अक्षय तृतीया00 रिखियापीठ में गंगा की तरह अटूट निष्काम सेवा : स्वामी सूर्यप्रकाश

Published by : AMARNATH PODDAR Updated At : 20 Apr 2026 6:44 PM

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देवघर के रिखियापीठ में अक्षय तृतीया पर तीन दिवसीय अनुष्ठान का भव्य समापन हुआ। ललिता महिला समाजम, तमिलनाडु की दक्ष योगिनियों ने श्रीविद्या की तांत्रिक पूजा की और मंत्रोच्चारण किया। स्वामी सूर्य प्रकाश ने अक्षय तृतीया के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि इस दिन किए गए कार्य कभी नष्ट नहीं होते। उन्होंने स्वामी सत्यानंद जी के जीवन प्रसंग के माध्यम से सेवा और भक्ति की महत्ता भी समझाई। रिखिया पंचायत में शुरू की गई सेवा परंपरा निरंतर जारी है, जिसमें ग्रामीणों को प्रसाद, कन्याओं को साइकिल व पढ़ाई सामग्री दी जाती है। स्वामी निरंजनानंद जी व स्वामी सत्संगी जी के मार्गदर्शन में यह सेवा भाव गंगा की अटूट धारा की तरह चल रहा है। भक्तों ने सेवा और समृद्धि का संकल्प लिया।

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अक्षय तृतीया पर तीन दिवसीय अनुष्ठान का भव्य समापन संवाददाता, देवघर रिखियापीठ में अक्षय तृतीया के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति सोमवार को संपन्न हो गयी. इस अनुष्ठान का समापन ललिता महिला समाजम, तमिलनाडु की दक्ष योगिनियों द्वारा श्रीविद्या की तांत्रिक पूजा और मंत्रोच्चारण के साथ किया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया. अनुष्ठान के दौरान स्वामी सूर्य प्रकाश ने अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिन किए गए हर कार्य का कभी क्षय नहीं होता है. उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन ही पृथ्वी पर मां गंगा का अवतरण हुआ था, इसी कारण गंगा की धारा को अटूट माना जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि इसी दिन सूर्यदेव ने युधिष्ठिर सहित पांडवों को एक ऐसा पात्र प्रदान किया था, जिसमें अन्न का भंडार कभी समाप्त नहीं होता था. स्वामी सूर्य प्रकाश ने स्वामी सत्यानंद जी के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अक्षय तृतीया के दिन तपस्या के दौरान उन्हें ईश्वर से अपने पड़ोसियों की सेवा करने का आदेश प्राप्त हुआ था. उस समय उनके पास संसाधनों का अभाव था, लेकिन जरूरतमंदों की सेवा के लिए उन्हें मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिला और उनकी झोली भरती चली गयी. उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यानंद जी द्वारा रिखिया पंचायत में शुरू की गयी सेवा परंपरा आज भी निरंतर जारी है. वर्षों से ग्रामीणों के बीच देवी मां का प्रसाद वितरित किया जाता है, साथ ही कन्याओं को साइकिल और पठन-पाठन सामग्री भी प्रदान की जाती है. स्वामी सूर्य प्रकाश ने बताया कि स्वामी निरंजनानंद जी और स्वामी सत्संगी जी के मार्गदर्शन में रिखियापीठ में जनसरोकार और निष्काम सेवा गंगा की अटूट धारा की तरह प्रवाहित हो रही है. यह सेवा पूरी दुनिया के लिए एक आदर्श बन चुकी है. उन्होंने कहा कि धन, संपत्ति और संतोष की प्राप्ति का सबसे सरल उपाय दूसरों की सेवा में निहित है. अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर रिखियापीठ पहुंचे भक्तों ने भी दूसरों के जीवन में सुख, समृद्धि और सेवा का संकल्प लिया.

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