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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल कैद

Updated at : 10 Aug 2018 6:43 AM (IST)
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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल कैद

देवघर : जंगल में भैंस चराने गयी नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी पाये गये दिलशाद खान को 10 साल की सश्रम सजा सुनायी गयी. साथ ही 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. यह जुर्माना की राशि पीड़िता को दी जायेगी. अगर जुर्माना की राशि सजायाफ्ता भुगतान नहीं करता है, तो अलग से छह […]

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देवघर : जंगल में भैंस चराने गयी नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी पाये गये दिलशाद खान को 10 साल की सश्रम सजा सुनायी गयी. साथ ही 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. यह जुर्माना की राशि पीड़िता को दी जायेगी. अगर जुर्माना की राशि सजायाफ्ता भुगतान नहीं करता है, तो अलग से छह माह की कैद काटनी होगी. यह सजा सेशन जज एक सह स्पेशल जज विजय कुमार की अदालत द्वारा दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद भरी अदालत में सुनायी गयी.
दोषी मधुपुर थाना क्षेत्र के राजदाहा गांव का रहनेवाला है. ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष से स्पेशल लोक अभियोजक ब्रह्मदेव पांडेय व बचाव पक्ष से अधिवक्ता अली अतहर ने पक्ष रखा. अभियोजन पक्ष से घटना के समर्थन में कुल 12 लोगों ने गवाही कोर्ट में दी तथा दोष सिद्ध करने में सफल रहे.
31 अक्तूबर 2017 को हुई थी घटना
मधुपुर थाना क्षेत्र में 31 अक्तूबर 2017 को यह घटना हुई थी. एक गांव की नाबालिग गांव के निकट जंगल में भैंस चरा रही थी. वह अकेली थी. इस दौरान मौका का फायदा उठाकर दिलसाद ने उसे दबोचा लिया व गला दबा कर हवस का शिकार बनाया. लड़की काे जान से मार देने की धमकी भी दी. दर्ज एफआइआर के अनुसार पीड़िता ने घर जाकर घटना की जानकारी अपने मां-पिता को दी. इसके बाद पीड़िता की मां ने मधुपुर थाना में केस दर्ज कराया.
नाबालिग लड़की दलित समुदाय की रहने के चलते दुष्कर्म के अलावा पॉक्सो एक्ट व एससीएसटी एक्ट की धारा आरोपित के विरुद्ध लगायी गयी. केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया जिसमें दिलसाद खान के विरुद्ध घटना की पुष्टि की गयी. पश्चात केस सेशन कोर्ट में भेजा गया, जहां से स्पेशल कोर्ट में केस ट्रांसफर कर दिया गया. हाइकोर्ट के निर्देश पर स्पीडी ट्रायल हुआ व महज 285 दिनों में फैसला दिया गया. सूचक की पुत्री को त्वरित इंसाफ मिला.
इन आरोपों में मिली सजा
केस में दिलसाद खान को रेप व पॉक्सो एक्ट की धारा चार में दोषी पाया गया. इसके बाद सजा बिंदु पर बहस सुनी गई. चूंकि लड़की नाबालिग रहने के चलते आरोपित के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट की धारा चार लगायी गयी थी जिसमें दोषी पाकर 10 साल की सश्रम सजा दी गयी व उक्त जुर्माना लगाया गया. दुष्कर्म की धारा व पॉक्सो एक्ट की धारा एक ही प्रकृति के रहने के चलते सिर्फ पाॅक्सो एक्ट में ही सजा दी गयी.
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