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Chaibasa News : फाइलेरिया से विकलांगता का खतरा, दवा जरूर खायें : डॉ वीरेंद्र

Updated at : 07 Aug 2025 10:41 PM (IST)
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Chaibasa News : फाइलेरिया से विकलांगता का खतरा, दवा जरूर खायें : डॉ वीरेंद्र

फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम : पश्चिमी सिंहभूम जिले में 10 से 25 अगस्त तक एमडीए-आइडीए अभियान चलेगा

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चाईबासा. फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है. इससे विकलांगता की नौबत आस सकती है. इस बीमारी को समाप्त करने के लिए सरकार एमडीए-आइडीए अभियान चला रही है. इसके तहत 10 से 25 अगस्त तक लोगों को दवा खिलायी जायेगी. पहले दिन बूथों पर दवा खिलायी जायेगी. इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी डोर-टू-डोर जाकर दवा खिलायेंगे. उक्त बातें वीबीडी (वेक्टर बोर्न डिजीज) के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहीं. गुरुवार को चाईबासा सदर अस्पताल के सिविल सर्जन सभागार में फाइलरेया उन्मूलन कार्यक्रम हुआ. इसके बाद डॉ सिंह ने प्रेस ब्रीफिंग की. उन्होंने कहा कि सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम से योग्य लोगों को फाइलेरिया रोधी तीन दवा डीइसी, एल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन निर्धारित खुराक में नि:शुल्क खिलायी जायेगी. शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी को समाप्त किया जा सके.

जिले में 15,73,723 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य :

सिविल सर्जन डॉ सुशांतो कुमार माझी ने कहा कि जिले में 15,73,723 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य है. इसके लिए 5106 प्रशिक्षित दवा प्रशासक, 2553 बूथ और 511 पर्यवेक्षक हैं. उन्होंने कहा कि 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमार लोगों को दवा नहीं खिलायी जायेगी. 1 से 2 वर्ष के बच्चों को केवल एल्बेंडाजोल दवा दी जायेगी. दवा खाली पेट नहीं खानी है.

मच्छर के काटने से होता है फाइलेरिया : डॉ कालुंडिया

जिला वीबीडी पदाधिकारी डॉ मीना कालुंडिया ने कहा कि मच्छर के काटने से फाइलेरिया फैलता है. इससे हाइड्रोसिल, लिम्पोडिमा जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लगातार तीन वर्षों तक दवा का सेवन करने पर फाइलेरिया को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है. मौके पर वीबीडी राज्य वित्त सलाहकार प्रवीण कुमार, पिरामल फाउंडेशन के अविनाश कात्यायन, डब्ल्यूएचओ के अखिलेश पटेल, जिला वीबीडी सलाहकार शशिभूषण महतो, सुरजीत गोयल आदि उपस्थित थे.

आमतौर पर दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं : सीएस

सीएस ने कहा कि आमतौर पर दवा का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है. यदि किसी को उल्टी, चक्कर, पेट दर्द, खुजली या बुखार जैसी शिकायत होती है, तो इसका अर्थ है कि उसके शरीर में पहले से फाइलेरिया के परजीवी हैं. दवा खाने के बाद वे मर रहे हैं. ये लक्षण कुछ समय में स्वत: समाप्त हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि आपात स्थिति के लिए जिले में 16 प्रशिक्षित रैपिड रिस्पांस टीमों को तैनात किया गया है, जो तुरंत इलाज की सुविधा उपलब्ध करायेंगे. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति दवा स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही खायें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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