Chaibasa News : चाईबासा सदर अस्पताल में खुलेगा डिस्चार्ज बेड हॉल

Updated at : 24 Apr 2025 11:50 PM (IST)
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Chaibasa News : चाईबासा सदर अस्पताल में खुलेगा डिस्चार्ज बेड हॉल

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की पहल, डिस्चार्ज बेड हॉल की योजना तैयार

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चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिला स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की सुविधा के लिए एक और कदम बढ़ाया है. जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं. मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (सीएस) डॉ सुशांतो कुमार माझी ने कहा कि चाईबासा सदर अस्पताल में जल्द ही डिस्चार्ज बेड हॉल की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए राज्य सरकार को पत्राचार किया गया है.

डिस्चार्ज के बाद यह न समझे की मरीज पूरी तरह से ठीक हो गया: सीएस

सीएस ने बताया कि डिस्चार्ज बेड हॉल के निर्माण से मरीजों और उनके परिजनों को काफी सुविधा मिलेगी. उन्होंने कहा कि जब किसी मरीज को अस्पताल से छुट्टी दी जाती है, तो डिस्चार्ज की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. यह प्रक्रिया मरीज और उसके देखभालकर्ता दोनों के लिए अहम होती है, क्योंकि इसके ज़रिए उन्हें आगे की देखभाल और उपचार से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां दी जाती हैं. सीएस ने स्पष्ट किया कि अस्पताल से छुट्टी मिलना यह संकेत नहीं होता कि मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है, बल्कि इसका आशय यह होता है कि अब उसकी स्थिति ऐसी है कि वह घर या किसी अन्य स्थान पर निरंतर उपचार प्राप्त कर सकता है. सीएस ने यह भी बताया कि जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध करा दी गयी हैं, जिससे मरीजों को बेहतर और त्वरित जांच सुविधा मिल सकेगी.

क्या होता है डिस्चार्ज बेड हॉल

यह एक अलग हॉल या वार्ड होता है जहां उन मरीजों को कुछ समय के लिए ठहराया जाता है जिन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल रही होती है. मरीजों को इस हॉल में रखते हुए उन्हें डिस्चार्ज की प्रक्रिया समझाई जाती है. जैसे आगे की दवाएं, देखभाल कैसे करनी है, फॉलोअप कब करना है, किन चीज़ों से परहेज़ रखना है. अगर मरीज को एंबुलेंस, दवाएं या घर ले जाने की कोई व्यवस्था करनी है, तो वह भी यहां से हो सकती है.

जरूरत क्यों पड़ी

कई बार डिस्चार्ज की प्रक्रिया में देर होती है और मरीज को बिना जरूरत के बेड पर रोकना पड़ता है, जिससे नए मरीजों को बेड मिलने में देरी होती है. डिस्चार्ज बेड हॉल से अस्पताल में बेड टर्नओवर तेज होता है और मरीजों को एक व्यवस्थित माहौल में जरूरी जानकारी दी जा सकती है.

क्या हैं फायदे

मरीजों और परिजनों को स्पष्ट और संपूर्ण जानकारी मिलती है.

अस्पताल के मुख्य वार्डों में बेड की उपलब्धता बढ़ती है.

देखभाल की निरंतरता बनी रहती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANUJ KUMAR

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