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आरोपित की मां-बहन के बाद पिता ने भी सदमे में गंवायी जान

मामला आदिवासी युवती संग गैंगरेप पुलिस कस्टडी में आरोपित ने पिता का किया अंतिम संस्कार दुमका कोर्ट : दुमका मुफस्सिल थाना क्षेत्र में छह माह पूर्व छह सितंबर 2017 की देर शाम आदिवासी युवती के संग उसके पुरुष मित्र के सामने हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना के मामले में जेल में एक आरोपित अलबेनुस हांसदा […]

मामला आदिवासी युवती संग गैंगरेप पुलिस कस्टडी में आरोपित ने पिता का किया अंतिम संस्कार

दुमका कोर्ट : दुमका मुफस्सिल थाना क्षेत्र में छह माह पूर्व छह सितंबर 2017 की देर शाम आदिवासी युवती के संग उसके पुरुष मित्र के सामने हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना के मामले में जेल में एक आरोपित अलबेनुस हांसदा की गिरफ्तारी के सदमे ने पहले मां की जान ले ली, बाद में बड़ी बहन की और अब पिता की. मिली जानकारी के मुताबिक घटना के तीसरे ही दिन अलबिनुस सहित 16 आरोपित गिरफ्तार किये गये थे. अलबिनुस भी अन्य आरोपितों के साथ सेंट्रल जेल भेज दिया गया था.
बेटे के जेल जाने के सदमे ने मां-बाप और बहन को इतना झकझोर कर रख दिया था. बारी-बारी से तीनों की जान चली गयी. पिता का अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं था, ऐसे में परिजनों की सूचना पर चतुर्थ अपर जिला व सत्र न्यायाधीश एसएन मिश्रा के न्यायालय में अलबिनुस का केस लड़ रहे उनके अधिवक्ता सैयद हसन सनोबर ने आवेदन दिया, जिसके आधार पर न्यायालय ने उसे पुलिस कस्टडी में पिता के अंतिम संस्कार के लिए जाने की अनुमति दे दी.
पुलिस कस्टडी में अलबिनुस पिता के कब्र में मिट्टी देने के लिए अपने गांव गया.
13-14 मार्च को पिता आये थे कोर्ट: गैंगरैप मामले में शुरू से ही अपने इकलौते पुत्र को गलत तरीके से फंसाये जाने की बात कहने वाले बुदय हांसदा मुकदमे की सुनवाई के दौरान हर तारीख को कोर्ट पहुंचते थे. 13 एवं 14 मार्च को भी गवाही के दौरान वे कोर्ट पहुंचे थे. जहां बेटे को देख बुदय की आंखें छलक गयीं थी. अलबिनुस ही परिवार में इकलौता कमाने वाला सदस्य था. बुदय बेटे के ऐसे संगीन जुर्म में जेल जाने तथा उसके बाद पत्नी और बेटी को खो देने के बाद बिल्कुल ही टूट चुका था. अलबिनुस के जेल जाने के एक महीने के अंदर उसकी मां की मृत्यु हो गयी थी, जबकि दो महीने बाद बड़ी बहन की जान चली गयी.
पीड़िता के बयान के बाद बढ़ गयी थी चिंता: 13-14 मार्च को अलबिनुस के पिता बुदय हांसदा कोर्ट आये थे. इन दोनों दिनों में जब पीड़िता का बयान दर्ज किया जा रहा था. तब बुदय हांसदा ने गवाही सुनी थी. पीड़िता ने न्यायालय में सभी अभियुक्तों की संलिप्तता के बारे में न्यायालय को बताया था. अधिवक्ता सैयद हसन सनोबर ने बताया कि गवाही के बाद से ही बुदय हासदा काफी चिंतित थे. कोर्ट से वे घर जाकर सो गये. जब सबेरे उन्हें जगाया गया, तो देखा गया कि उनकी मृत्यु हो चुकी है.
पिता के अंतिम संस्कार के समय अलबिनुस ने बताया कि छह सितंबर को फुटबॉल मैच का कार्ड छापने के लिए वह लक्ष्मी प्रेस गये थे. जहां नौ बजे रात तक वह था. वह इस दौरान यही कह रहा था कि उसे इस मामले में क्यों फंसाया गया, वह समझ नहीं पा रहा.
Prabhat Khabar Digital Desk
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