150 किमी की डगर, कांधे पर कांवर; बोल-बम के जयघोष से शिवमय हुआ बासुकिनाथ

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शिवगंगा में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network

लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से बासुकिनाथ तक 150 किमी की कांवर यात्रा पूरी कर बाबा फौजदारीनाथ पर गंगाजल चढ़ाते हैं. जानिए इस महायात्रा का महत्व.

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प्रतिनिधि, बासुकिनाथ. श्रावण मास में बासुकिनाथ धाम स्थित बाबा फौजदारीनाथ की महिमा और धार्मिक आस्था का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु इस पावन धाम पहुंचकर बाबा फौजदारीनाथ पर गंगाजल अर्पित करते हैं. कांवर यात्रा की इस पवित्र परंपरा में श्रद्धालुओं की यात्रा सुल्तानगंज से शुरू होती है, जहां उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर कांवरिये बाबा के दरबार की ओर पैदल रवाना होते हैं.

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सुल्तानगंज से बासुकिनाथ तक करीब 150 किलोमीटर की यात्रा कांवरिये ‘बोल-बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ पूरी करते हैं. कंधे पर कांवर और उसमें गंगाजल लेकर श्रद्धालु कठिन रास्तों को भक्ति और विश्वास के सहारे पार करते हैं. कांवरिया पथ पर श्रद्धालुओं की लंबी कतार और चारों ओर गूंजते बोल-बम के जयघोष से पूरा मार्ग शिवमय हो उठता है. थकान के बावजूद बाबा के दर्शन और जलार्पण की लालसा कांवरियों के कदमों को लगातार आगे बढ़ाती रहती है.

शिवगंगा में आस्था की डुबकी के बाद बाबा के दरबार में प्रवेश

बासुकिनाथ पहुंचने के बाद कांवरियों की आस्था सबसे पहले शिवगंगा से जुड़ती है. बाबा के दरबार में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालु शिवगंगा में स्नान कर स्वयं को शुद्ध करते हैं. आस्था और श्रद्धा के साथ शिवगंगा में डुबकी लगाने के बाद कांवरिये स्वच्छ वस्त्र धारण कर बाबा फौजदारीनाथ के मंदिर की ओर बढ़ते हैं.

इसके बाद पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सुल्तानगंज से लाए गए गंगाजल को बाबा फौजदारीनाथ के ज्योतिर्लिंग पर अर्पित करते हैं. जलार्पण के इस क्षण में कांवरियों की महीनों की तैयारी, कठिन यात्रा और तपस्या जैसे एक साथ फलित होती दिखाई देती है.

भगवा रंग में रंग जाता है पूरा बासुकिनाथ धाम


श्रावण मास में शिवगंगा घाट से लेकर मंदिर परिसर तक कांवरियों की अविरल भीड़ दिखाई देती है. भगवा वस्त्र पहने श्रद्धालुओं की लंबी कतार, हाथों में कांवर और जुबां पर बाबा के जयकारे बासुकिनाथ धाम की धार्मिक आस्था का जीवंत दृश्य प्रस्तुत करते हैं.

कांवरियों के जत्थे जैसे-जैसे बाबा के दरबार की ओर बढ़ते हैं, पूरा वातावरण ‘बोल-बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजता रहता है. सुल्तानगंज से देवघर और फिर बासुकिनाथ तक की यह यात्रा श्रद्धा, तपस्या और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है.

बासुकिनाथ मंदिर व शिवगंगा में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालुओं की भीड़ | Prabhat Khabar Network
बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ | Prabhat Khabar Network

एक माह में 32 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

श्रावणी मेला के दौरान एक माह में करीब 32 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के बासुकिनाथ पहुंचने का अनुमान रहता है. सावन के अलावा वर्षभर भी बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.

महाशिवरात्रि, बसंत पंचमी और भादो पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों पर भी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. यही वजह है कि बासुकिनाथ धाम वर्षभर आस्था, भक्ति और धार्मिक विश्वास के प्रमुख केंद्र के रूप में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है.


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