रानीश्वर पीएचसी में इलाज से पहले जलभराव की परीक्षा, पानी में चलकर पहुंच रहे मरीज
पीएचसी परिसर में तालाब जैसा नजारा व सड़क पर जमा पानी | Prabhat Khabar Network
रानीश्वर के आसनबनी पीएचसी परिसर में भारी बारिश के बाद तालाब जैसा नजारा रहता है.जल निकासी की व्यवस्था न होने से मरीजों, परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों को भारी परेशानी होती है.यह समस्या वर्षों से बनी हुई है, जिसका स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है.
संवाददाता, रानीश्वर. प्रखंड क्षेत्र के आसनबनी स्थित पीएचसी परिसर में भारी बारिश के बाद तालाब जैसा नजारा देखने को मिल रहा है. बारिश के पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पीएचसी के मुख्य गेट के सामने से लेकर पूरे परिसर में जलजमाव हो जाता है. इससे मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
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समस्या को लेकर कई बार अखबारों में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की जा चुकी है. स्वास्थ्य कर्मियों ने भी उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत की है, लेकिन इसके बावजूद अब तक जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है.
पीएचसी के साथ सड़क पर भी जमा रहता है पानी
पीएचसी परिसर के अलावा उसके सामने स्थित आसनबनी-हरिपुर सड़क पर भी जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है. भारी बारिश के बाद सड़क पर पानी जमा हो जाता है. इसी रास्ते से पीएचसी के अलावा मिडिल स्कूल, हाई स्कूल, मॉडल स्कूल, मिशन स्कूल और एक निजी स्कूल के छात्र-छात्राओं का आवागमन होता है.
बारिश के दिनों में बच्चों, मरीजों और आम राहगीरों को जमा पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है. इससे कभी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
पांच साल पहले बनी थी नाली, फिर भी नहीं मिली राहत
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब पांच साल पहले भारी बारिश के बाद इस समस्या को लेकर अखबार में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए पीएचसी से कुछ दूरी तक सड़क किनारे जल निकासी नाली निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किया था. ग्रामीण कार्य विभाग की देखरेख में नाली का निर्माण भी कराया गया.
लेकिन जहां तक जल निकासी के लिए नाली की वास्तविक जरूरत थी, वहां तक नाली का निर्माण नहीं कराया गया. नतीजा यह हुआ कि बारिश के दिनों में जलजमाव की पुरानी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है.
पीएचसी से लेकर आसपास के घरों तक पहुंचता है पानी
भारी बारिश होने पर पीएचसी परिसर, आसनबनी-हरिपुर सड़क और आसपास के घरों में भी पानी जमा हो जाता है. जल निकासी का रास्ता नहीं मिलने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है. इससे लोगों को आने-जाने में परेशानी के साथ-साथ गंदगी और मच्छरों के प्रकोप का भी सामना करना पड़ता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब स्थल की स्थिति का आकलन कर जरूरत के अनुसार पर्याप्त लंबाई और क्षमता वाली निकासी नाली का निर्माण कराया जाए.
सड़क ऊंची होने के बाद बढ़ी समस्या
ग्रामीणों के अनुसार पहले आसनबनी से शिकारीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़क ग्रामीण कार्य विभाग के अधीन थी. उस समय सड़क की ऊंचाई कम थी और पीएचसी के समीप जल निकासी के लिए एक पुलिया भी बनी हुई थी.
करीब सात-आठ वर्ष पहले सड़क का अधिग्रहण पथ निर्माण विभाग द्वारा किए जाने के बाद सड़क का चौड़ीकरण और ऊंचीकरण किया गया. इसके बाद से जल निकासी की समस्या और गंभीर हो गई. ग्रामीणों का कहना है कि पीएचसी के सामने जल निकासी के लिए बनी पुलिया के दक्षिणी हिस्से में जमाबंदी जमीन होने के कारण दोबारा पुलिया का निर्माण नहीं हो सका.
जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग से पहल की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग से मामले में पहल करने की मांग की है. उनका कहना है कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर वर्ष बारिश के मौसम में पीएचसी और आसपास के इलाके में जलजमाव की समस्या उत्पन्न होती है.
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लोगों ने मांग की है कि स्थल का निरीक्षण कर तकनीकी समाधान निकाला जाए और जल निकासी के लिए आवश्यक नाली या पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि मरीजों, स्कूली बच्चों, स्वास्थ्य कर्मियों और आम लोगों को परेशानी से राहत मिल सके.
क्या कहती हैं पीएचसी प्रभारी
पीएचसी आसनबनी की प्रभारी एएनएम गीता कुमारी ने बताया कि बारिश के मौसम में जब भी भारी बारिश होती है, परिसर में तालाब जैसा पानी भर जाता है. इससे मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों को काफी परेशानी होती है. उन्होंने बताया कि यह समस्या करीब छह-सात वर्षों से बनी हुई है और इसका स्थायी समाधान होना जरूरी है.
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