पाकिस्तान से भारत लायी गयी है मूकबधिर गीता, रंका के दंपती का दावा, गीता उनकी बेटी

Updated at : 08 Oct 2017 12:16 PM (IST)
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पाकिस्तान से भारत लायी गयी है मूकबधिर गीता, रंका के दंपती का दावा, गीता उनकी बेटी

रंका : पाकिस्तान से भारत लायी गयी गुड्डी उर्फ गीता नामक लड़की को रंका प्रखंड के बांदू गांव निवासी एक दंपती ने पुत्री होने का दावा किया है. विदित हो कि पिछले दिनों भारत सरकार विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तान से गीता नाम की एक मूकबधिर बच्ची को भारत लाया गया है़ तब से उसके मां-बाप […]

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रंका : पाकिस्तान से भारत लायी गयी गुड्डी उर्फ गीता नामक लड़की को रंका प्रखंड के बांदू गांव निवासी एक दंपती ने पुत्री होने का दावा किया है. विदित हो कि पिछले दिनों भारत सरकार विदेश मंत्रालय द्वारा पाकिस्तान से गीता नाम की एक मूकबधिर बच्ची को भारत लाया गया है़ तब से उसके मां-बाप की खोज की जा रही है़ लेकिन उसके मां-बाप का पता नहीं लगने के बाद फिलहाल उसे इंदौर की एक मूक बधिर संस्था के संरक्षण में रखा गया है़

बांदू निवासी विजय राम एवं माला देवी ने गढ़वा उपायुक्त से मिलकर गुड्डी को अपनी पुत्री बताते हुए उसे दिलाने की मांग की है. विजय राम के इस प्रकार के दावे के पश्चात उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा ने रंका एसडीओ जावेद अनवर इदरीसी को इसकी जांच का निर्देश दिया. इसके आलोक में शनिवार को एसडीओ ने गांव पहुंचकर लड़की के तथाकथित पिता विजय राम, मां माला देवी एवं गांववासियों से पूछताछ कर इस संबंध में जानकारी ली. सभी ने विजय राम की पुत्री होने की पुष्टि की.

लड़की की मां माला देवी ने बताया कि वह वर्ष 2008 में परिवार के साथ धान काटने बिहार के रोहतास जिला के कोचस थाना के कथराईं गांव गयी हुई थी. इस दौरान वहीं उसी गांव के सुमेर राम के पुत्र सुदेश्वर राम से गुड्डी की शादी करने की सहमति बन गयी. वर्ष 2008 में ही एक मार्च को गुड्डी की बारात बांदू गांव आयी थी और हिंदू रीति-रिवाज से उसका विवाह हुआ. माला देवी के मुताबिक, गुड्डी को ससुराल जाने के बाद उसे ससुराल वालों ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया़. इससे तंग आकर उसकी बेटी गुड्डी अगस्त 2008 में ससुराल से अचानक लापता हो गयी. उस समय उसकी पुत्री की उम्र 15वर्ष थी.


बेटी के लापता होने की सूचना देने उसका भसुर कैलाश राम बांदू आया था़ बेटी को गायब होने की सूचना के बाद उसे खोजने के लिये उन्होंने काफी प्रयास किया़, परंतु कहीं पता नहीं चला. इसके बाद उसने एक साल बाद उसके ससुरालवालों पर गढ़वा कोर्ट में दहेज प्रताड़ना का केस किया. यद्यपि वहां से कुछ कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद वे लोग थक हारकर घर बैठ गये.

विजय राम ने बताया कि दो अक्तूबर को मोबाइल व टीवी पर उन लोगों ने अपनी पुत्री गुड्डी को देखा. वह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ थी. देखते ही देखते पूरे गांव में इस बात का प्रचार हो गया़ सभी लोग गुड्डी को मोबाइल पर देखना शुरू कर दिये. माला देवी ने बताया कि गुड्डी बहरी व गूंगी है. वह बोल नहीं सकती है. बचपन का उसका नाम टुनी कुमारी था, लेकिन उसका भाई रौशन गुड्डी लिखना सिखाया था़ वह पढ़ी-लिखी नहीं है. वह मोबाइल पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की यह बात सुनकर गुड्डी को अपनी पुत्री होने की दावा किया है. गांववालों ने भी गुड्डी को ससुराल से लापता होने की बात की पुष्टि की़ मोबाइल पर लड़की को देख कर गांव वालों ने भी पहचान लिया. मोबाइल पर गुड्डी के होने की पहचान गांववासियों ने भी किया है.
विजय राम व माला देवी का फोटो व कागजात विदेश मंत्रालय भेजा जायेगा :एसडीओ : एसडीओ जावेद अनवर इदरीसी ने कहा कि खोयी हुई बच्ची वर्ष 2008 में अपने ससुराल रोहतास से गायब थी. वह किसी तरह पाकिस्तान में चली गयी थी.भारत सरकार विदेश मंत्रालय ने उक्त लड़की को अपने देश भारत में लाया है़ भारत सरकार के प्रचार-प्रसार का यह नतीजा है कि लड़की के माता पिता ने अपनी बेटी होने की दावा किया है. लड़की के माता पिता का फोटो व कागजात उपायुक्त के माध्यम से विदेश मंत्रालय भारत सरकार को भेजा जायेगा.लड़की को पहचानने के बाद उसके माता पिता को यहां से भेजा जायेगा.
इंदौर में एक संस्था के संरक्षण में रखी गयी है गुड्डी : विदित हो कि पाकिस्तान से लायी गयी लड़की का नाम गीता बताया गया है़ उसे पाकिस्तान में ही एक संस्था ने खोयी हुई बच्ची समझने के बाद परवरिश किया था और उसका नाम गीता रखा था़ दो साल के प्रयास के बाद गीता को भारत लाने के पश्चात विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्वयं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से गीता को पहचानने के लिये उसके परिजनों से अपील की है़

इस दौरान विदेश मंत्रालय में कई दंपती वहां पहुंचकर गीता को अपनी पुत्री को बताने का दावा किये थे़ किंतु गीता ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया था़ इसके बाद से गीता इंदौर में संचालित एक मूक-बधिर संस्था के संरक्षण में है. जहां उसे पढ़ाने के साथ सिलाई-कटाई का प्रशिक्षण लेकर स्वावलंबी बनाने का प्रयास किया जा रहा है़
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