कोल टेस्टिंग बोरिंग के खिलाफ गरजे ग्रामीण, शिकारीपाड़ा में भाकपा माले की चेतावनी रैली
रैली में शामिल भाकपा माले के नेता व कार्यकर्तागण | Prabhat Khabar Network
कोल टेस्टिंग बोरिंग, एमओयू रद्द करने और आदिवासी अधिकारों की मांग को लेकर दुमका में भाकपा माले की चेतावनी रैली. ग्रामीणों का गुस्सा फूटा.
दुमका : कोल टेस्टिंग बोरिंग और आदिवासी ग्रामीणों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर भाकपा माले जिला कमेटी दुमका की ओर से मंगलवार को शिकारीपाड़ा में चेतावनी रैली निकाली गयी. रैली का नेतृत्व धनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव, केंद्रीय कमेटी सदस्य गीता मंडल एवं जिला संयोजक सह राज्य कमेटी सदस्य भुण्डा बास्की ने किया. रैली में शिकारीपाड़ा प्रखंड के बांकीजोर, बांसपहाड़ी एवं हीरापुर पंचायत के तेलांगापाड़ा, बादलपाड़ा, कल्याणपुर, खड़ीजोल समेत करीब दो दर्जन गांवों के लगभग एक हजार लोग शामिल हुए.
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मिशन स्कूल से शुरू हुई रैली
रैली शिकारीपाड़ा मिशन स्कूल के सामने से शुरू होकर शिकारीपाड़ा-रामपुरहाट मुख्य मार्ग से होते हुए इंटर कॉलेज के समीप पहुंची, जहां सभा में तब्दील हो गयी. सभा की अध्यक्षता भुण्डा बास्की ने की, जबकि संचालन एक्टू के प्रदेश अध्यक्ष सुभाषचंद्र मंडल ने किया.
सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कोल टेस्टिंग बोरिंग कार्य तत्काल बंद करने, निजी कंपनियों के साथ किये गये एमओयू रद्द करने तथा आदिवासी महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में कार्रवाई की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने शिकारीपाड़ा के अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी के खिलाफ भी नारेबाजी की. उन्होंने जल, जंगल और जमीन पर अधिकार तथा ग्राम सभा के अधिकारों की रक्षा की मांग उठायी.

पांच सूत्री मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
सभा के बाद भाकपा माले की ओर से उपायुक्त के नाम पांच सूत्री मांग पत्र शिकारीपाड़ा प्रखंड विकास पदाधिकारी एजाज अहमद को सौंपा गया. मांग पत्र में कहा गया है कि बांकीजोर, बांसपहाड़ी एवं हीरापुर पंचायत के 11 मौजा में ग्राम सभा की लिखित अनुमति के बिना एचपीजीसीएल हरियाणा की कोल परियोजना के लिए कराये जा रहे कोल टेस्टिंग बोरिंग कार्य को तत्काल बंद किया जाए.
दूसरी मांग में तेलंगापाड़ा निवासी आदिवासी महिला मीकू टुडू के साथ कथित मारपीट एवं दुर्व्यवहार के मामले में अंचल अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गयी है.
मांग पत्र में छह ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को भी निरस्त करने की मांग की गयी. भाकपा माले का आरोप है कि जमीन से जुड़े आंदोलन के कारण ग्रामीणों पर झूठे मुकदमे दर्ज किये गये हैं. इसके अलावा शिकारीपाड़ा क्षेत्र में निजी कंपनियों के साथ किये गये सभी एमओयू रद्द करने तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की निजी जमीन एवं घरों के सामने लगाये गये पार्टी के झंडे कथित रूप से हटाये जाने के मामले में कोल परियोजना के महाप्रबंधक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गयी.
आदिवासी अधिकारों की रक्षा का उठाया मुद्दा
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिकारीपाड़ा क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और यह क्षेत्र दामिन-ई-कोह के नाम से भी जाना जाता है. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन एवं खनिज संसाधनों पर कॉरपोरेट कंपनियों का कब्जा कराने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने ग्राम सभा के अधिकारों का सम्मान करने तथा स्थानीय लोगों की सहमति के बिना किसी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं चलाने की मांग की.
सभा को सिंदरी के विधायक चंद्रदेव महतो, धनवार के पूर्व विधायक राजकुमार यादव, केंद्रीय कमेटी सदस्य गीता मंडल, नंदिता भट्टाचार्य, पलटन हांसदा, बाबूलाल राय, सुरेश मुर्मू, सुनील राणा, सोमलाल मिर्धा एवं मधेश्वर सोरेन समेत अन्य नेताओं ने संबोधित किया. मौके पर संन्यासी हेंब्रम, रामेश्वर टुडू, बैकुंठ शर्मा, मीकू टुडू समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.
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