East Singhbhum News : सबरों के पास न अलाव, न कंबल, बड़ी मुश्किल से कट रहीं सर्द रातें

आदिम जनजाति सबरों की ठंड में ठिठुर रही जिंदगी
गालूडीह.
घाटशिला प्रखंड में पारा धीरे-धीरे नीचे जा रहा है. सुबह व रात में ठंड बढ़ गयी है. घाटशिला प्रखंड के सबर बहुल गांवों में विलुप्त होती आदिम जनजाति सबरों की जिंदगी ठंड में ठिठुर रही है. सबर बहुल गांवों में न अलाव की व्यवस्था है, न सरकार की ओर से कंबल मिला है. सबरों के तन पर सही से कपड़े तक नहीं हैं. ऐसे में सर्द रातें मुश्किल से कट रही हैं. कोई देखने वाला नहीं है. पंचायत और प्रखंड में अभी सरकारी कंबल नहीं आया है. अब सबरों को समाजसेवियों पर भरोसा है.जंगल के भरोसे चल रही सबरों की जिंदगी
घाटशिला प्रखंड के दारीसाई, घुटिया, केशरपुर, हलुदबनी, धोडांगा, बासाडेरा समेत अन्य गांवों में काफी संख्या में सबर परिवार रहते हैं. सबर समाज के लोग सुबह उठकर जंगल जाते हैं. शाम को जंगल से लकड़ी, पत्ता, दतवन लेकर लौटते हैं. यही उनकी दिनचर्या है. शाम में जंगल से लायी गयी कुछ लकड़ियां जलाकर तापते हैं. रात भर फटे-पुराने कंबल ओढ़कर ठिठुरते हैं. अधिकतर सबर व बच्चों के तन पर सही से वस्त्र तक नहीं हैं.
सरकारी कंबल का इंतजार कर रहा सबर परिवार
गर्मी और बरसात में जितनी परेशानी नहीं होती है, उससे अधिक ठंड में होती है. सबर परिवार सरकार से कंबल मिलने का इंतजार कर रहे हैं. कई सबर पंचायत में जाकर कंबल मांगने लगे हैं. उन्हें बताया जा रहा अभी हाल ही में घाटशिला उपचुनाव खत्म हुआ है. कंबल अभी तक नहीं आया है. निराश होकर सबर पंचायत से लौट जा रहे हैं. हालांकि बढ़ती ठंड को देखते हुए कुछ सामाजिक संस्था मदद के हाथ बढ़ा रहे हैं. पर यह काफी नहीं है.
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