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बीसीसीएल.रंगदारी टैक्स = ” 111,96,00,000 का नुकसान !

धनबाद : रंगदारों के सिंडिकेट के कारण बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल की मुराइडीह, शताब्दी, नदखरकी, बेनीडीह, जमुनिया, जोगीडीह, महेशपुर, खरखरी व जोगीडीह कोलियरी से ऑफर निकालने के बावजूद कोयला की बिक्री नहीं हो पा रही है. इससे बीसीसीएल को प्रतिमाह 9,33,00,000 और सालाना करीब 111,96,00,000 रुपये का नुकसान हो रहा है. बगल के कुसुंडा एरिया […]

धनबाद : रंगदारों के सिंडिकेट के कारण बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल की मुराइडीह, शताब्दी, नदखरकी, बेनीडीह, जमुनिया, जोगीडीह, महेशपुर, खरखरी व जोगीडीह कोलियरी से ऑफर निकालने के बावजूद कोयला की बिक्री नहीं हो पा रही है. इससे बीसीसीएल को प्रतिमाह 9,33,00,000 और सालाना करीब 111,96,00,000 रुपये का नुकसान हो रहा है. बगल के कुसुंडा एरिया में ऑफर का शत-प्रतिशत कोयला बुक हो रहा है.
नौ कोलियरियों से प्रतिमाह 60,000 टन का ऑफर : बताते हैं कि बाघमारा क्षेत्र स्थित इन नौ कोलियरियों से प्रतिमाह बीसीसीएल व इसीएल के लिंकेज होल्डरों के लिए औसतन 60,000 टन का ऑफर प्रबंधन द्वारा निकाला जाता है, लेकिन औसतन 15 प्रतिशत कोयला ही बुक हो रहा है, जबकि कुसुंडा एरिया से प्रतिमाह औसतन 47,000 टन कोयला का ऑफर निकाला जाता है अौर शत-प्रतिशत कोयला बुक भी हो जाता है. ऐसे में बीसीसीएल प्रबंधन को लिंकेज का कोयला पावर प्लांटों को बेचना पड़ रहा है.
क्या है मामला : बताते हैं कि बाघमारा क्षेत्र में अवस्थित बीसीसीएल मुराइडीह, शताब्दी, नदखरकी, बेनीडीह, जमुनिया, जोगीडीह, महेशपुर, खरखरी व जोगीडीह कोलियरी में रंगदारों के एक सिंडिकेट का कब्जा है. जो भी लिंकेज होल्डरों इन कोलियरियों से कोयला की खरीदारी करते हैं, उन्हें ‘रंगदारों के सरदार’ को प्रति टन 1150 रुपये की रंगदारी बतौर लोडिंग देनी पड़ती है. इस कारण इन कोलियरियों में ऑफर के कोयला के खरीदार नहीं मिल रहे हैं और लिंकेज का कोयला बीसीसीएल प्रबंधन को पावर प्लांटों को कम दामों पर बेचना पड़ रहा है. कुसुंडा एरिया में लिंकेज होल्डरों को लोडिंग के रूप में मात्र 150 रुपये प्रति टन देना पड़ता है. इस कारण यहां ऑफर के 100 प्रतिशत कोयला की बिक्री हो रही है.
50 प्रतिशत लिंकेज होल्डर नहीं करते खरीदारी
बताते हैं कि लिंकेज कोयला की खरीदारी के लिए बीसीसीएल व इसीएल के करीब 125 लिंकेज होल्डर (भट्ठा मालिक) लिस्टेड हैं. लेकिन रंगदारों के सिंडिकेट के डर और 1150 रुपये की रंगदारी नहीं देने के कारण करीब 50 प्रतिशत लिंकेज होल्डर खरीदारी में हिस्सा तक नहीं लेते. बचे 50 प्रतिशत होल्डर एफएसए (फ्यूल सप्लाई) एग्रीमेंट से बाहर होने के डर से भाग लेते हैं, लेकिन कोयला की खरीदारी जितनी मात्रा में होनी चाहिए, उतनी खरीदारी नहीं करते.
रंगदारी की कमान गुप्ता बंधु के हवाले
बताते हैं कि रंगदारों के सिंडिकेट के सरदार ने सिंडिकेट की कमान गुप्ता बंधु के हवाले की हुई है. यही लिंकेज होल्डरों से रंगदारी के पैसे की वसूली करते हैं. वह भी डंके की चोट पर. इतना ही नहीं, जो भी लिंकेज होल्डर कोयला का डीओ लगाते हैं. उन्हें कोयला की ट्रांसपोर्टिंग के लिए क्षेत्र के रंगदारों के सरदार द्वारा िचह्नित पेट्रोल पंप से ही पेट्रोल लेना पड़ता है अन्यथा ट्रक लोडिंग नहीं होती.
केंद्र व राज्य सरकारों को प्रतिवर्ष 63,78,00,000 रुपये टैक्स का नुकसान
बताते हैं कि बाघमारा क्षेत्र में प्रतिमाह लगभग 50,000 टन लिंकेज कोयला की बिक्री नहीं हो पा रही है. यानी साल का करीब 6,00,000 टन. केंद्र व राज्य सरकारों की बात करे तो लिंकेज होल्डरों द्वारा प्रति टन कोयला पर करीब 1063 रुपये टैक्स देते हैं. ऐसे में केंद्र व राज्य सरकारों को प्रतिमाह 53,15,000 रुपये व सालाना करीब 63,78,00,000 रुपये का नुकसान हो रहा है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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