Lead News :श्रावणी मेला के पांचवें दिन बोल बम के नारों से गूंज उठा फौजदारी दरबार

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Lead News :श्रावणी मेला के पांचवें दिन बोल बम के नारों से गूंज उठा फौजदारी दरबार

बासुकिनाथ में 96789 कांवरियों ने मंदिर अरघा में जल डाला. “बोल बम ” और “हर हर महादेव ” के जयघोष से पूरा मेला क्षेत्र गूंज उठा.

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बासुकीनाथ. राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव 2025 के पांचवें दिन बासुकिनाथधाम में बाबा फौजदारीनाथ की आराधना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. “बोल बम ” और “हर हर महादेव ” के जयघोष से पूरा मेला क्षेत्र गूंज उठा. मंगलवार को तड़के 3:26 बजे जलार्पण की शुरुआत हुई और पूरे दिन श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा और माता पार्वती पर जल अर्पित करते रहे. मंदिर प्रबंधन के अनुसार, अब तक 96,789 कांवरियों ने बाबा के अरघा में जल अर्पित कर मनोकामना की. श्रद्धालुओं ने पहले शिवगंगा में स्नान किया, फिर अर्घा से जल अर्पित किया. 8,760 श्रद्धालुओं ने जलार्पण काउंटर का उपयोग किया, जहां जल पाइपलाइन द्वारा सीधे गर्भगृह में शिवलिंग पर पहुंचाया गया. पूरे परिसर में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए अधिकारी सतर्क थे.

10,87,299 रुपये की हुई आमदनी :

आर्थिक दृष्टिकोण से भी मंदिर को बड़ी आमदनी हुई. मंगलवार को मंदिर न्यास पर्षद को विभिन्न स्रोतों से कुल ₹10,87,299 की आय प्राप्त हुई. इसमें दानपेटियों से ₹2,36,160, गर्भगृह गोलक से ₹37,740 नकद और 430 ग्राम चांदी प्राप्त हुई. सारी गिनती सीसीटीवी और प्रशासनिक निगरानी में की गयी.

2500 कांवरियों ने उठाया शीघ्रदर्शनम का लाभ :

शीघ्रदर्शनम सुविधा के अंतर्गत 2,500 श्रद्धालुओं ने ₹300 प्रति कूपन की दर से जलार्पण किया, जिससे ₹7.5 लाख की आय हुई. श्रद्धालुओं को मंदिर कार्यालय से कूपन लेकर विशेष द्वार से गर्भगृह में प्रवेश की सुविधा दी गयी. इस व्यवस्था से श्रद्धालु काफी संतुष्ट दिखे.

छत्तीसगढ़ की कांवरिया मंडली ने अरघा में जल डाला :

छत्तीसगढ़ के विलासपुर की कांवरिया मंडली बाबा फौजदारीनाथ दरबार पहुंची. 25 सदस्यीय इस टोली का नेतृत्व कर रहे जयप्रकाश सिंह ने बताया कि शीघ्रदर्शनम का टोकन लेकर मंदिर अरघा में जल डाले. श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ पर जल डालकर सुख-समृद्धि की कामना की. भक्त संजीव कुमार, रंजीत यादव, मनोज सिंह आदि ने बताया कि पिछले सात वर्षों से सुल्तानगंज उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाकर बासुकिनाथ पहुंच कर जलार्पण करते रहे हैं. उत्तरवाहिनी गंगा से जल लाकर पहले बैद्यनाथधाम में पूजा-अर्चना किये, फिर बासुकिनाथ पहुंचकर सुगमतपूर्वक भोलेनाथ की पूजा की. कहा कि भोलेनाथ दयालु हैं. वे सबकी सुनते हैं. अरघा में जल डालने के बाद मंदिर प्रांगण में आरती की.

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