आदेश: लोअर कोर्ट का फैसला रखा बरकरार, सेशन जज ने कहा, मिलावट कर खाद्य सामग्री बेचना माफी योग्य नहीं
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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देवघर: सेशन जज चार लोलार्क दुबे की अदालत द्वारा मिलावटी पेड़ा मामले को लेकर दाखिल क्रिमिनल अपील में महत्वपूर्ण फैसला दिया है. श्रावाणी मेला के दौरान पेड़ा में मिलावट कर बेचने वाले व्यवसायी दिनेश कुमार को राहत नहीं दी है. लोअर कोर्ट के फैसले 9 माह की सजा को यथावत रख दिया है. साथ ही […]
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देवघर: सेशन जज चार लोलार्क दुबे की अदालत द्वारा मिलावटी पेड़ा मामले को लेकर दाखिल क्रिमिनल अपील में महत्वपूर्ण फैसला दिया है. श्रावाणी मेला के दौरान पेड़ा में मिलावट कर बेचने वाले व्यवसायी दिनेश कुमार को राहत नहीं दी है.
लोअर कोर्ट के फैसले 9 माह की सजा को यथावत रख दिया है. साथ ही लगाये गये जुर्माना को भी सही ठहराते हुए कायम रखा है.
फैसले में साफ तौर पर कहा गया है कि खाद्य पदार्थ पेड़ा में मिलावट कर बेचना माफी योग्य नहीं है. घोरमारा को पेड़ा का हब श्रद्धालु मानते हैं व विश्वास कर पेड़ा प्रसाद के लिए खरीद कर देश- विदेश तक ले जाते हैं. इससे गलत संदेश जाता है जो क्षमा के प्रार्थी नहीं है.
अपील करने वाले पेड़ा व्यवसायी दिनेश कुमार मोहनपुर थाना के घोरमारा के रहने वाले हैं, जिन्हें लोअर कोर्ट ने दोषी पाकर 9 माह की सजा व एक हजार रुपये जु़र्माना लगाया था. जुर्माना की राशि अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी.
कब हुआ था लोअर कोर्ट में फैसला
न्यायिक दंडाधिकारी जीके तिवारी की अदालत में 18 जुलाई 2013 को जीओसीआर केस नंबर 9/2005 राज्य बनाम दिनेश कुमार के मामले में दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला दिया था. इस मामले में अभियोजन पक्ष से महज दो गवाही दी गयी थी व दोष सिद्ध करने में सफल हुए थे. आरोपित को प्रीवेंशन ऑफ फूड एडल्ट्रेशन एक्ट के धारा 16 (1) (ए) (आइ) में दोषी करार दिया था व उक्त सजा दी गयी थी. यह मामला तत्कालीन सिविज सर्जन डा अंजनी कुमार मिश्रा के प्रतिवेदन पर 9 अगस्त 2005 को दर्ज हुआ था.
क्या था मामला
जिले में पेड़ा हब जाने वाले घोरमारा बाजार स्थित -भैया पेड़ा भंडार में खाद्य आपूर्ति निरीक्षक ने खोआ व पेड़ा का नमूना लिया था. निरीक्षक ने तीन पैकेट खरीद किया व रसीद भी प्राप्त की. इन तीनों डिब्बों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा. प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट जो आयी उसमें खोआ में दूध का जितना अंश होना चाहिए में नहीं पाया गया. इसमें मिलावट पायी गयी. इससे आम लोगों की सेहत पर असर पड़ सकती थी. सीएम के बयान पर जीओसीआर मुकदमा दर्ज किया गया. ट्रायल के दौरान मुकदमा के आरोपों के संबंध में गवाही दी गयी व आरोपित जो उक्त पेड़ा भंडार के प्रोपराइटर हैं. दोषी पाकर सजा दी गयी व जुर्माना लगाया गया. सजायाफ्ता पेड़ा व्यवसायी दिनेश कुमार ने लोअर कोर्ट के फैसले को जिला जज की अदालत में चुनौती दी थी जिसे सुनवाई के लिए सेशन जज चार की अदालत में भेज दिया गया जहां पर अपील खारिज कर दी गयी व निम्न न्यायालय के फैसले को सही ठहराया.
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