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सेना मेडल से सम्मानित हुए लेफ्टनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार, बोकारो से है खास नाता, जानें क्यों मिला सम्मान

भारतीय सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार सेना मेडल से सम्मानित हुए हैं. बोकारो के फुसरो निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल श्री कुमार को यह सम्मान वर्ष 2019 में माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए दिया गया. कर्नल श्री कुमार कई अन्य सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैं.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news: सेना मेडल से सम्मानित होते लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार.
Jharkhand news: सेना मेडल से सम्मानित होते लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार.
प्रभात खबर.

Jharkhand news: बोकारो जिला के फुसरो निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार को सेना मेडल से सम्मानित किया गया है. यह पुरस्कार उत्तर प्रदेश के बरेली में आयोजित मध्य कमान अलंकरण समारोह में सेंट्रल आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी द्वारा पर्वतारोहण क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने के लिए तथा वर्ष 2019 में माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए दिया गया.

16 मई, 2019 को एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा

मालूम हो कि कर्नल कुमार ने 16 मई, 2019 की सुबह 08:30 बजे भारतीय सुरक्षा गार्ड के 16 सदस्यीय दल का नेतृत्व करते हुए माउंट एवरेस्ट पर पहली बार कदम रखा और भारतीय तिरंगे झंडे को फहराया. यह मुकाम हासिल करने वाले कुमार झारखंड के कुछ शीर्ष लोगों में से एक हैं. दुर्गम परस्थितिियों का सामना करते हुए एवरेस्ट से लौटते वक्त इस अभियान में कर्नल कुमार बुरी तरह जख्मी भी हुए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बर्फ की कठिन चट्टानों का सामना करते हुए अपने दल को सही सलामत नीचे लेकर आये. इस पूरे अभियान को पूरा करने में इन्हें 60 दिन से भी ज्यादा का समय लगा.

तेनजिंग नोर्गे शेरपा राष्ट्रीय साहस पुरस्कार, 2020 से भी सम्मानित

बता दें कि कर्नल कुमार को हाल ही में भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा तेनजिंग नोर्गे शेरपा राष्ट्रीय साहस पुरस्कार 2020 से भी सम्मानित किया गया था. यह पुरस्कार भारत के प्रथम माउंट एवरेस्ट पर विजय हासिल करने वाले तेनजिंग नोर्गे के नाम पर दिया जाने वाला उत्कृष्ट क्षेत्र में सवोच्च पुरस्कार है जो श्री कुमार को 13 नवंबर, 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा राष्ट्रपति भवन में दिया गया था.

माता-पिता को सफलता का श्रेय

बोकारो जिला में जन्मे कर्नल जय प्रकाश विगत 2005 से भारतीय सेना में कार्यरत हैं और वो डोगरा रेजिमेंट से ताल्लुख रखते हैं. अपने 16 वर्ष के कार्यकाल के दौरान कर्नल कुमार ने विगम परिस्थितियों का सामना करते हुए कठिन से कठिन जगहों पर रहकर देश सेवा की और प्रदेश का नाम रोशन किया. पर्वतारोहण के क्षेत्र में इस सफलता का श्रेय कर्नल कुमार अपने पिता दयानंद प्रसाद और मां रामकली देवी को देते हैं.

फुसरो में हुई प्रारंभिक शिक्षा

कर्नल कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बेरमो स्थित फुसरो से की और वर्ष 1991 में सैनिक स्कूल तिलैया के लिए चयनित हुए. जहां से 1998 में उन्होंने 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद 2003 में मगध यूनिवर्सिटी से स्नातक किया. वर्ष 2004 में उनका चयन भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के लिए हुआ और 18 महीने की ट्रेनिंग के बाद वर्ष 2005 में भारतीय पैदल सेना में अधिकारी के रूप में पदस्थापित हुए. इसके बाद कर्नल कुमार जम्मू कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश तथा सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुर्गम जगहों पर कार्यरत रहे. उन्होंने अपना कुछ समय भारतीय सेना मुख्यालय को भी दिया.

2017 में एवरेस्ट पर्वतारोहण दल के नेतृत्व का मिला कार्यभार

वर्ष 2017 में कर्नल कुमार को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड ने एवरेस्ट पर्वतारोहण दल का नेतृत्व करने के लिए चयनित किया और इस नये मिशन का कार्यभार सौंपा. कुमार ने पर्वतारोहण दल को प्रशिक्षण दिया और पांच पर्वतारोहण अभियान के बाद अपने अंतिम 16 सदस्यीय दल को एवरेस्ट के लिए चयनित किया. जिसका नतीजा मई 2019 में आया जब दल के 11 सदस्यों ने सफलता पूर्वक एवरेस्ट को नेपाल के दक्षिणी रास्ते से सफलतापूर्वक फतह किया और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के प्रथम एवरेस्ट मिशन को सफल बनाया.

40 से अधिक विभिन्न चोटियों को किया फतह

पर्वतारोहण की शुरुआत कर्नल कुमार ने वर्ष 2009 में सोनमार्ग से की और अब तक उन्होंने कुल 40 से भी ज्यादा कठिन और विभिन्न चोटियों को फतह किया. 16 साल की अपनी लंबी कार्यसेवा में कुमार कई बार भारी बर्फबारी और खराब मौसम की चपेट में आकर जख्मी भी हुए, पर उन्होंने विकट परिस्थिति में भी धैर्य और साहस का परिचय दिया और अपने दल को सफलता पूर्वक सही सलामत नीचे लेकर आये. कर्नल कुमार के अन्य प्रमुख चढ़ाइयों में माउंट थालेसागर, माउंट नून, माउंट ममोस्टोंग कांगड़ी, माउंट सतोपंथ, मचोई चोटी, माउंट भागीरथी, माउंट लियो तथा रियो परगियाल, माउंट देव टब्बिा, माउंट जोगिन, माउंट लोबुचे, माउंट कनामो, माउंट जोगसे, माउंट आईबेक्स, चांगो चोटी, पिन पार्वती पास, काला पत्थर, माउंट पार्वती, फर्कयोकुला पास, थूकला पास, माउंट कुल्लु पुमोरी इत्यादि शामिल हैं. इसके अलावा लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में इन्होंने कई नई चोटियों और पहाड़ी रास्तों का संकलन किया और नये रास्तों से पर्वत चोटियों को फतह किया. वर्ष 2021 में सतोपंथ और त्रिशूल चोटियों पर बचाव दल का भी सफल नेतृत्व किया और सितंबर में सतोपंथ से 2005 से लापता अपने एक पुराने साथी नाइक अमरीश त्यागी के मृत शरीर को 16 साल बाद ढूंढ निकाला और उसके पार्थिव शरीर को उसके परिवार को सुपुर्द किया.

हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य

पर्वतारोहण क्षेत्र में इन उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कुमार को कई अन्य पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है. अक्टूबर 2021 में माउंट त्रिशूल में भारतीय नौसेना के लापता 6 पर्वतारोहियों को ढूंढने के लिए जब कर्नल कुमार को उत्तराखंड के चमोली जिला स्थित रोंटी ग्लेशियर भेजा गया, तब उन्होंने वहां अपने 9 सदस्यीय दल का नेतृत्व करते हुए काफी सराहनीय कार्य किया, जिसकी प्रशंसा भारतीय नौसेना के सेनाध्यक्ष ने भी की और उन्हें चीफ ऑफ नेवल स्टाफ कमेंडेशन से 04 दिसंबर, 2021 को सम्मानित किया. इसके पहले भी उन्हें भारतीय सेनाध्यक्ष, भारतीय उपसेनाध्यक्ष और दो बार डायरेक्टर जनरल राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड द्वारा कमेंडेशन और प्रशंसा पत्र प्राप्त हुए हैं. पर्वतारोहण के साथ-साथ कुमार स्कीइंग, पैराजम्प, पैरामोटर, स्कूबा डाइविंग, ट्रैकिंग, स्काई डाइविंग, राफ्टिंग और आइस स्केटिंग में भी माहिर हैं.

Posted By: Samir Ranjan.

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