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दीपक वर्मा हत्याकांड में चार को उम्रकैद की सजा

30 अप्रैल 09 को फिरौती के लिए अपहरण कर की गयी थी हत्या धनबाद : भौंरा निवासी बरतन व्यवसायी मोहन वर्मा के पुत्र दीपक वर्मा का अपहरण कर फिरौती के लिए हत्या कर दिये जाने के मामले में गुरुवार को अपर जिला व सत्र न्यायाधीश 11 सचींद्र कुमार पांडेय की अदालत ने बेलाल अंसारी, बिरजू […]

30 अप्रैल 09 को फिरौती के लिए अपहरण कर की गयी थी हत्या
धनबाद : भौंरा निवासी बरतन व्यवसायी मोहन वर्मा के पुत्र दीपक वर्मा का अपहरण कर फिरौती के लिए हत्या कर दिये जाने के मामले में गुरुवार को अपर जिला व सत्र न्यायाधीश 11 सचींद्र कुमार पांडेय की अदालत ने बेलाल अंसारी, बिरजू भुइयां, मुन्ना खान व ताजुद्दीन शाह उर्फ चामू को भादवि की धारा 364 ए व 120 बी में उम्रकैद व दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी. सजायाफ्ताओं को जेल भेज दिया गया. फैसला सुनाये जाने के वक्त एपीपी ब्रजेंद्र प्रसाद सिंह अदालत में मौजूद थे. अदालत ने 6 जुलाई 15 को आरोपियों को दोषी करार दिया था.
क्या है मामला : भौंरा अस्पताल मोड़ स्थित मनोहर मार्केट में दीपक वर्मा की बरतन की दुकान थी. 30 अप्रैल 09 को जब वह अपनी दुकान पर था, तभी उसके साथी ने फोन कर उसे बुलाया. फोन आने के बाद दीपक अपनी हीरो होंडा मोटरसाइकिल (जेएच 10क्यू-8222) से निकला.
लेकिन देर रात जब वह घर नहीं लौटा, तब उसके पिता ने उसकी तलाश शुरू की. कहीं भी पता नहीं चलने पर मोहन वर्मा ने जोड़ापोखर थाना में अज्ञात के खिलाफ कांड संख्या 96/09 दर्ज कराया.
इसी बीच दीपक के मोबाइल नंबर 9835309993 से अज्ञात लोगों ने फोन कर दीपक के पिता मोहन वर्मा से पांच लाख रुपये फिरौती की मांग की. उक्त रकम को नियामतपुर पेट्रोल पंप के सामने लाकर देने को कहा गया. केस के आइओ उमेश राम ने अनुसंधान के बाद जलालुद्दीन व हसनैन को पकड़ा, जिसने घटना का राज खोला. उसने अपने सहयोगी के रूप में ताजुद्दीन शाह, मुन्ना खान, बेलाल अंसारी व बिरजू भुइयां का नाम बताया. पुलिस ने ताजुद्दीन को पकड़ कर पूछताछ शुरू की. पूछताछ में वहटूट गया. ताजुद्दीन की निशानदेही पर पुलिस ने वाइ क्वार्टर पहाड़ की तलहटी से दीपक का नरकंकाल बरामद किया.
केस के आइओ श्री राम ने 2 नवंबर 11 को ताजुद्दीन शाह ,जलालुद्दीन, हसनैन राजा, बेलाल अंसारी, मुन्ना खान, बिरजू भुइयां, अजीत सिंह, विकास बाउरी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र समर्पित किया. फिलहाल अजीत सिंह, विकास बाउरी व हसनैन राजा फरार है. अभियोजन की ओर से एपीपी ने आठ गवाहों का परीक्षण कराया.
पिता ने कहा : फांसी मिलनी चाहिए थी
फोटो-9जेएच-मोहन वर्मा
भौंरा. फैसले के बाद मृतक दीपक के पिता मोहन वर्मा ने कानून पर भरोसा जताया. साथ ही कहा कि आरोपियों को उम्रकैद नहीं ,फांसी की सजा होनी चाहिए थी. इन छह सालों में हमारा परिवार तिल तिल कर जिया है.
उसका अनुमान कोई नहीं लगा सकता है. उन्होंने फरार आरोपी विकास दास, बबलू यादव, अजीत सिंह को तत्काल गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की . कहा कि सभी को फांसी की सजा मिलेगी, तभी पूरे परिवार को शांति मिलेगी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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