देवघर कॉलेज: 75 वर्षों का रहा है समृद्ध इतिहास, अब हाल-बेहाल, शिक्षक कमें, छात्रों की उपस्थिति घटी

Updated at : 11 Sep 2017 9:37 AM (IST)
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देवघर कॉलेज: 75 वर्षों का रहा है समृद्ध इतिहास, अब हाल-बेहाल, शिक्षक कमें, छात्रों की उपस्थिति घटी

एसकेएमयू दुमका के अंतर्गत देवघर के तीन कॉलेजों में इंटरमीडिएट, स्नातक व स्नातकोत्तर की पढ़ाई के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा दी जा रही है. इन काॅलेजों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये संसाधनों व वेतन में खर्च किये जा रहे हैं. लेकिन, आज भी कॉलेजों में बुनियादी जरूरत के साथ-साथ वर्ग कक्ष में […]

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एसकेएमयू दुमका के अंतर्गत देवघर के तीन कॉलेजों में इंटरमीडिएट, स्नातक व स्नातकोत्तर की पढ़ाई के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा दी जा रही है. इन काॅलेजों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये संसाधनों व वेतन में खर्च किये जा रहे हैं. लेकिन, आज भी कॉलेजों में बुनियादी जरूरत के साथ-साथ वर्ग कक्ष में नियमित छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित कराना, प्राध्यापकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की कमी को दूर करना बड़ी चुनौती बनी हुई है. प्रभात खबर काॅलेजों की समस्या व कमियों पर विस्तार से पड़ताल कर रहा है. पहली कड़ी में प्रस्तुत है देवघर कॉलेज की पड़ताल.
देवघर : एक अगस्त 1951 में स्थापित देवघर कॉलेज का काफी समृद्ध इतिहास रहा है. यह कॉलेज सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका की अंगीभूत इकाई है. कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य कृष्णनंदन सहाय, कॉलेज की प्रशासनिक समिति के प्रथम अध्यक्ष पंडित विनोदानंद झा एवं प्रथम सचिव उमापति बनर्जी हुए. 75 वर्ष से ज्यादा का अनुभव सहेजे यह कॉलेज किसी परिचय का मुहताज नहीं हैं.

लेकिन, वर्तमान हालात काफी अलग हैं. कॉलेज में पर्याप्त संसाधन के बावजूद वर्ग कक्ष में विद्यार्थियों की 75 फीसदी उपस्थिति आज भी सपना बना हुआ है. यहां आइए, आइएससी, आइकॉम सहित विज्ञान व कला स्नातक प्रतिष्ठा, लॉ, बीसीए, बीबीए, बैचलर इन लाइब्रेरी साइंस एंड इंफॉरमेशन आदि की पढ़ाई होती है. इसके लिए प्राध्यापकों के स्वीकृत पद 70 में 25 कार्यरत तथा शिक्षकेतर कर्मचारियों के स्वीकृत 25 पद में से छह पद पर ही कर्मचारी कार्यरत हैं. सेवा अवधि पूरा होने के बाद प्राध्यापक व कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उस अनुपात में प्राध्यापकों व कर्मचारियों की बहाली नहीं हो रहा है. लैब डेमोस्ट्रेटर (प्रयोगशाला प्रदर्शक) का पद रिक्त पड़ा है. नतीजा विद्यार्थियों को प्रयोगशाला से वंचित रहना पड़ता है.

14 विभाग, अधिकांश में पद रिक्त
कॉलेज में कुल 14 विभाग हैं. अधिकांश विभागों में प्राध्यापकों की कमी है. आंकड़ों पर गौर करें तो हिंदी विभाग में छह में से तीन पद रिक्त, अंगरेजी विभाग में सात में से तीन पद रिक्त, मैथिली विभाग में स्वीकृत एक पद रिक्त, दर्शनशास्त्र विभाग में चार में से एक पद रिक्त, बंगला विभाग में दो में से एक पद रिक्त, राजनीति शास्त्र विभाग में तीन में से दो पद रिक्त, इतिहास विभाग में तीन में से दो पद रिक्त, अर्थशास्त्र विभाग में तीन में से एक पद रिक्त, गणित विभाग में चार में से तीन पद रिक्त, रसायन विभाग में चार में से दो पद रिक्त, भौतिकी विभाग में पांच में से चार पद रिक्त तथा जंतु विज्ञान विभाग में तीन में से दो पद रिक्त पड़ा है.
उपस्थिति पूरा नहीं करनेवाले को फॉर्म भरने से रोका जायेगा
देवघर कॉलेज के प्राचार्य डॉ सुधीर कुमार सिंह ने कहा वर्ग कक्ष में विद्यार्थियों की उपस्थिति 75 फीसदी अनिवार्य करने के लिए ठोस रणनीति बनायी जा रही है. निर्धारित 75 फीसदी उपस्थिति पूरा नहीं करने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा फॉर्म भरने से रोका जायेगा. साथ ही प्राध्यापकों से वर्ग कक्ष से संबंधित अद्यतन स्थिति भी हर दिन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
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