रुआशोल गांव की पत्थलगड़ी मामले में होगी कार्रवाई : सीओ

Updated at : 09 Jan 2018 5:46 AM (IST)
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रुआशोल गांव की पत्थलगड़ी मामले में होगी कार्रवाई : सीओ

स्थिति अनुरूप कार्रवाई होगी: सीओ धालभूमगढ़ : धालभूमगढ़ प्रखंड की पावड़ा-नरसिंहगढ़ पंचायत के रुआशोल ग्रामसभा गांव में रविवार को पत्थलगड़ी का आयोजन मामले में धालभूमगढ़ के अंचलाधिकारी हरिश्चंद्र मुंडा ने कहा कि वरीय पदाधिकारियों के दिशा निर्देश मिलने के बाद स्थिति अनुरूप कार्रवाई होगी. रुआशोल गांव में ग्राम सभा की ओर से शिलापट्ट करना सही […]

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स्थिति अनुरूप कार्रवाई होगी: सीओ

धालभूमगढ़ : धालभूमगढ़ प्रखंड की पावड़ा-नरसिंहगढ़ पंचायत के रुआशोल ग्रामसभा गांव में रविवार को पत्थलगड़ी का आयोजन मामले में धालभूमगढ़ के अंचलाधिकारी हरिश्चंद्र मुंडा ने कहा कि वरीय पदाधिकारियों के दिशा निर्देश मिलने के बाद स्थिति अनुरूप कार्रवाई होगी. रुआशोल गांव में ग्राम सभा की ओर से शिलापट्ट करना सही नहीं है. इस मामले में वरीय पदाधिकारियों का निर्देश का इंतजार किया जा रहा है.
महाल के जिला सचिव ने किया था शिलापट्ट का उद्घाटन
गौरतलब हो कि रुआसोल में नायके श्याम मुर्मू ने पारंपरिक ढंग से पूजा की थी. मुख्य अतिथि माझी परगना महाल के जिला सचिव सुफल मुर्मू ने शिलापट्ट का उद्घाटन किया.
इस दौरान हमारा गांव में हमारा, हमारा राज की नारेबाजी की. इसके बाद ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में सभा हुई. ग्राम सभा में सुफल मुर्मू ने कहा कि शिलापट्ट पर लिखी बातें एक संदेश है. समाज में जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है. गांव-गांव और जन- जन तक संविधान का अधिकार का बताया जा रहा है. जिस गांव की ग्राम सभा इच्छा जता रही है. उस गांव को माझी परगना महाल के दिशा निर्देश से अभियान चलाया जा रहा है. जनमत नहीं संविधान सर्वोपरी है. हमारा संविधान ग्राम सभा को महत्व देता है. ग्राम सभा अर्थ रूढ़ी प्रथा है. पत्थलगड़ी का कार्य 1996 से शुरू हुआ. इसके तहत जागरूक करने का कार्य सरकार को करना चाहिए था. वह कार्य ग्राम सभा कर रही है.
1935 के संविधान का 1950 का संविधान और दस्तावेज मिलान से पता चला. भारत के मालिक आदिवासी हैं और संविधान शब्द को समझना मुश्किल है.
विशिष्ट अतिथि के रूप में आदिवासी महासभा के केंद्रीय सचिव कृष्णा हांसदा, केंद्रीय उपाध्यक्ष मार्शल देवगम, जिला उपाध्यक्ष इंद्र मुर्मू, ग्राम प्रधान कोदाडीह, ठाकुर मुर्मू, नगेन टुडू, बासिया हेंब्रम ने सभा को संबोधित किया. सभा का संचालन लखन बेसरा ने किया. इस मौके पर पूर्ण सोरेन, सुकेश बास्के, अतिश मार्डी, रूपचांद मुर्मू, शांखो मुर्मू, फूलमनी बेसरा, सोनाली बेसरा, मुगली बेसरा, मानी मुर्मू, बसंती कर्मकार, प्रमीला कर्मकार, जोबा मुर्मू, कविता बेसरा, मालती बेसरा, लखी बेसरा, धानी बेसरा उपस्थित थे.
शिलापट्ट पर कई बातें उल्लेखित
रुआशोल में लगाये गये शिलापट्ट में कई बातें उल्लेखित हैं. ग्राम सभा की बिना अनुमति के कोई बाहरी ( गैर आदिवासी) गैर रूढ़ी प्रथा, व्यक्तिओं को गांव में स्वतंत्र रूप से भ्रमण करना, निवास करना, बस जाना, व्यवसाय, रोजगार, कारोबार करना प्रतिबंधित होगा. संसद या विधान मंडल का कोई भी सामान्य कानून लागू नहीं होगा.
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