ब्रिटिश काल का इसाई कब्रिस्तान हो गया बदहाल
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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मधुपुर: पंपू तालाब के पास डेढ़ सौ वर्ष पूर्व अंगरेजों द्वारा बनाया गया इसाई कब्रिस्तान बदहाल है. कब्र में लगे अधिकतर संगमरमर को लोगों ने चोरी कर ली है. शेष बचे जगह अब लोगों के उपले सूखने के काम आ रहे हैं. सात साल पहले तक कब्रिस्तान के रख रखाव के लिए दिल्ली स्थित ब्रिटिश […]
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मधुपुर: पंपू तालाब के पास डेढ़ सौ वर्ष पूर्व अंगरेजों द्वारा बनाया गया इसाई कब्रिस्तान बदहाल है. कब्र में लगे अधिकतर संगमरमर को लोगों ने चोरी कर ली है. शेष बचे जगह अब लोगों के उपले सूखने के काम आ रहे हैं. सात साल पहले तक कब्रिस्तान के रख रखाव के लिए दिल्ली स्थित ब्रिटिश हाई कमिशन से प्रतिवर्ष एक तय राशि स्थानीय कमेटी को दी जाती थी. लेकिन अब राशि मिलनी बंद हो गयी है. इस कब्रिस्तान में एंगलो इंडियन व इंगलैंड के कई बड़े अधिकारियों, सैनिकों आदि के कब्र हैं. इसके अलावे द्वितीय विश्व युद्व में मारे गये कई अंगरेज सैनिकों के भी कब्र हैं. इनमें कई कब्रो को यूरोपियन शैली में सफेद व मार्बल से सजाया गया था.
हावड़ा, मधुपुर से पटना होते हुए दिल्ली रेल लाइन के निर्माण के दौरान मधुपुर को महत्वपूर्ण रेल जंक्शन का दर्जा मिला था. इसी काल में डाकबंगला के आसपास, बावन बीघा, रेल कॉलोनी के इलाकों में बड़े पैमाने पर अंगरेज अधिकारी आये व कॉलोनी बसा. शहर में चर्चित अंग्रेज अधिकारी के रूप में मिस्टर गोटिना, चैपल, सिजर व कोकसन आदि गिने जाते थे. उस दौरान रेल गार्ड, चालक से लेकर रेल के सभी बड़े अधिकारी अंग्रेज ही होते थे. इसी दौरान शहर के राजबाडी में कैथलिक व स्टेशन रोड में प्रोटेस्टेंड दो इसाई कब्रिस्तान बनाये गये. बताया जाता है कि देश के आजादी के बाद धीरे-धीरे सभी अंगरेज व एंग्लो इंडियन चले गये. हालांकि कब्रिस्तान की रख रखाव के लिए तब भी ब्रिटिश हाई कमान छह दशक तक सक्रिय रहा. लगभग एक दशक पूर्व झारखंड के मनोनीत विधायक जोसफ गांल्सिटन ने एक बार इसका जीर्णोद्धार भी कराया. लेकिन अब इस पर कोई ध्यान देने वाला नहीं है.
गीता प्रेस गली निवासी 91 वर्षीय राम प्रसाद घोष ने बताते हैं कि पूर्व में कोलकाता व आसनसोल के बाद मधुपुर अंगरेजों का सबसे बडा केंद्र था. अंगरेजों ने अपनी सुविधा के अनुसार मधुपुर में कैथोलिक स्कूल खोला. इसके अलावे यूरोपियन नृत्यघर, इंस्टीट्यूट, वॉल डांस, हॉजी खेल, डाकबंगला मैदान में मेला का आयोजन, एग्जिविशन के अलावे खतरनाक जंगली जानवरों के शिकार के शौकीन थे. उस समय कब्रिस्तान बनाया गया था. लेकिन वक्त के साथ कब्रिस्तान बदहाल हो गया.
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