सुर्खियों में है परमिट देने के नाम पर उगाही का मामला
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 Dec 2016 7:43 AM (IST)
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दुमका : संतालपरगना क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार द्वारा बसों और ट्रकों को परमिट देने के नाम पर राशि वसूली का मामला सुर्खियों में है. मुख्यमंत्री जनसंवाद में भी यह मामला पहुंचा है. इस मामले में परिवहन व्यवसायी सुरेश प्रसाद साह ने पिछले महीने शिकायत की थी, जिस पर दो दिन पूर्व ही सुनवाई हुई थी और […]
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दुमका : संतालपरगना क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार द्वारा बसों और ट्रकों को परमिट देने के नाम पर राशि वसूली का मामला सुर्खियों में है. मुख्यमंत्री जनसंवाद में भी यह मामला पहुंचा है. इस मामले में परिवहन व्यवसायी सुरेश प्रसाद साह ने पिछले महीने शिकायत की थी, जिस पर दो दिन पूर्व ही सुनवाई हुई थी और विभागीय सचिव को मामले में कड़ी कार्रवाई के आदेश दिये गये थे.
मामले में विभागीय सचिव केके खंडेलवाल ने प्राधिकार के सचिव कार्तिक कुमार प्रभात को मुख्यालय भी बुलाया था और रिपोर्ट देने को कहा था. मुख्यमंत्री जनसंवाद में शिकायतकर्ता सुरेश प्रसाद साह ने शिकायत की थी कि 27 सितंबर 2016 को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में बैठक हुई, बावजूद परमिट निर्गत नहीं किये जा रहे हैं. श्री साह के मुताबिक उक्त बैठक में 250 बस तथा 180 ट्रकों का परमिट स्वीकृत किया गया था और उसके बाद 29 अक्तूबर 2016 को परमिट तैयार भी कर दिया गया था, पर ये परमिट जारी नहीं किये गये. उनका यह भी आरोप था कि प्रति वाहन 18000 रुपये की मांग की जा रही थी. लेन-देन करके ही 15-20 बसों का परमिट निर्गत कर दिया गया तथा शेष से भी परमिट निर्गत करने के एवज में इतनी ही राशि की मांग की जा रही है. शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कराते हुए आवेदकों को परमिट निर्गत कराने की मांग की थी.
मनमाने ढंग से होता रहा है काम
संतालपरगना क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार में पैसे का खेल चलता रहा है. इसमें एक रैकेट भी काम करता है, जो पैसे की बदौलत परमिट दिलाने का काम करता है. यही वजह है कि सही कागजात व उचित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने वालों को परमिट मिलने में परेशानी होती है, जबकि पैसे देकर गलत कागजात की बदौलत भी परमिट हासिल कर लिये जाते हैं. कुछ दिन पूर्व ही प्राधिकार के कार्यालय में छुट्टी के दिन परमिट संबंधी कार्य का निष्पादन ऐसे लोगों को करते देखा गया था, जो सेवानिवृत्त तक हो चुके है और जिनकी उस कार्यालय में तूती बोलती रही थी.
आरटीए सचिव ने कहा
परमिट को लेकर जो आरोप लगाये गये हैं, वे निराधार हैं. मैं रांची में ही हूं. विभाग को रिपोर्ट दे चुका हूं. 250 बसों का परमिट जारी होना था. 119 को परमिट जारी कर दिया गया है. बाकी 15 में कमीश्नर की अनुशंसा की प्रत्याशा है. कुल 71 लंबित हैं. वह भी कार्यालय स्तर से लंबित नहीं रखे गये हैं. कुछ दस्तावेजों की कमी थी यथा टैक्स, इंश्योरेंस. वहीं ट्रकों के परमिट में 210 के विरुद्ध 20 स्वीकृत किये जा चुके हैं. बाकी में कागजात की कमी थी. संबंधित पक्ष को नोटिस भी किया गया है और उसको एनआइसी के बेवसाइट पर भी डाला गया है.
– कार्तिक कुमार प्रभात, आरटीए सेकरेट्री
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