संसाधन की कमी से जूझ रहा एएस कॉलेज

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अभाव . प्राचार्य ने विभाग को भेजी डीपीआर, कहा बड़ा परीक्षा हॉल, ऑडिटोरियम, इंडोर स्टेडियम, बीबीए, बीसीए व लाइब्रेरी साइंस भवन की आवश्यकता देवघर : एएस कॉलेज देवघर की स्थापना 1969 में हुई थी. कॉलेज की खासियत यह है कि यहां के कॉमर्स स्ट्रीम के विद्यार्थियों ने न सिर्फ झारखंड बल्कि देश के विभिन्न क्षेत्रों […]

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अभाव . प्राचार्य ने विभाग को भेजी डीपीआर, कहा

बड़ा परीक्षा हॉल, ऑडिटोरियम, इंडोर स्टेडियम, बीबीए, बीसीए व लाइब्रेरी साइंस भवन की आवश्यकता
देवघर : एएस कॉलेज देवघर की स्थापना 1969 में हुई थी. कॉलेज की खासियत यह है कि यहां के कॉमर्स स्ट्रीम के विद्यार्थियों ने न सिर्फ झारखंड बल्कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सफलता का लोहा मनवाया है. यहां के विद्यार्थी आज भी देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में चार्टर्ड अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं. पिछले चार दशकों में कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ. आंकड़ों के अनुसार कॉलेज में करीब आठ हजार विद्यार्थी नामांकित हैं. लेकिन, विद्यार्थियों के भीड़ के आगे कॉलेज का इन्फ्रास्ट्रक्चर व मानव संसाधन आज भी कम है. कॉलेज में परीक्षा के दौरान एक हजार परीक्षार्थियों के बिठाने के लिए बड़ा हॉल,
ऑडिटोरियम, खेलकूद के लिए इंडाेर स्टेडियम, बीबीए, बीसीए एवं लाइब्रेरी साइंस के लिए अलग-अलग कमरे की आवश्यकता है. लेकिन, वर्षों से इन्फ्रास्ट्रक्चर व मैन पावर कॉलेज को उपलब्ध नहीं हो पाया है. इधर कॉलेज के प्राचार्य ने संसाधनों के विकास के लिए डीपीआर विभाग को भेजी है.
कॉलेज में आठ हजार से ज्यादा छात्र
प्राचार्य ने कहा
‘कॉलेज में कमजोर एवं गरीब विद्यार्थियों की संख्या सबसे ज्यादा है. विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में इन्फ्रास्ट्रक्चर व शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी नहीं है. विद्यार्थियों के भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दो बड़े हॉ‍ल, एक ऑडिटोरियम, एक इंडोर स्टेडियम, बीबीए, बीसीए, लाइब्रेरी साइंस भवन की जरूरत है.’
– डॉ फणिभूषण यादव, प्राचार्य, एएस कॉलेज देवघर
कॉलेज में आधा से भी कम कर्मचारी
कॉलेज में शिक्षकों के 52, शिक्षकेतर कर्मचारियों में तृतीय श्रेणी के 41 एवं चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के 32 पद रिक्त हैं. लेकिन, वर्तमान में सिर्फ 24 शिक्षक, 18 तृतीय श्रेणी एवं 23 चतुर्थवर्गीय श्रेणी के कर्मचारी कार्यरत हैं. बांग्ला, जियोलॉजी, सांख्यिकी व मैथिली विभाग में शिक्षकों के सभी पद रिक्त पड़े हैं.
विद्यार्थियों ने कहा
‘शिक्षकों के अभाव में नियमित पढ़ाई नहीं होती है. नतीजा ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थियों को हमेशा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.’
– बबलू कुमार दास
‘एम कॉम की कक्षाएं नियमित होती हैं. विद्यार्थियों के बैठने के लिए और भी कमरों की आवश्यकता है. इस पर ध्यान देना होगा. ताकि विद्यार्थियों को मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़े.’
– प्रिया भारती
‘कॉलेज में विद्यार्थियों की भीड़ हमेशा रहती है. लेकिन, कई विभागों में शिक्षकों की कमी की वजह से विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई से वंचित रहना पड़ता है.’
– सुजाता कुमारी
‘इंटरमीडिएट एवं स्नातक स्तर पर शिक्षकों की कमी है. विद्यार्थियों के अनुपात में शिक्षकों की संख्या में इजाफा होना जरूरी है. ताकि विद्यार्थी वर्ग से वंचित नहीं रहें.’
– विजय कुमार कुशवाहा
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