सिदो-कान्हू के नाम पर मेधावी छात्रों को मिलेगा सम्मान, पीजी विद्यार्थियों को 54 हजार तक स्कॉलरशिप

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एसकेएमयू में स्थापित अमर शहीद सिदो कान्हू की प्रतिमा. | Prabhat Khabar Network

SKMU में सिदो-कान्हू हूल स्मृति स्कॉलरशिप शुरू! पीजी छात्रों को 54 हजार तक, लैंगिक समानता को प्राथमिकता. जानें पात्रता और चयन प्रक्रिया.

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दुमका : सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (SKMU) की कुलपति प्रो कुनुल कांदिर ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल की है. हूल दिवस पर की गयी घोषणा के अनुरूप विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-28 से ‘सिदो-कान्हू हूल स्मृति मेरिट स्कॉलरशिप’ शुरू करने का प्रावधान किया जा रहा है. इसके तहत विश्वविद्यालय के पीजी विभागों में अध्ययनरत मेधावी विद्यार्थियों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धि के आधार पर स्कॉलरशिप दी जायेगी.

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मेधा के साथ लैंगिक समानता को प्राथमिकता

स्कॉलरशिप की खास बात यह है कि प्रत्येक पीजी विषय में दो विद्यार्थियों का चयन किया जायेगा. इनमें सर्वाधिक सीजीपीए हासिल करने वाले एक छात्र और एक छात्रा को स्कॉलरशिप मिलेगी. इस तरह विश्वविद्यालय ने मेधा के साथ लैंगिक समानता को भी महत्व दिया है. स्कॉलरशिप का आधार पूरी तरह शैक्षणिक प्रदर्शन रहेगा. आर्थिक स्थिति, श्रेणी या किसी अन्य आधार को चयन का मानदंड नहीं बनाया गया है.

पीजी छात्रों को मिलेंगे 54 हजार रुपये तक

नियमावली के अनुसार प्रथम वर्ष यानी पीजी सेमेस्टर-1 और 2 के लिए चयनित विद्यार्थी को कुल 24 हजार रुपये मिलेंगे. यह राशि 12-12 हजार रुपये की दो समान किस्तों में दी जायेगी. वहीं दूसरे वर्ष यानी सेमेस्टर-3 और 4 के लिए कुल 30 हजार रुपये की स्कॉलरशिप का प्रावधान है. यह राशि 15-15 हजार रुपये की दो किस्तों में दी जायेगी. दोनों वर्षों में चयनित रहने पर विद्यार्थी को कुल 54 हजार रुपये तक मिल सकते हैं.

हर साल नए सिरे से होगा स्कॉलरशिप चयन

पीजी प्रथम वर्ष के लिए चयन स्नातक की उस योग्यता परीक्षा में प्राप्त सीजीपीए के आधार पर होगा, जिसके आधार पर विद्यार्थी को पीजी में प्रवेश मिला है. वहीं दूसरे वर्ष की स्कॉलरशिप के लिए पीजी सेमेस्टर-2 परीक्षा में प्राप्त सीजीपीए को आधार बनाया जायेगा. इसका मतलब है कि प्रथम वर्ष में स्कॉलरशिप पाने वाला विद्यार्थी दूसरे वर्ष में स्वत: इसका हकदार नहीं होगा. दूसरे वर्ष में उसे निर्धारित शैक्षणिक मानदंड के आधार पर फिर से चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा.

75% उपस्थिति और अनुशासन जरूरी, तभी मिलेगी स्कॉलरशिप

स्कॉलरशिप के लिए विद्यार्थी का नियमित पूर्णकालिक छात्र होना जरूरी है. साथ ही कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी. बिना बैकलॉग के नियमित माध्यम से योग्यता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी ही पात्र होंगे. विद्यार्थी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं होनी चाहिए. प्रवेश के समय जारी चरित्र या आचरण प्रमाण पत्र छह माह तक ही मान्य रहेगा. अनुशासनात्मक कार्रवाई या विश्वविद्यालय के नियमों के उल्लंघन की स्थिति में विद्यार्थी स्कॉलरशिप के लिए अयोग्य हो सकता है.

विभागीय अनुशंसा के बाद कमेटी करेगी मेरिट की जांच

संबंधित पीजी विभाग के विभागाध्यक्ष पात्र विद्यार्थियों के नाम की अनुशंसा करेंगे. इसके साथ अंकपत्र या सीजीपीए विवरण, चरित्र प्रमाण पत्र, उपस्थिति रिकॉर्ड और अनुशासन संबंधी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा. इसके बाद प्रस्तावित मेरिट स्कॉलरशिप कमेटी अनुशंसाओं की जांच करेगी. कमेटी में तीनों संकायों के डीन तथा मानविकी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान संकाय से एक-एक विभागाध्यक्ष को रोटेशन के आधार पर शामिल किया जायेगा. समिति की स्वीकृति के बाद कुलसचिव द्वारा सूची जारी की जायेगी.

सिदो-कान्हू की विरासत से जुड़ेगी नई पीढ़ी की शिक्षा

1855 के ऐतिहासिक संताल हूल के महानायक सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू की स्मृति में शुरू की जा रही यह स्कॉलरशिप विश्वविद्यालय की पहल को खास बनाती है. हूल के नायकों के नाम पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने से विद्यार्थियों में बेहतर प्रदर्शन की प्रतिस्पर्धा और उच्च शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ने की उम्मीद है. यह पहल सिदो-कान्हू की विरासत को नई पीढ़ी की शिक्षा और उपलब्धियों से जोड़ने का भी प्रयास है


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