकुमार प्रसाद ,डॉ लक्ष्मीनारायण मिश्र, डॉ कामेश्वर सिंह, डॉ आरबी आजाद, डॉ अजय प्रसाद, डॉ घनश्याम पांडेय, प्रो पुरुषोत्तम त्रिपाठी, डॉ अनिल वर्मा, प्रो जगदीश्वर पांडेय ,प्रो मनोज पाठक, डॉ वीरेंद्र यादव, डॉ सुवर्ण महतो, अविनाश पासवान, डॉ अर्चना कुमारी, डॉ अंजुला कुमारी आदि उपस्थित थे.
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