धनबाद में सामान्य से 63 फीसदी कम हुई बारिश, 80 फीसदी से अधिक बिचड़े जले, अब तक जीरो प्रतिशत धनरोपनी

Updated at : 31 Jul 2023 1:22 PM (IST)
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धनबाद में सामान्य से 63 फीसदी कम हुई बारिश, 80 फीसदी से अधिक बिचड़े जले, अब तक जीरो प्रतिशत धनरोपनी

धनबाद में कुल 43000 हेक्टेयर भूमि पर खेती का लक्ष्य निर्धारित है. 40000 हेक्टेयर के लिए बिचड़ा लगाया गया है. लक्ष्य के विरुद्ध 80 प्रतिशत बिचड़ा लगा है

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आधा सावन बीत चुका है. इस मॉनसून धनबाद जिले में सामान्य से 63 फीसदी कम बारिश हुई है. अपेक्षित बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है. कहें तो सूखे की आहट साफ दिख रही है. पानी के अभाव में अब तक एक फीसदी भी धनरोपनी नहीं हुई है. खेतों में डाले गये 80 फीसदी से अधिक बिचड़े जल चुके हैं. किसानों की चिंता दूर करने के लिए कृषि विभाग वैकल्पिक फसलों की खेती की तैयारी कर रहा है. वैसे यहां के किसान अच्छी बारिश की अब भी उम्मीद लगाये बैठे हैं. रविवार को प्रभात खबर की टीम ने विभिन्न प्रखंडों में धनरोपनी का जायजा लिया. अधिकांश स्थानों पर खेतों में बिचड़े पीले पड़ते दिखे.

43000 हेक्टेयर में धनरोपनी का लक्ष्य

जिले में कुल 43000 हेक्टेयर भूमि पर खेती का लक्ष्य निर्धारित है. 40000 हेक्टेयर के लिए बिचड़ा लगाया गया है. लक्ष्य के विरुद्ध 80 प्रतिशत बिचड़ा लगा है. धान की रोपनी जून माह में शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक शुरू नहीं हुई है. समय निकलता जा रहा है. अब तक जिन खेतों में बिचड़ा लगाये गये हैं, वे बारिश नहीं होने की वजह से सूख रहे हैं.

यही कारण है आने वाले दिनों में रोपनी करने पर भी धान की पैदावार अच्छी नहीं हो पायेगी. जिला कृषि पदाधिकारी शिव कुमार राम ने कहा कि किसानों ने खेती की तैयारी के लिए रोहिणी नक्षत्र प्रवेश करने के साथ बिचड़ा लगाने का कार्य शुरू कर दिया था. लेकिन यह बिचड़ा गर्मी के कारण जल गया. जून माह में फिर से बिचड़ा डाला, लेकिन कम बारिश के कारण इस बार भी बिचड़ा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.

क्या हाल है प्रखंडों का

बलियापुर वर्ष 2022 में भी सूखे की चपेट में आया था. किसानों का कहना है कि कम पानी होने से तालाब सूखने लगे हैं. धान की तो बात छोड़िये, सब्जी की खेती भी नहीं कर पा रहे हैं. निरसा के दक्षिण क्षेत्र यानी केलियासोल प्रखंड कृषि पर आश्रित है. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 15 अगस्त तक बारिश नहीं होती है तो वैकल्पिक खेती के रूप में मूंग, मूंगफली, उरद, कुरथी व मक्के की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जायेगा. अगर राज्य सूखा घोषित होता है तो 31 अगस्त से 30 सितंबर तक फसल राहत योजना का फॉर्म किसानों से भराया जायेगा. टुंडी प्रखंड में किसान खेतों की जुताई तक नहीं कर पा रहे हैं. तोपचांची प्रखंड के किसानों का कहना है कि पिछले साल 17 अगस्त के बाद बारिश हुई थी.

मेघा बरसे, तो बने बात

जून माह में सामान्य वर्षापात 205.3 एमएम होनी चाहिए थी, लेकिन सिर्फ 48.8 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गयी. जुलाई माह में अब तक 241.5 एमएम बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन अभी तक लगभग 80 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गयी है.

सूखे की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा योजना तैयार की गयी है. इसके तीन वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए अनुदान पर किसानों को सूखारोधी नस्ल का बीज उपलब्ध कराया जायेगा. विभिन्न पैक्साें के माध्यम से बीज का वितरण होगा. राज्य सरकार से अनुमति मिलने के साथ ही पैक्सों के माध्यम से बीज का वितरण शुरू हो जायेगा.

शिव कुमार राम, जिला कृषि पदाधिकारी

बारिश के अभाव में वैकल्पिक खेती के लिए जिला मुख्यालय रिपोर्ट भेजी गयी है. वैकल्पिक तौर पर मकई, मूंगफली व मूंग की खेती के लिए प्रयास चल रहा है.

देवेंद्र नाथ, सहायक तकनीकी प्रबंधक, बलियापुर

धनबाद में अब तक धनरोपनी जीरो प्रतिशत है. तीन दिन पूर्व इस संबंध में सरकार को रिपोर्ट भेज दी गयी है. फिलहाल तीन दिनों तक झारखंड में बारिश की संभावना है.

ललित कुमार दास, वरीय वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, बलियापुर

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