देवघर AIIMS : 27 सप्ताह में जन्मी 1.2 किलो की नवजात को मिली नई जिंदगी, एनआइसीयू में किया गया सफल इलाज

बच्ची के साथ स्वास्थ्यकर्मी
एम्स देवघर ने 27 सप्ताह की गर्भावस्था में जन्मी 1.2 किलोग्राम वजनी नवजात बच्ची का सफल इलाज किया है. एनआइसीयू में उसे वेंटिलेटर और सीपीएपी सपोर्ट दिया गया. सख्त संक्रमण नियंत्रण और विशेषज्ञों की टीम के प्रयासों से बच्ची की स्थिति में सुधार हुआ.
AIIMS Deogarh News: एम्स देवघर ने नवजात शिशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल की है. संस्थान के डॉक्टर्सऔर नर्सिंग टीम ने महज 27 सप्ताह की गर्भावस्था में जन्मी 1.2 किलोग्राम वजन की एक प्री-टर्म बच्ची का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया. जन्म के तुरंत बाद बच्ची को गंभीर स्थिति में नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआइसीयू) में भर्ती किया गया. उसे वेंटिलेटर और बाद में सीपीएपी सपोर्ट पर रखा गया. लगातार निगरानी, समय पर जांच और आधुनिक उपचार के कारण बच्ची की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होता गया.
बाल रोग विभाग की टीम ने संभाली जिम्मेदारी
इलाज की पूरी प्रक्रिया बाल रोग विभाग के नेतृत्व में संचालित हुई. विभागाध्यक्ष डॉ सोमशेखर निम्बालकर नवजात रोग विशेषज्ञ डॉ समीर के ने अपनी टीम के साथ मिलकर बच्ची की लगातार निगरानी की. उपचार के दौरान माता-पिता को समय-समय पर बच्ची की स्थिति की जानकारी दी गयी और उन्हें आवश्यक परामर्श भी दिया गया.
सख्त संक्रमण नियंत्रण बना सफलता की वजह
एनआइसीयू में संक्रमण से बचाव के लिए अपनाये गए सख्त एसेप्टिक प्रोटोकॉल ने बच्ची के जल्द स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. चिकित्सकों के अनुसार अत्यंत प्री-टर्म नवजातों के इलाज में संक्रमण नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती होती है, जिसे एम्स की टीम ने प्रभावी ढंग से संभाला. इलाज के दौरान कार्डियोलॉजिस्ट डॉ स्मारक रंजन राउत, रेडियोलॉजिस्ट डॉ प्रदोष कुमार सारंगी और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ तजिंदर पाल ने भी अपनी विशेषज्ञ सेवाएं देकर बच्ची के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
माता-पिता ने जताया आभार
बच्ची के स्वस्थ होने पर उसके पिता मनीष जैकब और उनकी पत्नी एले कैथरीन ने एम्स देवघर के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और पूरे स्वास्थ्यकर्मी दल के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया. बच्ची के ग्रैंड फादर हेमंत जैकब ने भी डॉक्टरों और टीम के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और कर्मचारियों के अथक प्रयास, संवेदनशील देखभाल और निरंतर हौसला देने के कारण उनकी बच्ची को नया जीवन मिल सका.
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By श्वेता वैद्य
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