धनबाद : धनबाद कोल बोर्ड इंप्लाइज को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड में भारी पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की गयी है. लेन-देन में करोड़ों का घोटाला किया गया है. टेस्ट ऑडिट रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. रविवार को यूनियन क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष अरविंद सिंह, अध्यक्ष विजय कुमार सिंह, पूर्व कोषाध्यक्ष उमा चरण यादव व रामनारायण प्रसाद ने यह आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कोल बोर्ड को-ऑपरेटिव सोसायटी के छह हजार सदस्यों के पैसे की बंदरबांट की गयी है. जो दोषी हैं उन पर एफआइआर की जाये व समिति से तत्काल निलंबित किया जाये.
क्यों आवश्यकता पड़ी टेस्ट ऑडिट की : कोल बोर्ड को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन 1966 में हुआ. सोसायटी में लगभग छह हजार सदस्य हैं. सोसायटी की जमा पूंजी लगभग साठ करोड़ है. वर्ष 2015 की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर पूर्व सचिव अमरेंद्र कुमार चौधरी, पूर्व सचिव निरंजन कुमार राय व कोषाध्यक्ष रंजन सिन्हा पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. निबंधन सहयोग समिति के निर्देश पर वर्ष 2016 में फिर ऑडिट टीम बहाल की गयी. वर्ष 2011-16 की ऑडिट कराया जाना था.
अंकेक्षक सुरेश प्रसाद के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गठित की गयी. लेकिन टीम को कागजात उपलब्ध नहीं कराया गया. लिहाजा सहायक निबंधक सहयोग समिति ने सोसायटी के खातों पर रोक लगा दी. 10 नवंबर 2016 को ज्वाइंट रजिस्ट्रार के निर्देश पर अंकेक्षक पुरुषोत्तम शर्मा को बहाल किया किया गया. श्री शर्मा ने ऑडिट किया. लेकिन वर्तमान अध्यक्ष विजय सिंह ने श्री शर्मा के ऑडिट पर ऑब्जेशन करते हुए रजिस्ट्रार से पुन: ऑडिट कराने की मांग की.
रजिस्ट्रार के निर्देश पर टेस्ट ऑडिट कराया गया. अनुमंडल अंकेक्षण पदाधिकारी सहयोग समिति बोकारो केदान नाथ चौधरी व प्रभारी जिला अंकेक्षण पदाधिकारी सहयोग समितियां जामताड़ा अखिलेश कुमार लाल कर्ण ने टेस्ट ऑडिट किया. टेस्ट ऑडिट में उपरोक्त वित्तीय अनियमितता सामने आयी.
क्या है ऑडिट रिपोर्ट में
2011-16 की अवधि में डे बुक के आधार पर जमा खर्च बही नहीं लिखा गया.
2014-15 में कंप्यूटर एसेसरीज 11 लाख, 26 हजार 929 रुपये में खरीदे गये. जांच अंकेक्षण को 4 लाख 80 हजार रुपये का अभिश्रव प्रस्तुत नहीं किया गया.
स्टेशनरी मद में 5 लाख 68 हजार रुपये का व्यय किया गया. स्टेशनरी खरीद में कई एक बहियों की खरीदारी अविश्वसनीय है.
मृत स्कंद बही उप स्थापित नहीं की गयी.
2015-16 में इलेक्शन व्यय, सीसीटीवी कैमरा, एडवांस डायरी सप्लाइ एवं ट्रेवलिंग भत्ता को समाहित किया गया, जो अनुचित है.
2015-16 में लीगल व्यय मद में 40 हजार रुपये का व्यय किया गया है जिसका अभिश्रव जांच दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया.
31.3.2012 में पावना सूद की व्यवस्था 14 लाख की गयी थी. परंतु 31.3.2013 के लाभ हानि खाता में गत वर्ष पावना सूद व्यवस्था की समाप्ति 41 लाख रुपये से की गयी.
समिति द्वारा वर्ष 2015-16 में फेडरेशन लेवी मद में 15 लाख रुपये का भुगतान दिखलाकर 31 मार्च 2016 को फेडरेशन लेवी देय को कम किया गया. परंतु वास्तव में उक्त राशि का भुगतान नहीं हुआ. समिति ने उक्त भुगतान दिखलाकर अपने शेष रोकड़ को कम कर गबन किया जो लेखांकन में त्रुटि एवं वित्तीय अनुशासनहीनता को दर्शाता है.
सोसायटी सेविंग बैंक एकाउंट के माध्यम से वृहद पैमाने पर करोड़ों में नगद लेन-देन किया गया. उक्त खाताओं में लेन-देन में जमा से अधिक भुगतान दिखाकर गबन कर लिया गया. सहायक बहियों को देखने पर प्रतीत होता है कि कई खाताओं में डीआर बैलेंस है.
(नोट : इसके अलावा 17 बिंदुओं पर टेस्ट ऑडिट में वित्तीय अनियमितता दिखायी गयी है.)
नियमानुसार कार्रवाई होगी
कोल बोर्ड को-ऑपरेटिव सोसाइटी की टेस्ट ऑडिट रिपोर्ट आ गयी है. रिपोर्ट का अध्ययन कराया जा रहा है. जो रिपोर्ट आयी है, उसमें काफी अनियमितता का मामला सामने आया है. एक-दो दिनों में नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी. जो दोषी होंगे उन पर निश्चित रूप से कार्रवाई होगी.
विजय कुमार, निबंधक, सहकारिता
ऑडिटर ने आधी-अधूरी रिपोर्ट दी
ऑडिटर पर विभागीय दबाव बनाया गया है. ऑडिटर ने आधी-अधूरी रिपोर्ट दी है. निबंधन सहयोग समितियां के समक्ष साक्ष्य के साथ पूरा कागजात प्रस्तुत किया जायेगा.