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दुमका : ठंड के मौसम में पर्यटकों को आकर्षित कर रहा दिगलपहाड़ी डैम

Updated at : 27 Dec 2023 11:57 AM (IST)
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दुमका : ठंड के मौसम में पर्यटकों को आकर्षित कर रहा दिगलपहाड़ी डैम

सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल के विभिन्न जगहों से पर्यटक पिकनिक मनाने आते हैं. इसके अलावा दुमका व आसपास के भी काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. स्थानीय लोग दिगलपहाड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं.

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दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के दिगलपहाड़ी जलाशय नए साल के लिए पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए तैयार है. धानभाषा पंचायत के दिगलपहाड़ी गांव के पास दो पहाड़ों के बीच जोरिया को मिट्टी से बांध कर डैम बनाया गया है. चारों ओर हरे-भरे घने जंगल हैं. दिगलपहाड़ी जलाशय प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों को लुभाता है. डैम के उत्तरी छोर पर पहाड़ के ऊपर वन विभाग का गेस्ट हाउस है. झारखंड की उपराजधानी दुमका से आसनबनी होते हुए दिगलपहाड़ी डैम के दूरी 37 किलोमीटर है. पश्चिम बंगाल के सिउड़ी से भी आसनबनी होते हुए दिगलपहाड़ी डैम की दूरी भी 37 किलोमीटर है. दुमका व सिउड़ी से आसनबनी आने के बाद चापुड़िया होते हुए तथा सिउलीबोना होते हुए दिगलपहाड़ी डैम पहुंचा जा सकता है. आसनबनी से दोनों ओर से ही डैम तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है. इसके अलावा बरमसिया रघुनाथपुर पथ के कदमा मोड़ से पहाड़पुर, कैराबनी होते हुए भी दिगलपहाड़ी डैम पहुंचा जा सकता है. पश्चिम बंगाल के मुरालपुर से सालतोला होते हुए भी दिगलपहाड़ी डैम पहुंचने के लिए पक्की सड़क है.

नए साल में पिकनिक मनाने पहुंचते हैं पर्यटक

यहां 25 दिसंबर बड़ा दिन से ही काफी संख्या में पर्यटकों का पहुंचना शुरू हो जाता है. लेकिन, नए साल में भारी संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते हैं. सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल के विभिन्न जगहों से पर्यटक पिकनिक मनाने आते हैं. इसके अलावा दुमका व आसपास के भी काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. स्थानीय लोग दिगलपहाड़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं. पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किये जाने से यहां साल भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहेगा.

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कैसे पहुंचें दिगलपहाड़ी डैम|How to Reach Digalpahadi Dam

  • दुमका से आसनबनी होते हुए दिगलपहाड़ी डैम पहुंच सकते हैं

  • दिगलपहाड़ी डैम की दूरी दुमका से महज 37 किलोमीटर है

  • पश्चिम बंगाल के सिउड़ी से आसनबनी होते हुए दिगलपहाड़ी डैम पहुंच सकते हैं

  • सिउड़ी से आसनबनी होते हुए दिगलपहाड़ी डैम जाएंगे, तो यह दूरी 37 किलोमीटर है

  • दुमका व सिउड़ी से आसनबनी आने के बाद चापुड़िया होते हुए तथा सिउलीबोना होते हुए दिगलपहाड़ी डैम पहुंच सकते हैं

  • आसनबनी से दोनों ओर से ही डैम तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है.

  • बरमसिया रघुनाथपुर पथ के कदमा मोड़ से पहाड़पुर, कैराबनी होते हुए भी दिगलपहाड़ी डैम पहुंच सकते हैं

  • पश्चिम बंगाल के मुरालपुर से सालतोला होते हुए भी दिगलपहाड़ी डैम पहुंच सकते हैं

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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