गांधी जयंती पर रोलाडीह को मिलेगा तोहफा, नई लाइब्रेरी में किताबों से लेकर अखबार तक की सुविधा
नई लाइब्रेरी
महात्मा गांधी जयंती पर रोलाडीह में एक नई लाइब्रेरी का शुभारंभ हुआ है. यह ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का नया द्वार खोलेगी, जहाँ वे शांत वातावरण में पढ़ाई कर सकेंगे.
चक्रधरपुर: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में नई सौगात मिलने जा रही है. तुलसीराम मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट की ओर से तुलसीनगर रोलाडीह में नई लाइब्रेरी की शुरुआत की जा रही है. 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर लाइब्रेरी का विधिवत उद्घाटन होगा.
लाइब्रेरी शुरू होने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों, युवाओं, शोधार्थियों और शिक्षा प्रेमियों को शांत वातावरण में पढ़ाई करने की सुविधा मिलेगी. ट्रस्ट के ट्रस्टी शंकर लाल महतो ने बताया कि लाइब्रेरी शुरू करने का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल के बच्चों और युवाओं में पढ़ने की आदत और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देना है.
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मिलेगी मदद
शंकर लाल महतो ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों को अक्सर शांत जगह पर पढ़ाई करने और अलग-अलग विषयों की किताबें व समसामयिक सामग्री उपलब्ध होने में परेशानी होती है. इसी जरूरत को देखते हुए तुलसीनगर रोलाडीह में लाइब्रेरी स्थापित की गयी है.
विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार यहां आकर शांत वातावरण में पढ़ाई कर सकेंगे. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के साथ स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों, शोधार्थियों व अन्य शिक्षा प्रेमियों के लिए भी यह लाइब्रेरी उपयोगी होगी.
रोज मिलेंगे अखबार और समसामयिक पत्रिकाएं
लाइब्रेरी में देश-दुनिया की ताजा गतिविधियों से अपडेट रहने के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्र उपलब्ध रहेंगे. इसके अलावा समसामयिक विषयों से जुड़ी पत्रिकाएं भी रखी जाएंगी. पाठक इनका नियमित रूप से निःशुल्क अध्ययन कर सकेंगे.
लाइब्रेरी में साहित्य, इतिहास, समाज और शिक्षा समेत विभिन्न विषयों की किताबों का संग्रह भी तैयार किया गया है. महान साहित्यकारों और देश के प्रसिद्ध लेखकों की चुनिंदा किताबें भी यहां उपलब्ध रहेंगी.
कई प्रोफेसरों ने दान की अपनी किताबें
लाइब्रेरी के पुस्तक संग्रह को बेहतर बनाने में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से जुड़े प्रोफेसरों का भी सहयोग मिला है. कई प्रोफेसरों ने अपनी व्यक्तिगत किताबें दान की हैं. इनमें नागालैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. रवि रंजन, डॉ. एसपी मंडल और शांतिनिकेतन के प्रोफेसर डॉ. सिराजुल सहित अन्य शिक्षाविदों की ओर से दी गयी किताबें शामिल हैं.
ट्रस्ट का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र में लाइब्रेरी केवल किताबें पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं के ज्ञान व बौद्धिक विकास का केंद्र भी बन सकती है. गांधी जयंती पर लाइब्रेरी की शुरुआत को ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा और स्वाध्याय को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया है.
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