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Chaibasa News : रजो पर्व में जा रहे युवक को हाथी ने दौड़ा कर कुचल डाला, मौत

Updated at : 16 Jun 2025 10:54 PM (IST)
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Chaibasa News : रजो पर्व में जा रहे युवक को हाथी ने दौड़ा कर कुचल डाला, मौत

भनगांव में रविवार देर शाम की घटना, वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश

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गुवा.

सारंडा जंगल के किरीबुरु वन प्रक्षेत्र अंतर्गत भनगांव में रविवार की शाम करीब 6:30 बजे एक हाथी ने ग्रामीण मुंगडू नायक( 35) को कुचल कर मार डाला. उक्त हाथी पिछले एक महीने से नवागांव और भनगांव में घूम रहा है. वह अबतक तीन ग्रामीणों की जान ले चुका है. इनमें दो घटना झारखंड और एक ओडिशा में हुई है. रविवार को गांव में रजो पर्व मनाया जा रहा था. गांव के पास झूला सजाया गया था. मुंगडू नायक अपने साथी के साथ पैदल जा रहा था. इसी बीच जंगल से हाथी अचानक बाहर निकला और दोनों युवकों पर हमला कर दिया. एक युवक किसी तरह आम के पेड़ की आड़ लेकर जान बचाने में सफल रहा. मुंगडू को हाथी ने लगभग 20-30 फीट तक दौड़ाकर कुचल दिया. घटनास्थल पर मृतक की चप्पल और टॉर्च मिला है. ग्रामीणों के अनुसार, उक्त हाथी ओडिशा सीमा से सटे गांव में एक महिला की जान ले चुका है. भनगांव निवासी उपेंद्र नायक और सीमा पार ओडिशा के एक ग्रामीण का घर रविवार की रात हाथी ने तोड़ दिया. हाथी लगातार जान-माल को नुकसान पहुंचा रहा है.

बच्चे स्कूल नहीं जा रहे, घरों से नहीं निकल रहीं महिलाएं

भनगांव, नवागांव और आसपास के इलाके में हाथी के भय से शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है. लोग झोपड़ियों से निकलना बंद कर चुके हैं. रात में आग जलाकर और पहरा दे रहे हैं. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. महिलाएं अकेले बाहर निकलने से कतरा रही हैं. वन विभाग ने दो दिन पहले भनगांव और आसपास के लोगों को टॉर्च और पटाखे वितरित किये थे. ग्रामीणों का कहना है कि यह कागजी सुरक्षा से ज्यादा कुछ नहीं है. हमले के वक्त न कोई सतर्कता थी, न कोई चेतावनी. हाथी अब पटाखे और आग से डरते नहीं हैं.

बंगाल से विशेषज्ञों की टीम बुलाने की तैयारी

वन विभाग के अनुसार, सारंडा डीएफओ ने उग्र हाथी को काबू में लाने के लिए पश्चिम बंगाल से प्रशिक्षित विशेषज्ञों की टीम बुलाने की प्रक्रिया शुरू की है. हालांकि, ग्रामीणों में गुस्सा है कि वन विभाग ने पहले से कार्रवाई नहीं की. ग्रामीणों ने वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त किया. ग्रामीणों ने कहा कि अगर शहर में ऐसी घटना होती, तो पूरी मशीनरी हरकत में आ जाती. हम जंगल में हैं, इसलिए कोई नहीं सुनता. ग्रामीणों की मांग है कि हाथी को पकड़कर अन्य जंगल में भेजा जाये या स्थायी समाधान के तहत गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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