वेदांता स्टील प्लांट मामले में डुमरी विधायक जयराम महतो ने किया सरेंडर, कोर्ट से मिली जमानत

डुमरी विधानसभा के विधायक जयराम महतो. फाइल फोटो.
डुमरी विधायक जयराम महतो ने वेदांता स्टील प्लांट आंदोलन से जुड़े मामले में धनबाद की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया. अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया है. यह मामला मजदूरों के आंदोलन और सड़क जाम से जुड़ा है.
धनबाद से परमेश्वर प्रसाद बारी की रिपोर्ट
Bokaro News: झारखंड के बोकारो जिले के सियालजोड़ी स्थित वेदांता स्टील प्लांट आंदोलन से जुड़े मामले में डुमरी विधायक सह झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा (जेएलएम) के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो ने शुक्रवार को धनबाद स्थित एमपी-एमएलए न्यायालय में आत्मसमर्पण किया. इसके बाद उन्होंने अदालत में जमानत याचिका दाखिल की. मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत में हुई. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने विधायक जयराम महतो को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
विशेष न्यायाधीश की अदालत में हुई सुनवाई
जयराम महतो ने शुक्रवार को एमपी-एमएलए मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालय में सरेंडर किया. उनकी ओर से अधिवक्ता चंचल बनर्जी ने जमानत याचिका पर पक्ष रखा. बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि विधायक का मामले से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और उन्हें राजनीतिक एवं परिस्थितिजन्य कारणों से आरोपी बनाया गया है. राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक सत्येंद्र कुमार राय ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अदालत से इसे खारिज करने की मांग की. हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जयराम महतो को जमानत देने का फैसला सुनाया.
नवंबर 2023 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी
यह मामला 27 नवंबर 2023 को बोकारो जिले के सियालजोड़ी थाना में दर्ज कांड संख्या 118/23 से जुड़ा है. रवि कुमार आनंद की शिकायत पर जयराम महतो, पार्वती चरण महतो, रथु महतो, सुभाष महतो तथा अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वेदांता स्टील प्लांट में मजदूरों के आंदोलन के दौरान जयराम महतो की तस्वीर वाले बैनर और पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया गया. इस प्रदर्शन के कारण वेदांता फोर लेन सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिससे वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हुआ और कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.
मजदूर आंदोलन से जुड़ा है पूरा मामला
प्राथमिकी के अनुसार, आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में मजदूर प्लांट के बाहर एकत्र हुए थे. प्रदर्शन के कारण सड़क जाम होने से औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और परिवहन व्यवस्था बाधित हो गई. शिकायतकर्ता ने इसे सुनियोजित आंदोलन बताते हुए कई लोगों को नामजद किया था, जिनमें जयराम महतो का नाम भी शामिल था. इसी मामले में पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और मामला बाद में न्यायालय में विचाराधीन हो गया.
पहले बोकारो कोर्ट में चल रही थी सुनवाई
शुरुआत में इस मामले की सुनवाई बोकारो सिविल कोर्ट के जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में चल रही थी. बाद में जनप्रतिनिधि से जुड़ा मामला होने के कारण इसे एमपी-एमएलए मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया. इसके बाद से इस प्रकरण की सुनवाई धनबाद स्थित विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत में हो रही है.
पहले भी अदालत में पेश हो चुके हैं जयराम महतो
इस मामले में जयराम महतो इससे पहले 18 जुलाई 2025 को भी अदालत में पेश हुए थे. उस समय उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था कि उनका इस आंदोलन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था. उन्होंने दावा किया था कि जिस दिन प्रदर्शन हुआ, उस दिन वह आंदोलन स्थल पर मौजूद ही नहीं थे. जयराम महतो ने यह भी कहा था कि प्रदर्शनकारियों ने उनके फोटो वाले बैनर का इस्तेमाल किया, जिसके आधार पर उन्हें इस मामले में फंसा दिया गया. उनका कहना था कि केवल तस्वीर का इस्तेमाल होने से किसी व्यक्ति की संलिप्तता सिद्ध नहीं हो जाती.
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आगे भी जारी रहेगी न्यायिक प्रक्रिया
अदालत से जमानत मिलने के बाद जयराम महतो को फिलहाल राहत मिल गई है, लेकिन मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है. आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा. इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है, क्योंकि यह एक विधायक और बड़े औद्योगिक परियोजना से जुड़े मजदूर आंदोलन का मामला है.
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By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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