Dhanbad News : सदर अस्पताल समेत आठ सीएचसी, 28 पीएचसी व 137 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में लगेंगे सोलर पैनल

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Dhanbad News : सदर अस्पताल समेत आठ सीएचसी, 28 पीएचसी व 137 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में लगेंगे सोलर पैनल

Dhanbad News : जेरेडा ने शुरू किया साइट निरीक्षण, मुख्य सचिव के निर्देश के बाद लिया गया निर्णय.

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धनबाद, सदर अस्पताल समेत जिले के आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और 137 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे. राज्य के मुख्य सचिव द्वारा अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त करने के निर्देश के बाद यह निर्णय लिया गया है. जेरेडा की टीम ने शुक्रवार से विभिन्न अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों का साइट निरीक्षण शुरू कर दिया है. भवनों की छत, बिजली लोड, बैकअप क्षमता और तकनीकी आवश्यकताओं का आकलन किया जा रहा है.

अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट तैयार होने के बाद चरणबद्ध तरीके से सोलर पैनल लगाया जायेगा. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अस्पतालों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गयी है. सोलर पैनल लगाने की जिम्मेदारी झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (जेरेडा) को सौंपी गयी है. वहीं जिला अस्पताल और अनुमंडल अस्पतालों में दो अलग-अलग स्रोतों से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का जिम्मा जेबीवीएनएल को दिया गया है.

वर्तमान में कई केंद्रों में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में जिले के कई स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. ऐसे में बिजली कटौती के कारण इलाज, टीकाकरण, जांच और दवा भंडारण जैसी सेवाएं प्रभावित होती रही हैं. विशेष रूप से रात में परेशानी ज्यादा होती है.

कटौती के बाद भी सेवाएं रहेंगी बहाल

सदर अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में बिजली पर निर्भर कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं. इनमें ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, लेबर रूम, पैथोलॉजी जांच, वैक्सीन स्टोरेज, ऑपरेशन थिएटर और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं. सोलर पैनल लगने के बाद बिजली बाधित होने की स्थिति में भी आवश्यक सेवाएं जारी रखी जा सकेंगी.

सोलर पैनल लगने से होंगे यह फायदे

बिजली कटौती के दौरान भी अस्पतालों में जरूरी सेवाएं बाधित नहीं होंगी, वैक्सीन और दवाओं के कोल्ड चेन सिस्टम को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी, अस्पतालों का बिजली खर्च कम होगा और ऊर्जा की बचत होगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा प्रदूषण में कमी आएगी, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में रात के समय इलाज की सुविधा बेहतर होगी व इमरजेंसी सेवाओं, प्रसव कक्ष और जांच केंद्रों का संचालन अधिक सुचारु हो सकेगा.

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Anand Kumar Upadhyay

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