देवघर : वो नहीं जानता था कि वह फेसबुक में डाल रहा है अपने जीवन का अंतिम लाइव वीडियो

Updated at : 02 Jan 2019 7:25 AM (IST)
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देवघर :  वो नहीं जानता था कि वह फेसबुक में डाल रहा है अपने जीवन का अंतिम लाइव वीडियो

देवघर : बाबा मंदिर मेें पूजा करने आये गिरिडीह के अनिल वर्मा को पता नहीं था कि वह अपनी जिंदगी का अंतिम लाइव वीडियाे फेसबुक पर डाल रहा है. वह नववर्ष पर काफी प्रसन्न मुद्रा में बाबा की पूजा करने अाया था तथा कतार में लगा हुआ था. मंदिर संस्कार मंडप प्रवेश करने के बाद […]

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देवघर : बाबा मंदिर मेें पूजा करने आये गिरिडीह के अनिल वर्मा को पता नहीं था कि वह अपनी जिंदगी का अंतिम लाइव वीडियाे फेसबुक पर डाल रहा है. वह नववर्ष पर काफी प्रसन्न मुद्रा में बाबा की पूजा करने अाया था तथा कतार में लगा हुआ था. मंदिर संस्कार मंडप प्रवेश करने के बाद काफी उत्साहित था.
उन्होंने अपने मोबाइल पर कतार का लाइव वीडियाे डाला था. इसमें अपने हाथ में डिब्बा में गंगाजल व बिल्व पत्र लिए हुए था. उनके आगे-आगे एक मित्र भी बोल बम का जयकारा लगाते दिख रहा है. उन्हें पता नहीं था कि बाबा अंतिम पूजा ले रहे हैं.
अपने फेसबुक में डाले वीडियो में वह संस्कार मंडप में आगे बढ़ता हुआ दिख रहा है. वह कई जगह पर रूक-रूक कर साथियों को अपनी तस्वीर दिखाया है. बावजूद एकाएक मंदिर गर्भ-गृह में प्रवेश करने के बाद बेहोश हो जाना लोगों को बात पच नहीं रही है. साथियों का कहना है था की अनिल की मौत के लिए अव्यवस्था ही दोषी है.
  • मंदिर प्रांगण के संस्कार मंडप से मंदिर जाते समय का है पूरा सीन
  • हाथ में था जल व बिल्व पत्र, बोल बम का लगा रहा था जयकारा
  • मंदिर के सहायक प्रभारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल
बाबा मंदिर पूजा करने आये श्रद्धालु की मौत से मंदिर के सहायक प्रभारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. मंदिर प्रशासक सह डीसी एक-एक कर पांच सहायक प्रभारी नियुक्त कर दिये हैं.
इसके बाद भी व्यवस्था के नाम पर कुछ खास नहीं दिख रहा है. मंदिर में कर्मी से अधिक अधिकारी आ रहे हैं. मंगलवार की घटना से मंदिर प्रशासक सह डीसी के पास लोगों के सवालों का जवाब नहीं सूझ रहा है. आखिर भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं की जा सकी.
क्यू कॉम्प्लेक्स के हॉल का नहीं हो रहा है सदुपयोग
क्यू कॉम्प्लेक्स के अंदर वर्तमान में पांच हॉल हैं. इसमें भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तीर्थयात्रियों को ठहराया जा सकता था. वहां पर भक्तों को रोक-रोक मंदिर गर्भ-गृह भेजना था. इससे भीड़ को नियंत्रित करने में आसानी होती.
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