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देवघर : संताल परगना में चाइल्ड मैरिज व ट्रैफिकिंग सबसे ज्यादा

Updated at : 19 Dec 2018 8:22 AM (IST)
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देवघर  : संताल परगना में चाइल्ड मैरिज व ट्रैफिकिंग सबसे ज्यादा

देवघर : झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि राज्य में पॉक्सो एक्ट के मामले में लगातार इजाफा हो रहा है. औसतन राज्य भर से प्रत्येक माह 15-20 मामले सामने आ रहे हैं. गोड्डा व देवघर सहित संताल परगना मेें चाइल्ड मैरिज का ज्यादा सबसे मामला है. संताल परगना […]

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देवघर : झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने कहा कि राज्य में पॉक्सो एक्ट के मामले में लगातार इजाफा हो रहा है. औसतन राज्य भर से प्रत्येक माह 15-20 मामले सामने आ रहे हैं. गोड्डा व देवघर सहित संताल परगना मेें चाइल्ड मैरिज का ज्यादा सबसे मामला है.
संताल परगना में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. सिर्फ संताल परगना के विभिन्न जिलों से हर माह 10-15 युवक-युवतियां ट्रैफिकिंग के शिकार हो रहे हैं.
संताल परगना में चाइल्ड मैरिज व ट्रैफिकिंग की बढ़ती संख्या के बाद भी पिछले छह माह से आयोग के पास मासिक रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है. आइसीपीएस व डीसीपी को रिमाइंडर दिया गया है. बावजूद रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध नहीं करायी गयी, तो आयोग द्वारा उन्हें सम्मन भेजा जायेगा.
उन्होंने कहा : डीसी राहुल कुमार सिन्हा के साथ बैठक कर उन्हें पूरे मामले से अपडेट करा दिया गया है. डीसी से कहा गया है कि चाइल्ड प्रोटेक्शन सिस्टम को देवघर में मजबूत करें. बाबा मंदिर में हो रहे चाइल्ड मैरिज पर अंकुश लगाने के लिए सभी वैकल्पिक इंतजाम सुनिश्चित करायें. बेहतर परिणाम के लिए सिस्टम के अंदर सहयोग जरुरी है.
रेस्क्यू के बाद पुनर्वास बड़ी समस्या
आयोग की अध्यक्षा ने कहा कि गरीबी के कारण बाल श्रमिकों की संख्या बढ़ती है. आयोग के सामने मामला आने के बाद रेस्क्यू किया जाता है. बाल श्रम से बच्चों को मुक्त करा लिया जाता है. लेकिन, उनके पुनर्वास की समस्या कई मामले में बना रहता है. इस वजह से सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आता है.
समाज कल्याण विभाग भी समुचित सहयोग नहीं करता है. ग्राम पंचायत स्तर पर इस मामले को सामने नहीं लाया जाता है. न ही ग्राम पंचायत के स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जाता है. वर्ष 2015 तक झारखंड में 33 हजार बाल सुरक्षा समिति का गठन होना था.
अभी भी करीब आठ हजार बाल सुरक्षा समिति का गठन नहीं हुआ है. जहां समिति बन भी गया है वे भी पूरी तरह से फंग्शनल नहीं है. सिविल सोसाइटी के तहत एनजीओ को निर्देश दिया गया है कि वे चाइल्ड प्रोटेक्शन के तहत चाइल्ड मैरिज, ट्रैफिकिंग आदि की समस्याओं पर अंकुश लगाये.
संताल परगना की डीसीपी की बैठक आज
संताल परगना के विभिन्न जिलों के जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी (डीसीपी) के साथ बुधवार को मीटिंग बुलायी गयी है. विकास भवन देवघर में डीसीपी के साथ बैठक कर विभिन्न मामलों का बारी-बारी से समीक्षा कर आग्रेतर कार्रवाई की जायेगी. साथ ही सभी जिलों से अद्यतन रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
मॉनिटरिंग की जवाबदेही आयोग की
राज्य सरकार द्वारा बाल संरक्षण के लिए आयोग बना गया है. शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों की समुचित मॉनिटरिंग की जवाबदेही आयोग की है. प्रत्येक जिले में जिला बाल संरक्षण समिति काम करती है. साथ ही सरकार के स्तर से जिला बाल संरक्षण इकाई भी काम करती है. संताल परगना के किसी भी जिले से पिछले छह माह से नियमित रिपोर्टिंग नहीं किया गया है.
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