TSPC का इतिहास: माओवादी संगठन से टकराव के बीच उभरा उग्रवादी समूह, चतरा-कोयलांचल में लेवी के आरोपों से जुड़ा रहा नाम

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झारखंड में TSPC उग्रवादी संगठन का इतिहास माओवादियों से संघर्ष और लेवी वसूली के आरोपों से जुड़ा है। जानें कैसे सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने इस नेटवर्क पर दबाव बढ़ाया है।

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कुंदा. झारखंड में उग्रवादी गतिविधियों के इतिहास में तृतीय प्रस्तुति कमेटी यानी टीएसपीसी का नाम लंबे समय से सामने आता रहा है. सार्वजनिक रिपोर्टों और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े दस्तावेजों में संगठन के चतरा, पलामू, लातेहार, हजारीबाग समेत झारखंड के कई इलाकों में सक्रिय रहने का उल्लेख मिलता है. संगठन के गठन को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं, इसलिए इसके गठन के वर्ष और शुरुआती संरचना को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड को आधार बनाना जरूरी है.

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बताया जाता है कि संगठन माओवादी धड़े से अलग हुए लोगों के बीच मतभेद और वर्चस्व की लड़ाई के बाद अस्तित्व में आया. शुरुआती दौर में चतरा, पलामू, लातेहार और आसपास के इलाकों में इसका प्रभाव बढ़ने की बात सामने आती रही.

माओवादी संगठन से टकराव बना पहचान

टीएसपीसी की पहचान माओवादी संगठन के विरोधी उग्रवादी समूह के तौर पर भी सामने आती रही है. दोनों संगठनों के बीच क्षेत्रीय प्रभाव और वर्चस्व को लेकर टकराव की घटनाओं का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में मिलता है.

संगठन के गठन और शुरुआती गतिविधियों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं. ऐसे में इसके इतिहास को लेकर उपलब्ध पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और न्यायिक रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय आधार माना जाना चाहिए.

लेवी और जबरन वसूली के आरोप

झारखंड में उग्रवादी संगठनों के खिलाफ हुई विभिन्न पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई में लेवी और जबरन वसूली के मामले सामने आते रहे हैं. ठेकेदारों, कारोबारियों, निर्माण कार्यों और खनन गतिविधियों से जुड़े लोगों को निशाना बनाकर रकम वसूलने के आरोप भी जांच में सामने आये हैं.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विभिन्न जांच में भी उग्रवादी संगठनों से जुड़े लेवी और जबरन वसूली के मामलों का उल्लेख मिलता है. उदाहरण के तौर पर एनआइए ने 2025 में झारखंड के एक मामले में प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए लेवी वसूलने और कारोबारियों से जबरन रकम लेने की जांच का उल्लेख किया था.

चतरा और आसपास के इलाकों में रहा प्रभाव

टीएसपीसी की गतिविधियों को लेकर चतरा, पलामू और लातेहार समेत आसपास के इलाकों का नाम लंबे समय तक सामने आता रहा. कोयला खनन और निर्माण गतिविधियों वाले क्षेत्रों में संगठन के प्रभाव और लेवी वसूली को लेकर पुलिस कार्रवाई भी होती रही.

समय के साथ पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अभियानों में संगठन के कई प्रमुख कैडर गिरफ्तार किये गये या सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गये. कई मामलों में आरोपियों के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई भी हुई.

लगातार कार्रवाई से संगठन पर बढ़ा दबाव

सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के कारण झारखंड में विभिन्न उग्रवादी संगठनों के नेटवर्क पर लगातार दबाव बढ़ा है. एनआइए की हालिया जांचों में भी लेवी, जबरन वसूली, हथियार और उग्रवादी नेटवर्क से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रहने की जानकारी मिलती है.

टीएसपीसी के इतिहास को समझने के लिए चतरा और आसपास के कोयलांचल में हुए उग्रवादी संघर्ष, लेवी के मामले और सुरक्षा बलों की कार्रवाई महत्वपूर्ण कड़ियां हैं. संगठन के कई पुराने नेताओं और कमांडरों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद अब इसके बचे नेटवर्क और गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी हुई है.

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