राज्य के 28 आदिवासी विधायक नहीं कर सकते हित की रक्षा तो दें इस्तीफा

Published at :19 Dec 2016 4:52 AM (IST)
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राज्य के 28 आदिवासी विधायक नहीं कर सकते हित की रक्षा तो दें इस्तीफा

प्रदर्शन . एसपीटी-सीएनटी मुद्दा को लेकर जन जागरण यात्रा पर निकले सालखन मुर्मू, कहा टीएसी में भी सीएम रघुवर दास को छोड़ 20 में 19 आदिवासी, सभी कर रहे धोखा आदिवासी बहुल राज्य में हो रहा हितों से खिलवाड़ नहीं करेंगे बरदास्त दुमका : जेडीपी प्रमुख सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा है कि […]

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प्रदर्शन . एसपीटी-सीएनटी मुद्दा को लेकर जन जागरण यात्रा पर निकले सालखन मुर्मू, कहा

टीएसी में भी सीएम रघुवर दास को छोड़ 20 में 19 आदिवासी, सभी कर रहे धोखा
आदिवासी बहुल राज्य में हो रहा हितों से खिलवाड़ नहीं करेंगे बरदास्त
दुमका : जेडीपी प्रमुख सह पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा है कि राज्य में एसपीटी-सीएनटी में संशोधन के संदर्भ में विरोध के नाम पर ही केवल विरोध हो रहा है. विरोध करने वाले लोग इस मुद‍्दे को सुलझाना नहीं चाहते, चुनाव तक ले जाना चाहते हैं. चुनाव में भंजाने की तैयारी कर रहे हैं, पर सुझाव नहीं दे रहे हैं. 12 दिसंबर को भगवान बिरसा की धरती उलिहातू से जनजागरण अभियान पर निकले सालखन मुर्मू परिसदन में बातचीत में कहा कि इस गंभीर मुद‍्दे पर समाधान के लिए 81 विधायकों में से आरक्षित सीट पर निर्वाचित 28 आदिवासी विधायकों को समाधान करना होगा. उन्हें मिलकर आदिवासी हितों की रक्षा करनी होगी.
अगर वे ऐसा नहीं कर सकते, तो उन्हें सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें संवैधानिक संकट तैयार कर सरकार भी गिरा देनी चाहिए और टीएसी भी भंग करा देनी चाहिए. श्री मुर्मू ने कहा कि टीएसी में 20 में 19 सदस्य आदिवासी हैं. केवल एक गैर आदिवासी सदस्य मुख्यमंत्री रघुवर दास हैं. सभी आदिवासी सदस्य आदिवासियों के साथ धोखा कर रहे हैं. कहा कि वे न तो कोई खून बहाने की बात कह रहे हैं और न ही तीर चलाने की. वे इस जनजागरण अभियान के तहत लोगों को उस विभीषण को पहचानने की बात कह रहे हैं, उससे सवाल करने की बात लोगों से कहने जा रहे हैं, जो उनके घर में है. उन्होंने कहा कि मुद्रा केंद्रित नहीं मुद‍्दा केंद्रित राजनीति होनी चाहिए. पक्ष-विपक्ष नहीं जनपक्ष को आज जेपी आंदोलन की तरह गोलबंद होने की जरूरत है. श्री मुर्मू ने कहा कि 14 साल के दौरान इस राज्य में आदिवासी ने ही नेतृत्व किया, पर उसने कभी भाषा-संस्कृति को पठन-पाठन का आधार नहीं बनाया. सरना धर्मकोड नहीं बनाया. जो अपने आप में काफी दुभार्ग्यपूर्ण है.
भोगनाडीह में 22 को समाप्त होगी यात्रा
जेडीपी प्रमुख सालखन मुर्मू ने कहा कि जनजागरण अभियान के तहत झारखंडी सत्याग्रह मोटरसाइकिल रैली बिरसा की धरती उलिहातू से शुरू होकर 22 दिसंबर को संताल हूल के अमर नायक सिदो कान्हू की जन्मस्थली भोगनाडीह में संपन्न होगी. जामताड़ा से दुमका पहुंचने के बाद रविवार को रात्रि विश्राम के बाद 19 को वे सभी पाकुड़, 20 को पाकुड़ से गोड‍्डा, 21 को गोड‍्डा से साहिबगंज तथा 22 को साहिबगंज से भोगनाडीह पहुंचकर यात्रा का समापन करेंगे.
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