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सरकारी बीएड केंद्रों के प्रति नहीं रहा आकर्षण

4 Nov, 2015 9:17 am
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सरकारी बीएड केंद्रों के प्रति नहीं रहा आकर्षण

धनबाद: अंगीभूत डिग्री कॉलेजों में संचालित बीएड केंद्रों के प्रति अब वह आकर्षण नहीं रहा. फीस में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेवार कॉलेज या विवि के बजाय बीएड कोर्स का बदला स्वरूप व इस संबंध में सरकार की नीति है. जमीनी सच्चाई यह है कि स्व वित्त पोषित (सेल्फ फाइनांस) इस कोर्स के लिए जो फीस […]

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धनबाद: अंगीभूत डिग्री कॉलेजों में संचालित बीएड केंद्रों के प्रति अब वह आकर्षण नहीं रहा. फीस में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेवार कॉलेज या विवि के बजाय बीएड कोर्स का बदला स्वरूप व इस संबंध में सरकार की नीति है. जमीनी सच्चाई यह है कि स्व वित्त पोषित (सेल्फ फाइनांस) इस कोर्स के लिए जो फीस घोषित किया गया है, उससे कम पर कोर्स का संचालन तब तक संभव ही नहीं है, जब तक सरकार इस संबंध में अंगीभूत बीएड कॉलेज को इस कोर्स के लिए अतिरिक्त अनुदान दे या फिर अंगीभूत डिग्री कॉलेजों को रियायत वाली सरकारी दर पर चलाया जाये. झारखंड में चार संस्थान है जो सरकारी दर पर चल रहे हैं, वहां तुलना में फीस काफी कम है. यह संस्थान रांची, देवघर, हजारीबाग में गवर्मेंट टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के नाम संचालित है.

जोखिम अभी भी बरकरार : निजी बीएड केंद्रों के बराबर की फीस देकर अब बीएड केंद्रों में पढ़ाई करने में रिस्क भी है. फिलहाल एनसीटीइ ने इन केंद्रों को अपनी स्थिति को ठीक( एनसीटीइ की गाइडलाइन पर सुधार) करने के लिए एक साल का जीवन दान जरूर दिया है, लेकिन जोखिम अभी भी बरकरार है. सरकारी तंत्र के आधार पर एनसीटीइ की अर्हता पूरी न करने की स्थिति में अंगीभूत केंद्रों पर संकट भी उत्पन्न हो सकता है. जबकि निजी बीएड केंद्र इस मामले में स्वयं निर्णय के लिए स्वतंत्र है. अंगीभूत केंद्र आधारभूत संरचना, स्थायी शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मी सहित अन्य संसाधन के लिए सरकार के ऊपर निर्भर है.

पहले की स्थिति : सेल्फ फाइनांस कोर्स पहले भी था, लेकिन कोर्स एक वर्ष का था तथा कोर्स के संचालन के लिए खर्च अब की तुलना में काफी कम था. अंगीभूत कॉलेज एक ‍वर्षीय कोर्स में 35 हजार रुपये प्रति स्टूडेंट्स शुल्क पर भी बेहतर ढंग से संचालित हो जाता था. वजह यह थी कि उस समय 21 से 22 हजार रुपये के मानदेय पर शिक्षक काम करते थे. एक यूनिट(100स्टूडेंट्स) में केवल 7 टीचर से ही काम चल जाता था. नन टीचिंगव आधारभूत संरचना के लिए भी वह मारा-मारी नहीं थी. अब दो वर्षीय कोर्स की फीस 1 लाख 31 हजार 200 रुपये हो गयी है.

क्या है नयी स्थिति : अब कोर्स दो वर्षीय हो गया है. इसमें एनसीटीइ की गाइडलाइन के अनुसार एक यूनिट यानी 100 स्टूडेंट्स पर 15 शिक्षक (फैकल्टी) तथा 7-8 नन टीचिंग रखना है. छठा पुनरीक्षित वेतनमान पर बहाल फैकल्टी 15,600 के बेसिक पर जिनकी प्रतिमाह वेतन कुल मिला कर 55 हजार होगा. यह राशि कॉलेज के उपर साढ़े आठ लाख प्रति माह प्रति शिक्षक होती है. एक प्राचार्य जो प्राचार्य न भी हो तो उसकी अर्हता प्राचार्य स्तर का हो उनका वेतन प्रति माह एक लाख होगा. यानी शिक्षक पर साढ़े नौ लाख प्रतिमाह के अलावा नन टीचिंग का खर्च अतिरिक्त रुप से. यह राशि वार्षिक 1 करोड़ 26 लाख होती है. जबकि एक कॉलेज में अगर पूरा 100 नामांकन भी हो जाये तो स्टूडेंट्स से आमद राशि 1 करोड़ 31 लाख रुपये होती है. शेष बचे पांच लाख अन्य संसाधनों पर खर्च होंगे.

सेल्फ फाइनांस पर राशि कम करना संभव नहीं
विभावि के डीन एजुकेशन प्रो. पी शेखर का कहना है कि सेल्फ फाइनांस पर इससे कम फीस पर कोर्स चलाना किसी भी संस्थान के लिए संभव नहीं है. सिदो-कान्हू विवि 88 हजार पर दो वर्षीय कोर्स का संचालन कैसे करेगा, यह वही जाने. विभावि फीस में कमी कर अर्हता में कमी करके नामांकित स्टूडेंट्स के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर सकता.

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