लाल क्रांति का अंत, हरित क्रांति की दस्तक

Updated at : 21 Dec 2017 5:19 AM (IST)
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लाल क्रांति का अंत, हरित क्रांति की दस्तक

हरित क्रांति की दिशा में रंग ला रहा है एसएसपी एंड टीम का प्रयास 25 एकड़ खेत में वैज्ञानिक प्रणाली से खेती शुरू, 300 एकड़ का लक्ष्य नक्सली बंदी के दिन पुलिस ने बांटे पौधे, भयमुक्त होकर ग्रामीण घरों से निकले वैज्ञानिक पद्धति से खेती के लिए किसानों में है उत्सव सा माहौल गुड़ाबांदा : […]

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हरित क्रांति की दिशा में रंग ला रहा है एसएसपी एंड टीम का प्रयास

25 एकड़ खेत में वैज्ञानिक प्रणाली से खेती शुरू, 300 एकड़ का लक्ष्य
नक्सली बंदी के दिन पुलिस ने बांटे पौधे, भयमुक्त होकर ग्रामीण घरों से निकले
वैज्ञानिक पद्धति से खेती के लिए किसानों में है उत्सव सा माहौल
गुड़ाबांदा : ओड़िशा सीमा से सटे गुड़ाबांदा में 15 फरवरी 2017 को जियान के बनबेड़ा टोला निवासी इनामी नक्सली कान्हू मुंडा उर्फ अर्जुन और उसके साथियों के सरेंडर के साथ लाल क्रांति (नक्सलवाद) का प्रखंड से अंत हो गया. खासकर नक्सलियों की राजधानी कहे जाने वाले जियान गांव से नक्सलवाद ने अंतिम सांस ली. इसके बाद एसएसपी अनूप टी मैथ्यू एंड टीम के प्रयास से जियान गांव में हरित क्रांति ने दस्तक दी है. पुलिस के सहयोग से यहां के किसानों ने लगभग 25 एकड़ खेत में वैज्ञानिक प्रणाली से सब्जी और रबी फसल की खेती का आगाज किया.
नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित था जियान
जियान निवासी नक्सली प्रमुख कान्हू मुंडा और पुटू मुंडा के कारण गांव नक्सलियों का मुक्तांचल बना. वर्ष 2001 में यहां नक्सली बीज का रोपण हुआ. वहीं हत्याओं का दौर शुरू हुआ. तब यहां का हर चेहरा अनजान सा लगता था. कहा जाता था कि यह गांव बारूद की ढेर पर बसा है. नक्सलवाद की आग में सर्वाधिक नुकसान इसी गांव को उठाना पड़ा. 15 फरवरी को कान्हू मुंडा और उसके साथियों के सरेंडर के साथ एक नया सबेरा आया. अब पुलिस इस गांव में हरित क्रांति लाने के प्रयास में है.
हाथों में बंदूक उठाने वाले आज हल उठाने को व्याकुल
जिन हाथों ने कभी बंदूक उठायी थी. वे हाथ आज हल उठाने को व्याकुल हैं. खेती के मास्टर कहे जाने वाले पटमदा के किसानों ने यहां का दौरा कर जमीन देखी. कहा कि यहां की मिट्टी खेती के लायक है. बुधवार को कई किसानों ने एसएसपी से कहा कि सर हमें कुछ नहीं चाहिए. सिर्फ सिंचाई की व्यवस्था कर दें. हम खुद ही रोजगार प्राप्त कर लेंगे. दूसरों को रोजगार देंगे. नक्सली आरोप में जेल में बंद कई ग्रामीणों की पत्नियों के मन खेती के लिए डोल रहे हैं. इन महिलाओं ने एसएसपी से गुहार लगायी कि सर मेरे पतियों को रिहा करा दें. हम भी अपने पति के साथ खेती करेंगे. कुल मिला कर यहां कृषि का नया आयाम मिला है. यही हाल रहा तो यह गांव हरित क्रांति की एक नयी कहानी लिखेगा.
यहां 300 एकड़ में वैज्ञानिक तरीके से खेती के लिए पुलिस प्रयासरत है. यहां खेती के लिए परिस्थितियों अनुकूल हैं. फिलहाल 100 बीघा खेत में किसानों ने खेती शुरू कर दी है. सभी विभाग के पदाधिकारी सहयोग कर रहे है. सिंचाई की व्यवस्था की जा रही है. यहां के ग्रामीण भी खेती को लेकर काफी उत्साहित हैं.
अनूप टी मैथ्यू, एसएसपी, पूर्वी सिंहभूम.
1.8 करोड़ से चेकडैम बनाने की योजना है
बनबेड़ा टोला में नयी पद्धति से किसानों ने खेती शुरू की है. पुलिस सिंचाई की व्यवस्था करने में जुटी है. कृषि विभाग के पदाधिकारी किसानों को कृषि की नयी विधियां बता रहे हैं. किसानों ने लगभग 25 एकड़ से अधिक खेत में गेहूं और चना की खेती की है. गोभी, बैंगन, मिर्च के पौधे लगाये हैं. टपक विधि से सिंचाई हो रही है. सिंचाई सुविधा के लिए पुलिस के पदाधिकारी ग्रामीणों के साथ श्रमदान कर रहे हैं. यहां के नाला पर 1.8 करोड़ की लागत से चेकडैम बनाने की योजना है. पुलिस का प्रयास है कि यहां के किसान 300 एकड़ खेत में वैज्ञानिक पद्धति से खेती करें. इसके लिए किसानों ने आवेदन भी दिया है. सबसे खास बात यह है कि यहां के किसानों मेंं खेती करने की गजब की इच्छा शक्ति जगी है. खेती करने के लिए एक उत्सव सा माहौल बना है.
नक्सली बंदी के दिन कार्यक्रम कर प्रशासन ने दिया संदेश
यहां पुलिस व प्रशासनिक महकमा ने हरित क्रांति लाने की ठानी है. यही कारण है कि बुधवार को नक्सली बंदी के दिन पुलिस ने यहां आकर पौधा वितरण किया. ग्रामीण भी भयमुक्त होकर अपने घरों से निकले.
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