जर्जर झोपड़ी में गुजर रही जिंदगी, 10 साल से पक्के मकान की आस में कसियाडीह-बूढ़ीगाडा के SC गरीब परिवार

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फोटो इसी तरह के आवास में रहते हैं लोग | Prabhat Khabar Network

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झारखंड के जोलडीहा पंचायत में अनुसूचित जाति के दर्जनों परिवार 10 साल से पक्के आवास की बाट जोह रहे हैं. जर्जर झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं गरीब परिवार.

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जोरी से अभिमन्यु सिंह की रिपोर्ट

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जोरी(चतरा). वशिष्ठ नगर थाना क्षेत्र के जोलडीहा पंचायत अंतर्गत कसियाडीह तथा बूढ़ीगाडा गांव में अनुसूचित जाति के दर्जनों जरुरतमंद गरीब परिवार आज भी जर्जर झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं. इस गांव में रहने वाले 100 से अधिक अनुसूचित जाति के गरीब परिवारों में से लगभग आधे से अधिक मजदूर परिवार पिछले करीब 10 वर्षों से पक्का आवास की मांग कर रहे हैं. लेकिन अब तक उन्हें पक्का आवास नहीं मिल.

ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरी कर परिवार चलाने के कारण उनके लिए खुद पक्का मकान बनाना संभव नहीं है. इसी वजह से वर्षों से जर्जर झोपड़ी में ही परिवार के साथ जीवन गुजारना पड़ रहा है.

कड़ाके की गर्मी, हाड़ कंपाने वाली ठंड और मुसलाधार बारिश में सिर छुपाने के लिए झोपड़ी नुमा कच्चा घर ही सहारा है. बारिश के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है. जर्जर छप्पर से पानी घर के अंदर टपकता है. इससे खाना बनाने, खाने और सोने तक में परेशानी होती है.

शौचालय में रखना पड़ता है खाद्य सामग्री

यमुना भुईयां अपनी पत्नी रीता देवी व तीन बच्चों के साथ जर्जर झोपड़ी में रहते हैं. उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान घर के अंदर पानी टपकने से खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है. मजबूरी में अनाज और अन्य सामान पेयजल स्वच्छता विभाग द्वारा बनाया गया शौचालय में रखना पड़ता है.

भुनेश्वर भुइयां, रिंकू भारती, प्रयाग भारती, कैलाश भारती, उमेश भारती, वकील भुइयां, कोयली भुइयां, रामरती देवी, प्रतिमा देवी, शांति देवी, रितु देवी, प्रेमा देवी, सोनी देवी, माना देवी, सरिता देवी, पूजा देवी, सुजंती देवी, गुड़िया देवी समेत कई अन्य अनुसूचित जाति के परिवार भी पक्का आवास मिलने की आस लगाए बैठे हैं.

10 साल से आश्वासन, नहीं मिला आवास

ग्रामीणों का आरोप है कि आवास के लिए उन्होंने पंचायत की मुखिया सोनिया देवी और संबंधित पंचायत सचिव से कई बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला. आज वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें आवास नहीं मिल सका है. ग्रामीणों का करना है कि पैसा देने वाले को आवास आवंटित किए जाने में नियमों का उल्लंघन की गई है.

बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित परिवार

ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर झोपड़ियों में रहने के कारण सबसे अधिक परेशानी बच्चों को होती है. बारिश में घर के अंदर पानी भरने और छप्पर से पानी टपकने के कारण रात में ठीक से सोना तक मुश्किल हो जाता है.

किसी तरह दीवार पर प्लास्टिक व पत्ता बिछाकर ठंड, धूप तथा बारिश से बचने का अ स्थायी व्यवस्था प्रत्येक वर्ष करना पड़ता है. परिवार में बच्चों के साथ जमीन में सोने के दौरान हमेशा जहरीले कीड़े तथा सांप बिच्छू के दंश झेलने का डर बना रहता है. बरसात के मौसम में झोपड़ी गिरने का डर परिवार के लोगों को सताता रहता है.

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने और पात्र गरीब परिवारों को जल्द से जल्द आवास उपलब्ध कराने की मांग की है.

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